
Palamu : 8 जून 2015 को बकोरिया की भेलवाघाटी में हुई पुलिस व नक्सलियों की कथित मुठभेड़ की जांच करने पहुंची सीबीआइ टीम ने गुरुवार को जैसे ही घटना का डेमो शुरू किया, तेज बारिश होने लगी. इस कारण अधिकारियों को जांच बीच में ही छोड़कर निकलना पड़ा.
बता दें कि दिल्ली से आयी सीबीआइ की एफएसएल सहित अन्य अधिकारियों की टीम ने मामले को खंगालना शुरू कर दिया है. पिछले 24 घंटे के दौरान अधिकारियों ने कई स्तरों पर जांच की.
कई पुलिस अधिकारियों से पूछताछ के बाद गुरुवार को सतबरवा थाना में मुठभेड़ के बाद जब्त कर रखे गये स्कॉर्पियो सहित अन्य सामानों की जांच की गयी.
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चार घंटे तक हुई सतबरवा थाना में जांच
सुबह 10.30 बजे सीबीआइ एफएसएल डायरेक्टर डॉ. निलेन्दु विकाश वर्धन के नेतृत्व में सात सदस्यीय जांच टीम सतबरवा थाना पहुंची. दोपहर 2 बजे तक सामानों की जांच की.
दोपहर करीब सवा दो बजे टीम बकोरिया के भेलवाघाटी पहुंची. यहां नाट्य रूपांतरण के माध्यम से टीम के अधिकारी घटना को समझने की कोशिश कर रहे थे.
जांच में बारिश बनी विलेन
पूछताछ के दौरान मामले में नया मोड़ आने पर एजेंसी ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है. दोपहर बाद सीबीआइ और सेंट्रल फॉरेंसिक लैब के डायरेक्टर एनबी वर्धन की टीम ने बकोरिया में घटनास्थल पर नाट्य रूपांतरण किया.
डेमो का कार्य प्रारंभ ही हुआ था कि अचानक तेज बारिश शुरू हो गयी. तेज बारिश हो जाने पर सीबीआइ अधिकारियों को जांच बीच में ही रोककर मौके से निकलना पड़ा.
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सर्किट हाउस में हुई पुलिस अधिकारियों से पूछताछ
इससे पहले बुधवार शाम मेदिनीनगर पहुंचने पर सीबीआइ की टीम ने सर्किट हाउस में सतबरवा के तत्कालीन थाना प्रभारी और कांड में प्राथमिकी दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारी मो. रूस्तम से मामले में चार घंटे तक पूछताछ की.
पूछताछ के दौरान मो. रूस्तम के अपने बयान से पलट जाने की सूचना है.
घटना की प्राथमिकी बतौर एनकाउंटर दर्ज कर इस मामले में शिकायतकर्ता बने मो. रुस्तम ने अब सीबीआइ की पूछताछ में पलामू सदर थाना के तत्कालीन प्रभारी हरीश पाठक के बयान का समर्थन किये जाने की जानकारी मिली है.
चर्चा यह भी है कि मो. रुस्तम ने सीबीआइ के समक्ष ये भी कहा है कि उन्होंने खुद एफआइआर नहीं लिखी है बल्कि अफसरों ने लिखित एफआइआर पर दबाव डालकर हस्ताक्षर कराया है.
गुलाम से भी पूछताछ
सीबीआई अधिकारियों ने सतबरवा से सटे मनिका के तत्कालीन थाना प्रभारी गुलाम रबानी से भी पूछताछ की. गुलाम रबानी ने सीबीआइ को बताया है कि सतबरवा के पड़ोस में होने के बाद भी उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी.
हालांकि तत्कालीन सतबरवा थानेदार मोहम्मद रुस्तम के बयान से पलटने की सीबीआइ ने पुष्टि नहीं की है.
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