– दिव्यांगों के लिए झारखंड में कंपोजिट रीजनल सेंटर (सीआरसी) खोला जायेगा : केन्द्रीय मंत्री थंवरचंद्र गहलोत –
– देश के 50 शहरों के शासकीय भवनों में दिव्यांग जनों के लिए बाधामुक्त सुविधा उपलब्ध होगी : केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर –
– दिव्यांग जनों के लिये होगा सिंगल विडों सिस्टम- डॉ लुर्इस मरांडी –
रांची: मुख्यमंत्री दास ने कहा कि सरकारी प्रावधान के तहत नियुक्ति में दिव्यांगजनों को तीन प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। कट ऑफ मार्क्स ज्यादा होने के कारण इनके पद खाली रह जाते हैं। रिक्तियों का बैकलॉग हो जाता है। राज्य सरकार अब विकलांगों के बैकलॉग को समाप्त करने के लिए नियुक्ति में कट ऑफ मार्क्स घटायेगी। यह कट ऑफ मार्क एससी व एसटी प्रतियोगियों के कट ऑफ मार्क्स से भी कम होगा। वे मंगलवार को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आयोजित सुगम्य भारत अभियान के जागरूकता कार्यशाला के उदघाटन के अवसर पर लोगों को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री श्री दास ने कहा कि झारखंड के सात लाख दिव्यांगजनों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाने के लिए सरकार काम कर रही है। हमें दिव्यांगों के प्रति दया या उपकार का नहीं, बल्कि अपनेपन का भाव रखना चाहिए। श्री दास ने कहा कि विकास के लिए दृष्टि नहीं दृष्टिकोण की जरूरत है। नये बननेवाले सारे भवनों में दिव्यांगजनों की सुविधा का ख्याल रख कर ही डिजाइन तैयार कराया जा रहा है। सरकार अनुसूचित जाति व पिछड़ा वर्ग के छात्रावास बनाने को लेकर जल्द ही भारत सरकार को प्रस्ताव भेजेगी, ताकि जिला मुख्यालय में छात्रावास खोला जा सके। छात्रावास के लिए जैसे ही प्रस्ताव आयेगा, राज्य सरकार एक सप्ताह में जमीन उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी। उन्होंने मंत्रालय से आग्रह कि दीपावली से पहले झारखंड में कैंप लगा कर दिव्यांगजनों के बीच उपकरण का वितरण किया जाये।
इस अवसर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थंवरचंद्र गहलोत ने कहा कि दिव्यांगों के लिए झारखंड में कंपोजिट रीजनल सेंटर (सीआरसी) खोला जायेगा। इसमें दिव्यांगों को एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं मिलेगी। झारखंड सरकार की ओर से भवन या जमीन उपलब्ध कराये जाने के बाद जल्द ही यह सेंटर खोला जायेगा। इसके अलावा दिव्यागों की खेल में रुचि को देखते हुए नेशनल स्पोर्ट्स की स्थापना की जायेगी। मंत्रालय झारखंड में अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए छात्रावास खोलने में आर्थिक मदद करेगा। सरकार का प्रस्ताव आने के एक माह के अंदर मंत्रालय अपनी स्वीद्भति प्रदान कर देगा। दिव्यागों की आर्थिक, सामाजिक स्थित में सुधार के साथ भवनों, अस्पतालों, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड समेत अन्य जगहों पर सुगम्य साधन उपलब्ध कराने को लेकर नौ राज्यों में सुगम्य भारत अभियान की शुरुआत की गयी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 तक सभी घरेलु एयरपोर्ट को पूर्ण सुगम्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवधि में 50 प्रतिशत रेलवे स्टेशनों को भी पूर्ण सुगम्य बनाने की योजना है।
श्री गहलोत ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना एवं उनके संकल्प के अनुरूप भारत सरकार देश भर के दिव्यांग जनों के लिए यूनिवर्सल आइडेंटिटी कार्ड बना रही है। यह परिचय पत्र बहुपयोगी होगा और पूरे देश में मान्य होगाद्यउन्होंने बताया कि भारत सरकार अब तक दिव्यांग 46000 छात्र- छात्राओं को छात्रवृत्ति दे चुकी हैं। इसके अलावा अब तक 2000 कैम्प आयोजित कर लगभग 5 लाख से अधिक आध्ाुनिक उपकरण दिव्यांग जनों के बीच वितरित किये जा चुके हैं। उन्होंने आम जनों से दिव्यांग जनों को बेहतर और सहयोगात्मक वातावरण उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
