
Dhanbad: झारखंड में भाषा विवाद खत्म होने के बदले आंदोलन का शक्ल अख्तियार करने लगा है. बोकारो और धनबाद जिले की क्षेत्रीय भाषा की सूची में भोजपुरी और मगही भाषा को हटाने के खिलाफ भोजपुरी, मगही, मैथिली बोलने वाले सड़क पर उतर कर विरोध कर रहे हैं.
बुधवार को भोजपुरी, मगही, मैथिली संस्कृति बचाव मंच ने हेमंत सरकार सहित कांग्रेस नेताओं का पुतला दहन किया. पुतला दहन करने पहुंचे भोजपुरी मगही बचाओ मंच के मदन राम ने कहा कि धनबाद -बोकारो से बिना सर्वे किए ही भोजपुरी और मगही को हटा लिया गया. उन्होंने कहा कि झारखंड किसी की जागीर नहीं है, हमारा है और हमारा रहेगा. हमारे वोट से ही सरकार बनी है.
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हम अपने मान- सम्मान से खिलवाड़ नहीं होने देंगे. कहा कि धनबाद बोकारो में मगही, मैथिली, भोजपुरी बहुल भाषी क्षेत्र है. धनबाद बोकारो के शहरी क्षेत्र में इनकी संख्या काफी है.
आज इनके बोट से सरकार बनाए जाते हैं परंतु मगही भोजपुरी भाषा भाषी लोगों के मान सम्मान शिक्षा तथा रोजगार से उपेक्षित रखने का षड्यंत्र रचा जा रहा है.
मगही भोजपुरी मैथिली संस्कृति बचाओ मंच मगही भोजपुरी भाषा को पुनः धनबाद के क्षेत्रीय भाषा में बहाल करने तक निरंतर आंदोलन करते रहेगी.
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वहीं जितेंद्र पासवान ने कहा कि जिस समय मिट्टी खोदकर झारखंड को संवारने की जरूरत थी, उस समय तो अपने को स्थानीय कहने वाले लोग भाग खड़ा हुए.
जब सब कुछ ठीक-ठाक हो गया तो अब भोजपुरी मगही, मैथिली, अंगिका भाषा बोलने वालों को बाहरी बताया जा रहा है. ऐसा नहीं चलेगा और हम होने भी नहीं देंगे.
भाई को भाई से लड़ा रही है झारखण्ड सरकार
कांग्रेस नेता अभिषेक सिंह उर्फ़ नन्हें सिंह ने कहा कि 1912 में धनबाद-बोकारो कभी मानभूम का हिस्सा था और भाषा के आधार पर ही इसे उस समय बिहार में शामिल किया गया था. कौन कहता है कि धनबाद बोकारो ग्रामीण अंचलों में भोजपुरी, मैथिली, मगही नहीं बोली जाती. उन्होंने धनबाद के कई गांव का उदाहरण भी दिए.
भाजपा नेता मुकेश सिंह ने कहा कि अपनी नाकामी छुपाने के लिए सूबे की सरकार ने मूल मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए यह सब कर रही है. उन्होंने आगे कहा कि 1932 के खतियान की बात हो रही है तो ये विधायक, सांसद जब नामांकन करते हैं तो क्यों नहीं खातियान दिखाने की मांग हो रही है.
बीएमएस के जिला मंत्री धर्मजीत चौधरी ने कहा कि झारखंड सरकार जो चिंगारी फैला रही है. उससे झारखंड का ही नुकसान होगा. भाई से भाई को लड़ाने का जो काम कर रही है, उसका परिणाम तो अच्छा नहीं ही होगा.
उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन और शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए इन लोगों ने अपने फंड से भाषा आंदोलन खड़ा करवाया. वे लोग भाषा के नाम पर राजनीति का विरोध करेंगे.
पुतला दहन कार्यक्रम में मुख्य रूप से मंच के संयोजक मदन राम, मंच के प्रवक्ता जितेंद्र पासवान कार्यक्रम का नेतृत्वकर्ता अविनाश सिंह, अभिषेक सिंह उर्फ बंटी सिंह, मनन प्रसाद यादव, समरेंद्र कुमार पासवान उर्फ ओम, शशि भूषण चौबे, संदीप कुमार सिंह, गोपी सिंघम, विजय राम, अमित कुमार, विक्रम चंद्रवंशी, संजय कुमार, बंटी सिंह, विशाल सिंह, प्रकाश मिश्रा, निलेश कुमार सिंह, बासमती देवी, विदासी देवी, सोनी देवी, दीपक बासफोर, गोपी भास्कर, राजीव सिंह, राजा कुमार, कृष्णा कुमार, बबीता देवी, के सिंह मंजू देवी के अलावे सैकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित थे.
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