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विपक्षी नेता राष्ट्रपति से मिले, कृषि कानूनों पर बात नहीं बनी, 14 को किसानों का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन

विपक्षी दलों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के महासचिव डी राजा, और डीएमके नेता टीकेएस इलंगोवान शामिल थे

NewDelhi :  किसान नेताओं ने नये कृषि कानूनों में संशोधन करने के सरकार के प्रस्ताव को बुधवार को खारिज कर दिया और कहा कि वे शनिवार को जयपुर-दिल्ली और दिल्ली-आगरा एक्सप्रेस-वे को बंद करेंगे तथा आंदोलन को तेज करते हुए 14 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेंगे.

सरकार और किसान संगठनों के नेताओं के बीच बुधवार को होने वाली छठे दौर की बातचीत को रद्द कर दिया गया था, लेकिन दोनों पक्षों ने कहा है कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं.

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सरकार का प्रस्ताव देश के किसानों का अपमान

किसान नेता शिव कुमार कक्का ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार के प्रस्ताव में कुछ भी नया नहीं है और ‘संयुक्त किसान समिति’ ने बुधवार को अपनी बैठक में इसे “पूरी तरह खारिज” कर दिया.

किसान संगठनों के नेताओं ने प्रस्ताव को देश के किसानों का “अपमान” करार दिया. हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार अगर वार्ता के लिए नया प्रस्ताव भेजती है तो वे उस पर विचार कर सकते हैं.

पांच विपक्षी नेता राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिले

इस बीच, बुधवार को राहुल गांधी, शरद पवार समेत पांच विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की. विपक्षी नेताओं ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने का अनुरोध किया.

विपक्षी दलों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा के महासचिव डी राजा, और डीएमके नेता टीकेएस इलंगोवान शामिल थे.

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कृषि कानून निरस्त किये जाने चाहिए : राहुल गांधी

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने संवाददाताओं से कहा, हमने राष्ट्रपति से मुलाकात की और उन्हें तीन कृषि कानूनों के संबंध में हमारे विचारों से अवगत कराया. हमने इन्हें निरस्त किए जाने का अनुरोध किया. हमने राष्ट्रपति को बताया कि इन कानूनों को वापस लिया जाना बेहद महत्वपूर्ण है.

राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों ने राष्ट्रपति से अुनरोध किया कि ये कृषि कानून निरस्त किये जाने चाहिए क्योंकि इन पर ना ही संसद की प्रवर समिति में चर्चा की गयी और ना ही अन्य पक्षकारों के साथ विचार-विमर्श किया गया.

14 दिसंबर को दिल्ली चलो आह्वान

येचुरी ने कहा, हमने राष्ट्रपति को बताया कि तीन कृषि कानून अलोकतांत्रिक तरीके से संसद में पारित किए गए और कानूनों को वापस लिए जाने का अनुरोध किया. किसान संगठनों के नेताओं मुताबिक उत्तर भारत के सभी किसानों के लिये 14 दिसंबर को ‘दिल्ली चलो’ का आह्वान किया गया है, जबकि दक्षिण भारत में रहने वाले किसानों से जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन के लिये कहा गया है.

नये कृषि कानूनों पर केंद्रीय गृह मंत्री के, किसानों के 13 प्रतिनिधियों से मुलाकात करने के एक दिन बाद बुधवार को केंद्र की तरफ से किसानों को प्रस्ताव भेजा गया था.  प्रस्ताव में सरकार ने कहा था कि वह वर्तमान में लागू न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था को जारी रखने के लिए ‘‘लिखित में आश्वासन’’ देने को तैयार है.

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अडानी-अंबानी के पेट्रोल पंप का बहिष्कार करेंगे

किसान नेता जंगवीर सिंह ने कहा, हम अडानी और अंबानी के स्वामित्व वाले प्रतिष्ठानों व सेवाओं का बहिष्कार करेंगे. किसानों ने ये भी ऐलान किया है कि अब वे जियो सिम से लेकर रिलायंस के सभी सामानों का बहिष्कार करेंगे. इतना ही नहीं वे अडानी-अंबानी के पेट्रोल पंप का भी बहिष्कार करेगे. हम वहां से पेट्रोल नहीं खरीदेंगे.

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