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राफेल मामला फिर गर्माया, कांग्रेस ने कहा, भाजपा सरकार और दसॉ के बीच मैच फिक्स्ड है  

राफेल डील पर सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के पास जमा किये गये हलफनामे और दसॉ के सीईओ ट्रैपियर की सफाई के बाद कांग्रेस ने फिर हमला बोला है.  

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NewDelhi : राफेल मामला फिर गर्मा गया है. राफेल डील पर सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के पास जमा किये गये हलफनामे और दसॉ के सीईओ ट्रैपियर की सफाई के बाद कांग्रेस ने फिर हमला बोला है.  बता दें कि सरकार के हलफनामे को गलत साबित करने के लिए कांग्रेस ने पांच सवाल उठाये हैं.  साथ ही कांग्रेस ने दसॉ के सीईओ के दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह सब मनगढ़ंत झूठ है. जान लें कि सुप्रीम कोर्ट बुधवार से राफेल डील   मामले की सुनवाई शुरू कर रहा है.  कांग्रेस ने सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या 36 राफेल खरीदने के कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से अप्रैल 2015 में ऐलान होने के तीन महीने बाद ही हो गये थे.  कांग्रेस ने सरकार से यह भी पूछा है कि क्या सिर्फ 36 प्लेंस खरीदने का फैसला करने में उसने समुचित प्रक्रिया अपनाई थी? कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार से सवाल पूछने के क्रम में   दावा किया कि सरकार ने कोर्ट में जो हलफनामा दिया है, वह खुलासा करने से ज्यादा छिपानेवाला है.

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 सरकार कैसे इस नतीजे पर पहुंच गयी कि हमें 36 राफेल फाइटर प्लेंस खरीदने हैं

तिवारी ने कहा, हम सरकार से यह जानना चाहते हैं कि क्या मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और 36 राफेल एयरक्राफ्ट खरीदने के कॉन्ट्रैक्ट के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई गयी थी या फिर कॉम्बैट एयरक्राफ्ट का कॉन्ट्रैक्ट 36 राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट की खरीदारी के साथ दुमछल्ले की तरह जोड़ दिया गया.  इसका जिक्र सरकार के हलफनामे के पैरा 18 और पैरा 21 में किया गया है. तिवारी के अनुसार अगर ऐसा नहीं है तो फिर कैसे 10 अप्रैल 2015 को जब पीएम मोदी फ्रांस गये तो सरकार कैसे इस नतीजे पर पहुंच गयी कि हमें 36 राफेल फाइटर प्लेंस खरीदने हैं जबकि कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोसेस को खत्म करने का औपचारिक निर्णय जून 2015 को लिया गया था? तो अगर मामला कॉम्बैट एयरक्राफ्ट का प्रोसेस खत्म नहीं किये जाने से जुड़ा नहीं है क्योंकि सरकार ने दावा किया है कि दोनों के प्रोसेस अलग-अलग थे तो फिर कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोसेस को आधिकारिक रूप से खारिज करने से तीन महीने पहले आप कैसे 36 फाइटर प्लेंस के आंकड़े पर कैसे पहुंच गये.

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क्या सरकार ने 36 राफेल फाइटर की खरीदारी  पहले इंडियन एयरफोर्स से बात की?

क्या सरकार ने सिर्फ 36 राफेल फाइटर  की खरीदारी की डील करने से पहले इंडियन एयरफोर्स से उस बारे में बात की थी? तिवारी ने कहा, अगर ऐसा हुआ था तो सर्विसेज क्वॉलिटेटिव रिक्वायरमेंट्स कब शुरू किये गये   और फाइटर विमान की खरीदारी के लिए कब स्टेटमेंट ऑफ केस तैयार किया गया?  तिवारी ने डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल पर 36 फाइटर विमान की खरीदारी को लेकर पहले से ही मन बना लेने का आरोप लगाया है.  कहा कि पूरी प्रक्रिया पीएम के निर्णय को वैधता दिलाने के लिए गढ़ी गयी थी.  उन्होंने यह आरोप भी लगाया है कि ऑफसेट पार्टनर के लिए डिफेंस मिनिस्ट्री की मंजूरी की जरूरत को खत्म करने के लिए डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर 2013 को रेट्रोस्पेक्टिव तरीके से संशोधित किया गया.   रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार और दसॉ के बीच फिक्स्ड मैच है.  उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी और एरिक ट्रैपियर के पीआर स्टंट से भ्रष्टाचार को छिपाया नहीं जा सकता.

 राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तंज भरे लहजे में कहा था कि मोदी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी गलती मान ली है.  राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, सुप्रीम कोर्ट में मोदी जी ने मानी अपनी चोरी.  हलफनामें में माना कि उन्होंने बिना वासुसेना से पूछे कॉन्ट्रैक्ट बदला और 30,000 करोड़ रुपये अंबानी की जेब में डाले.  पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त.

नोटबंदी पर आरबीआई ने कहा है कि कोई लाभ नहीं हुआ. दो साल हो गये, लेकिन कैग ने अभी तक ऑडिट नहीं किया

अहम पदों पर काम कर चुके 60 रिटायर्ड अधिकारियों ने रफाल डील और नोटबंदी पर सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट में हो रही देरी का सवाल राष्ट्रपति के सामने रख दिया है. एनसी सक्सेना, रिटायर्ड IAS अधिकारी ने कहा, राफेल डील को साइन किए हुए साढ़े तीन साल हो गये हैं, लेकिन कैग अभी तक ऑडिट नहीं कर पाया है. ऐसा लगता है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रेशर पड़ा हो कैग पर रिपोर्ट नहीं लाने के लिए. नोटबंदी पर आरबीआई ने कहा है कि कोई लाभ नहीं हुआ. दो साल हो गये, लेकिन कैग ने अभी तक ऑडिट नहीं किया. इस पर हमारी चिंता है.पहला रफाल सितंबर में भारत को मिलेगा, लेकिन उसके पहले के चुनावों में भी इस सौदे पर हो रही राजनीति का असर दिख सकता है. सुप्रीम कोर्ट के बाद अब सीएजी से भी मांग हो रही है कि वो इसकी जांच करे.

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