
- 23 जिलों के उपभोक्ता फोरम में है ही नहीं अध्यक्ष व कई सदस्य
- छह माह पहले ही लागू हुआ उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019
Ranchi : नया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के लागू होने के छह माह बाद भी उपभोक्ता फोरम में अभी तक कई महत्वपूर्ण पद खाली ही पड़े हैं. पिछले वर्ष जुलाई को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम लागू किया गया था. इसके बाद उम्मीद जतायी जा रही थी कि इससे उपभोक्ताओं को काफी हद तक लाभ मिल सकेगा, लेकिन स्थिति यह रही कि आज भी उपभोकताओं को अपने हक की लड़ाई के लिए इंतजार करना पड़ता है या तो उन्हें अपनी बात रखने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है. अभी तक करीब तीन हजार से अधिक उपभोक्ताओं की शिकायतें राज्य में लंबित है, जिसकी मुख्य वजह फोरम में पदों का रिक्त रहना बताया जा रहा है.
इस नए कानून को झारखंड सहित पूरे देश में लागू किए जाने के बाद भी रिक्त पदों को भरने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. आज इससे जुड़े मामलों पर पीआईएल भी किया जा चुका है. इसकी घोषणा के बाद कई राज्यों ने अपने रिक्त पदों को भरना भी शुरू कर दिया था. इसमें उत्तर प्रदेश सहित कई राज्य हैं जिसने रिक्त पदों पर बहाली की प्रक्रिया आरंभ भी कर दी है.
इस नए अधिनियम में उपभोक्ताओं को सशक्त करने के साथ उन्हें इसके विभिन्न अधिसूचित नियमों और प्रावधानों के माध्यम से उनके अधिकारों की रक्षा करने में मदद दिलाने की बात है. इस कानून के नियमों व प्रावधानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को उनके अधिकार के प्रति अधिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी.
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उपभोक्ताओं को अभी करना होगा इंतजार
उपभोक्ता अगर अपनी शिकायत दर्ज भी कराते हैं तो उन्हें न्याय मिलने में वक्त लग सकता है. सूबे के दो जिलों को छोड़ सभी जिलों में उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष पद अभी तक रिक्त हैं. अध्यक्ष पद के अलावा दो सदस्यों के भी कई जिलों में पद रिक्त हैं, जिससे नए कानून का लाभ मिलना तो दूर, पिछली की गई शिकायतें भी लंबित हैं. राजधानी रांची में भी अध्यक्ष पद रिक्त है और दो सदस्यों में से एक सदस्य के जिम्मे फोरम चल रहा है.
नियमावली बनी, तीन बार विज्ञापन निकला, पर नहीं हो सकी नियुक्ति
पिछले चार वर्षों में विभाग द्वारा तीन बार रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया. अंतिम विज्ञापन पिछले वर्ष 2019 को ही निकाला गया, जिसके बाद अध्यक्ष व सदस्य पदों के लिए कई योग्य उम्मीदवारों ने आवेदन भी किया है. लेकिन फिर इस पर कुछ नहीं हो पाया. मालूम हो कि अध्यक्ष पद के लिए सेवानिवृत्त जज और दो सदस्यों में एक सामाज सेवा से जुड़ी महिला और दूसरे पद में प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी ही सदस्य बन सकते हैं.
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सिर्फ देवघर व पलामू में ही हैं उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष
सूबे के 23 जिलों में अध्यक्ष पद रिक्त है. देवघर में ही अभी अध्यक्ष नियुक्त हैं. पलामू उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष रामधारी यादव पिछले वर्ष 30 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो गए. जबकि देवघर उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष लालजी सिंह कुशवाहा का कार्यकाल अगले वर्ष 2021 में 10 जुलाई को समाप्त हो जाएगा. इस अवधि तक अगर नियुक्ति नहीं की गई तो सभी जिलों के उपभोक्ता फोरम अध्यक्षविहिन हो जाएगा.
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नियुक्ति प्रक्रिया में आरक्षण बन रहा मुद्दा
पिछले वर्ष निकाली गई नियक्ति प्रक्रिया में आरक्षण मुख्य मुद्दा भी बन रहा है. सूत्रों के अनुसार नियमावली में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, बल्कि दूसरे राज्यों में भी फोरम की नियक्ति में आरक्षण रखा ही नहीं गया है. इसके बाद भी आरक्षण दिए जाने को लेकर सरकार अपनी बात रख रही है. अगर आरक्षण का प्रावधान होता है तो पूरे नियमावली को फिर से बदलना होगा और नियक्ति के लिए निकाले गए विज्ञापन को फिर से रद्द करना होगा. जबकि देश में कहीं भी इस फोरम में आरक्षण का प्रावधान किया ही नहीं गया है.
राज्य में उपभोक्ता फोरम में अध्यक्ष पद की स्थिति
गुमलाा – रिक्त
गोड्डा- रिक्त
दुमका – रिक्त
जामताड़ा – रिक्त
सिमडेगा – रिक्त
पलामू – रिक्त
धनबाद – रिक्त
लोहरदगा – रिक्त
रांची – रिक्त
पूर्वी सिंहभूम – रिक्त
खूंटी – रिक्त
चतरा – रिक्त
पाकुड़- रिक्त
सरायकेला – रिक्त
रामगढ़- रिक्त
कोडरमा – रिक्त
प सिंहभूम – रिक्त
गिरिडीह – रिक्त
देवघर – लालजी सिंह कुशवाहा
हजारीबाग – रिक्त
बोकारो – रिक्त
साहेबगंज – रिक्त
गढ़वा – रिक्त
लातेहार – रिक्त