इस अवसर पर भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा की देश के 50 शहरों के शासकीय भवनों में दिव्यांग जनों के लिए बाधामुक्त सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। 286 करोड़ की लागत से देश भर के दिव्यांग जनों के लिए आधुनिक कृत्रिम हाथ, पैर, व्हील चेयर एवं 80 प्रतिशत से ज्यादा दिव्यांग जनों के लिए बैटरी चालित मोटर साइकिल दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में इरा सिंघल ने सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर साबित किया कि दिव्यांग जन किसी से कम नहीं हैं।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री राम दास अठावले ने कहा कि दिव्यांग जनों को सहयोग और समर्थन देना हम सबकी जिम्मेवारी है। सरकार बहुत सारी योजनाओं के माध्यम से दिव्यांग जनों की बेहतरी के लिए काम कर रही है, लेकिन इस काम में स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप ‘सुगम्य भारत अभियान’ को सफल बनाने में सभी को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
राज्य की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री डॉ लुईस मरांडी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री दास के नेतृत्व में कार्यरत राज्य सरकार दिव्यांग जनों के समुचित विकास के लिये प्रतिबद्ध है और इसलिये दिव्यांग जनों को सभी प्रकार की सुविधायें एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने के लिये सिंगल विडों सिस्टम का प्रावधान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों के संक्रमण काल के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रतिबद्धता की वजह से दिव्यांग जनों को पहचान और सम्मान देने का काम हो रहा है। राज्य सरकार दिव्यांग जनों के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति करेगी। उन्होंने कहा कि दिव्यांग जनों की क्षमता पर किसी को कोई शक नहीं होना चाहिए। हमारे सामने अरुणिमा सिन्हा,सुधा चन्द्रा और आईएएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह इसके उदहारण हैं।
इस अवसर पर जागरूकता कार्यशाला में आए सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए मुख्यसचिव राजबाला वर्मा ने कहा कि झारखण्ड सरकार दिव्यांग जनों को हर जरुरी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री दास के निदेशानुसार राज्य सरकार हर स्तर पर, हर विकास व कल्याणकारी योजना में दिव्यांग जनों को सम्मान जनक भागीदारी देने का प्रयास कर रही है। राज्य में हो रहा हर निर्माण, सार्वजनिक स्थल, सरकारी कार्यालय आदि दिव्यांग जनों के लिए सुगम्य हों, इसका पूरा-पूरा ध्यान रखा जा रहा है और भविष्य में भी इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्यशाला में जो भी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है और मंत्रालय की जो भी योजनायें हैं उन्हें एक समयबद्ध रणनीति के तहत दिव्यांग जनों के लिए धरातल पर उतारा जाएगा। कार्यशाला में उपस्थित दिव्यांग जनों को संबोधित करते हुए श्रीमती वर्मा ने कहा कि आप सब से हमें जीने का हौसला मिलता है। आप सब के लिए कुछ करने की प्रेरणा भी हमें आपसे ही मिलती है।
इस अवसर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राजेश कुमार सिंह, जो स्वयं दृष्टिबाधित हैं, के द्वारा लिखित पुस्तक ‘दृष्टि नहीं दृष्टिकोण’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया गया।
इस अवसर पर सांसद रामटहल चौधरी, रांची की महापौर आशा लकड़ा, भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव विनोद अग्रवाल, संयुक्त सचिव मुकेश जैन, झारखण्ड सरकार के समाज कल्याण विभाग के सचिव मुखमीत सिंह भाटिया सहित सहित कर्इ गणमान्य लोग उपस्थित थे।
(आईपीआरडी)




