
Nagpur: कोरोना महामारी को लेकर पीएम केयर्स फंड का गठन किया गया. लेकिन इसमें दिये जानेवाले दान को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. फंड में जमा करायी गयी राशि सार्वजनिक करने की मांग भी उठी और मामला कोर्ट तक पहुंचा, जिसे बंबई हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है.
बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ नेपीएम केयर्स फंड में जमा कराई गई राशि की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश देने के लिये दायर जनहित याचिका गुरुवार को खारिज कर दी.
इसे भी पढ़ेंः चारा घोटाले के चाईबासा मामले में लालू की जमानत याचिका पर आज सुनवाई
शक है तो ना दें दान- कोर्ट
न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस संबंध में मांगी गई सभी राहत से इनकार किया जाता है. यह याचिका वकील अरविंद वाघमारे ने दायर की थी. याचिका में कहा गया कि फंड के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने का मकसद इसका बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना है.
पीठ ने कहा, ‘फंड को एक चैरिटी ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड कराने और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट कंपनी को इसका ऑडिटर नियुक्त किये जाने के मद्देनजर यह कहा जा सकता है कि यह मकसद पूरा हो चुका है. चार्टर्ड अकाउंटेंट कंपनी ऑडिटर के तौर पर फंड के संतुलन और खातों के ऑडिट के लिये बाध्य होगी.’
पीठ ने कहा कि पीएम केयर्स कोष पर लागू भारतीय न्यास अधिनियम किसी जानकारी को सार्वजनिक कराने का उद्देश्य प्राप्त करने के लिये एक प्रभावी तंत्र प्रदान करता है और याचिकाकर्ता (वाघमारे) इस तंत्र के तहत अपनी शिकायतों के निपटान के लिये स्वतंत्र हैं.
अदालत ने कहा कि कोष में दान स्वैच्छिक है, लिहाजा इसमें दान करना किसी के लिये अनिवार्य नहीं है. पीठ ने कहा, ‘अगर किसी व्यक्ति को दान किये जाने वाले अपने पैसों के इस्तेमाल को लेकर कोई संदेह है, तो उसे अधिकार है कि वह कोष में दान न दे.’
इसे भी पढ़ेंः बिहार में Corona के मामले 1.30 लाख के करीब, वायरस के 1860 नये केस
जानकारी साक्षा करने से फंड की पारदर्शिता बनी रहेगी- याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता वाघमारे ने अपनी याचिका में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पीएम केयर्स न्यास के अध्यक्ष हैं और रक्षा, गृह और वित्त मंत्री इसके सदस्य हैं. याचिका में दावा किया गया, ‘पीएम केयर्स फंड के दिशा-निर्देश के अनुसार अध्यक्ष औऱ तीन अन्य सदस्यों के अलावा अध्यक्ष को तीन और न्यासियों को नियुक्त या नोमिनेट करना है. हालांकि, 28 मार्च 2020 को इस न्यास के गठन के बाद से इस संबंध में कोई नियुक्त नहीं हुई है.’
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया था कि अदालत सरकार और इस न्यास को विपक्षी दलों के कम से कम दो सदस्यों की नियुक्ति या नामित करने का आदेश दे ताकि इस कोष की पारदर्शिता बनी रहे. याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया था कि अदालत सरकार को कोष में जमा की गई राशि और खर्चे की जानकारी सरकारी वेबसाइट पर समय-समय पर देने का आदेश दे.
पीठ ने कहा, ‘पीएम केयर्स कोष चैरिटी संस्था के रूप में पंजीकृत है, लिहाजा इसे इसके ट्रस्ट डीड के जरिये ही नियंत्रित किया जाएगा. अगर न्यास दस्तावेजों में विपक्षी दलों के सदस्यों को शामिल करने के लिये कोई प्रावधान नहीं है तो अदालत ऐसा करने के लिये निर्देश नहीं दे सकती.’
बता दें कि केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए इसे खारिज करने की मांग की थी. केंद्र ने कहा कि पीएम केयर्स न्यास को चुनौती देने वाली इस तरह की एक याचिका को उच्चतम न्यायालय खारिज कर चुका है.
इसे भी पढ़ेंः स्पैरो सॉफ्टेक को शो-कॉज, 3 दिन में जवाब नहीं देने पर टर्मिनेशन, ब्लैकलिस्टेड होगी कंपनी




