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जीडीपी वृद्धि दर तीन साल के सबसे निचले स्तर पर

News Wing, 1 Septembar: देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली अप्रैल-जून की तिमाही में घटकर 5.7ः पर आ गई है. यह इसका तीन साल का निचला स्तर है. यह लगातार दूसरी तिमाही है जबकि भारत की आर्थिक वृद्धि दर चीन से पीछे रही है. विनिर्माण गतिविधियों में सुस्ती के बीच नोटबंदी का असर कायम रहने से जीडीपी की वृद्धि दर कम रही है.

चीन ने जनवरी-मार्च और अप्रैल-जून तिमाहियों दोनों तिमाहियों में 6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है. इससे पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च) में भारत की जीडीपी की वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रही थी. 2016-17 की पहली तिमाही की संशोधित वृद्धि दर 7.9 प्रतिशत थी.

सालाना आधार पर विनिर्माण क्षेत्र में सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) भारी गिरावट के साथ 1.2 रह गया. एक साल पहले समान तिमाही में यह 10.7 प्रतिशत रहा था. इसकी मुख्य वजह यह रही कि एक जुलाई को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने की वजह से कंपनियां उत्पादन के बजाय पुराना स्टॉक निकालने पर ध्यान दे रही थीं.

जीडीपी के आंकड़ों पर चिंता जताते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर अपने निचले स्तर तक पहुंच चुकी है. इसकी वजह माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का क्रियान्वयन है. जीएसटी से पहले स्टॉक निकालने का काम लगभग पूरा हो चुका है. उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, जीएसटी के परिचालन में आने के बाद जहां तक विनिर्माण का सवाल है यह अपने निचले स्तर तक पहुंच चुका है. यह इससे नीचे नहीं जाएगा.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) द्वारा जारी राष्ट्रीय आय के आंकड़ों से पता चलता है कि पहली तिमाही की वृद्धि दर नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में सबसे कम है. मोदी सरकार ने मई, 2014 में कार्यभार संभाला था. इससे पहले जनवरी-मार्च, 2014 में जीडीपी की वृद्धि दर 4.6 प्रतिशत दर्ज हुई थी.

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