
New Delhi : बिहार के चर्चित मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. मामले में 20 में से 19 लोगों को दोषी पाया गया है. इसमें मामले का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर भी शामिल है. कोर्ट ने लंबी बहस के बाद 1546 पन्ने का फैसला सुनाया है.
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10 साल की अधिकतम सजा हो सकती है
कानून के जानकारों के अनुसार मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर समेत दोषियों को न्यूनतम 10 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है. दूसरी ओर राजनीतिक गलियारों से खबर है कि इस फैसले से बिहार में मुख्य विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल के साथ कांग्रेस और अन्य दल भी राज्य में सत्तासीन जनता दल युनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी को घेर सकते हैं.
आपको बता दें कि पिछली सुनवाई के दौरान साकेत कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ कुलश्रेष्ठ ने फैसले को टालते हुए 20 जनवरी की तारीख तय की थी. लेकिन केंद्रीय जांच एजेंसी मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर समेत 21 आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दिया था.
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जेल में हैं सभी आरोपी
शेल्टर होम केस मामले में मुख्य आरोपित ब्रजेश ठाकुर सहित सभी 20 आरोपी पहले से जेल में हैं. इन सभी को सोमवार को होने वाले फैसले के दिन कोर्ट में पेश किया गया. सीबीआइ ने अपनी ओर से दाखिल चार्जशीट में आरोपितों पर दुष्कर्म और बाल यौन शोषण रोकथाम अधिनियम पोक्सो की धारा-6 के तहत भी आरोप लगाये हैं.
ये है पूरा मामला
सीबीआइ की चार्जशीट के अनुसार मुजफ्फरपुर शेल्टर होम में नाबालिग बच्चियों के साथ कर्मचारी भी शोषण कर रहे थे. इसी के साथ ये भी आरोप है कि बिहार सरकार के सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारी भी बच्चियों का शोषण कर रहे थे.
34 नाबालिग बच्चियों का किया गया शोषण
यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद बच्चियों का मेडिकल टेस्ट कराया गया था. इस टेस्ट में लगभग 34 बच्चियों के यौन शोषण की पुष्टि की गयी थी. सुनवाई के दौरान पीड़ितों ने यह भी बताया कि उन्हें नशा वाली दवाएं दी जाती थी और उनके साथ मारपीट की जाती थी. फिर उनके साथ जबरन संबंध बनाये जाते थे.
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