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उपायुक्त से मिले निजी स्कूल के प्रतिनिधि, निजी स्कूलों को राहत मिलने की उम्मीद

Ranchi : शिक्षा विभाग की तरफ से निजी स्कूलों को केवल ट्यूशन फीस लेने का आदेश बीते साल दिया गया था. पर निजी स्कूलों ने नये शैक्षणिक सत्र में विभिन्न मदों में बढ़ोत्तरी करते हुए अभिभावकों से फीस ली. इसके बाद अभिभावक संघ की ओर से आंदोलन करने के बाद रांची उपायुक्त की तरफ से एक आदेश जारी किया गया कि निजी स्कूल केवल फीस लेंगे. अन्य किसी मद में बढ़ोत्तरी नहीं करेंगे.

उपायुक्त के इस आदेश के बाद रांची के 40 से अधिक निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों ने आज उपायुक्त से मुलाकात की. उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया. अपनी बात रखी.

इस संबंध में सहोदय स्कूल के अध्यक्ष और जेवीएम श्यामली के प्रिंसिपल समरजीत जाना ने बताया कि हमारे प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मुलाकात की और अपनी बात रखी है. उपायुक्त ने भी आश्वासन दिया है कि निजी स्कूलों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त कदम उठाये जायेंगे.

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उपायुक्त ने क्या दिया था आदेश

वर्तमान शैक्षणिक सत्र (2021-2022) में निजी स्कूल प्रबंधन शुल्क में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं कर सकेंगे. स्कूलों द्वारा शैक्षणिक सत्र 2020-2021 की तरह ही शैक्षणिक सत्र 2021-2022 में सिर्फ शिक्षण शुल्क (ट्यूशन फीस) मासिक दर पर लिया जायेगा.

स्कूल बंद रहने की अवधि तक किसी प्रकार का वार्षिक शुल्क, यातायात शुल्क अथवा अन्य किसी प्रकार का शुल्क अभिभावकों से नहीं लिया जायेगा. संबंधित शुल्क स्कूल प्रारंभ होने के बाद समानुपातिक आधार पर अभिभावकों से लिया जा सकेगा.

आदेश में यह भी कहा गया है किसी भी परिस्थिति में शिक्षण शुल्क जमा नहीं करने के कारण किसी भी छात्र का नामांकन रद्द नहीं किया जा सकेगा. साथ ही किसी भी छात्र को ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था से वंचित नहीं किया जायेगा.

स्कूलों में नामांकित छात्रों को बिना किसी भेदभाव के ऑनलाइन शिक्षण व्यवस्था व ऑनलाइन शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने की पूर्ण जिम्मेवारी विद्यालय प्रमुख की होगी. किसी भी परिस्थिति में अभिभावकों से विलंब शुल्क नहीं लिया जायेगा.

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क्या कहते हैं निजी स्कूल

निजी स्कूलों का कहना है कि सरकार और अभिभावकों को यह समझने की जरूरत है कि केवल ट्यूशन फीस से स्कूल के खर्चे नहीं चलते हैं. शिक्षक तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के वेतन के अतिरिक्त बिलिंग तथा बसों के लोन की ईएमआइ सहित अन्य खर्चों का भी मेंटेनेंस है.

शिक्षा जगत के लोग उपायुक्त के आदेश से आहत हुए हैं. कोविड -19 महामारी के प्रभाव के कारण जून 2020 में जारी आदेश के अनुसार यह मामला अभी भी विचाराधीन है. इस परिस्थिति में उपायुक्त द्वारा प्राइवेट स्कूल के खिलाफ आदेश जारी करना विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों पर गहरा आघात है.

उपायुक्त की ओर से लिए गये निर्णय, शिक्षण-कार्य एवं विद्यालय की कार्य प्रणाली के अस्तित्व को मिटा सकता है. निजी स्कूल उपायुक्त के आदेश के खिलाफ कोर्ट भी जा सकते हैं.

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