
Palamu: जिले के पांकी प्रखंड की सुड़ी पंचायत के पुरैनी मध्य विद्यालय में सरकार का आदेश दरकिनार कर दिया गया है. विद्यालय के सचिव क्यूम अंसारी और अन्य सहयोगी शिक्षकों ने शुक्रवार जुमे के दिन स्कूल खोला तो गांव के विशेष समुदाय के लोग विद्यालय पहुंच गए और शिक्षकों से विद्यालय बंद करने के लिए नोंकझोंक करने लगे. विद्यालय के प्रधानाध्यापक क्यूम अंसारी ने जब सरकार का आदेश पत्र दिखाया तो लोग उग्र हो गए और सरकार के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि यहां सरकार का नहीं, हम लोगों का आदेश चलेगा.
शिक्षकों को धमकाया
शिक्षकों को धमकी देते हुए कहा कि यहां विद्यालय रहे या ना रहे, यदि यहां शुक्रवार जुमे के दिन स्कूल खुला तो शिक्षकों की खैर नहीं होगी. आक्रोशित लोगों ने शिक्षकों को विद्यालय से बाहर निकाल ताला लगाकर अपने पास चाभी रख ली. विद्यालय के प्रधानाध्यापक सह सचिव क्यूम अंसारी ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी संतोष कुमार सिंह और डीईओ को दूरभाष के माध्यम से दी. काफी हो हंगामा के बाद तालाबंद करने वाले लोग शुक्रवार को विद्यालय नहीं खोलने की चेतावनी देते हुए चाभी शिक्षक को सौंप दी. उसके बाद विद्यालय के प्रधानाध्यापक स्कूल खोलकर विद्यालय में दोपहर 3 बजे तक बैठे रहे. लेकिन स्कूल में एक भी बच्चा नहीं पहुंचा.
मामूल हो कि कुछ दिन पूर्व पलामू में 49 फर्जी उर्दू विद्यालय होने का खुलासा हुआ था. जिस पर जिला प्रशासन और सरकार ने कार्रवाई करते हुए सरकारी नियम के अनुसार विद्यालय शुक्रवार को खोलने और रविवार को बंद करने का आदेश जारी किया है.
सरकारी आदेश मानने को तैयार नहीं ग्रामीण
विद्यालय के प्रधानाध्यापक क्यूम अंसारी ने बताया कि सरकार के आदेश के आलोक में जब शुक्रवार जुमे के दिन विद्यालय खोले तो गांव के कुछ लोग उग्र होकर धमकी देते हुए विद्यालय से बाहर निकाल दिया और ताला बंद कर दिया. साथ ही चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अलगे शुक्रवार जुमे के दिन विद्यालय खोले तो शिक्षकों को बुरा परिणाम भुगतना होगा. विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने बताया कि काफी प्रयास के बाद लोग उन्हें चाबी दी, उसके बाद विद्यालय खोले हैं.
इधर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी संतोष कुमार सिंह से मामले की जानकारी लेने के लिए जब उसके पास फोन लगाए तो उन्होंने बताया कि अभी वे कार्यशाला में हैं. बाद में बात करते हैं. इस संबंध में जब डीईओ उपेंद्र नारायण से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. कई बार उनके मोबाइल पर रिंग जाते रहा, लेकिन वे फोन नहीं उठाए.




