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क्या ऐसे ही पढ़ेंगे बच्चे ? मात्र 65 शिक्षकों के भरोसे 31,569 छात्र

प्रति शिक्षक 485 छात्र 

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Ranchi : राज्य में 38 पाॅलिटेक्निक काॅलेज है, जिसमें 17 सरकारी हैं. जहां पढ़ने राज्य भर से छात्र आते हैं. राज्य के पूरे पाॅलिटेक्निक काॅलेजों में 31569 छात्र पढ़ाई करते हैं. राज्य के पाॅलिटेक्निक काॅलेजों में नामांकन कराने के लिए प्रतियोगी परीक्षा भी आयोजित की जाती है, पास छात्रों का काउंसलिंग कर नामांकन लिया जाता है. पर नामांकन कराते ही छात्रों के सपने पूरे होने की उम्मीद भी धूंधली होने लगती है. क्योंकि राज्य भर के पाॅलिटेक्निक काॅलेजों में स्थायी शिक्षक के नाम पर मात्र 65 शिक्षक ही हैं. प्रति छात्र शिक्षक का अनुपात 485 है. ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि राज्य के डिप्लोमा काॅलेजों में पढ़ रहे बच्चों का भविष्य क्या है. सरकार शिक्षा को लेकर कितनी गभीर है. भविष्य निर्माण करने वाले शिक्षक ही नदारद है.

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पीटीएल शिक्षकों के भरोसे होती है पढ़ाई

राज्य में पाॅलिटेक्निक काॅलेजों की पढ़ाई पार्ट टाइम लेक्चरर पीटीएल शिक्षकों के भरोसे होती है. पाॅलिटेक्निक काॅलेज खुद से नोटिफिकेशन निकाल कर पीटीएल शिक्षकों की बहाली करती है. उन्हें प्रति क्लास के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं. इनकी नियुक्ति प्रति वर्ष होती है. बीटेक एमटेक कर चुके छात्र पाॅलिटेक्निक कर रहे छात्रों को पढ़ाते हैं पर, अधिकतर मामलों में पीटीएल शिक्षक बीच में ही छोड़कर चले जाते हैं और छात्रों की पढ़ाई बाधित हो जाती है. ऐसे हालात में छात्रों को बिना कोर्स कंपलीट हुए ही सेमेस्टर परीक्षा देने को मजबूर हो जाते हैं.

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अयोग्य शिक्षक बने हैं प्राईवेट काॅलेजों के प्रिंसिपल

राज्य में शिक्षकों की भारी कमी है. शिक्षकों के नियुक्ति के दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है. राज्य में कई ऐसे प्राईवेट और पीपीपी मोड में चलने वाले पाॅलिटेक्निक संस्थान हैं जहां अयोग्य शिक्षक प्रिंसिपल बन काॅलेज चला रहे हैं और प्रशासन को पता होने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया जाता. नियमतः डिप्लोमा काॅलेजों में प्रिंसिपल बनने के लिए बीटेक एमटेक और शिक्षण के क्षेत्र में प्रयाप्त अनुभव की आवश्यकता होती है. पर सिर्फ मैथेमेटिक्स के डिग्री के साथ सिल्ली पाॅलिटेक्निक काॅलेज में डाॅ. बंधोपाध्याय को प्रिंसिपल बना दिया गया है.

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