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अवमानना मामले में अनिल अंबानी दोषी, SC ने कहा- एक महीने में चुकाओ 453 करोड़, नहीं तो तीन महीने की जेल

New Delhi: अनिल अंबानी की मुसीबत बढ़ती नजर आ रही है. राफेल विमान सौदे को लेकर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल उनपर पहले से आरोप लगा रहे हैं. अब एक मामले में सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है, उसपर गौर करें तो अनिल अंबानी को जेल की हवा खानी पड़ सकती है. दरअसल, उच्चतम न्यायालय ने रिलायंस कम्‍युनिकेशंस के अध्यक्ष अनिल अंबानी और अन्य को एरिक्सन को जानबूझ कर 550 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करने पर अदालत की अवमानना का दोषी पाया. अवमानना से बचने के लिए कोर्ट ने एक महीने में 453 करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा है. और ऐसा नहीं करने पर तीन महीने की जेल की सजा उन्हें भुगतनी पड़ सकती है.

कोर्ट ने अपनी सुनवाई में कहा कि रिलायंस समूह के शीर्ष नेतृत्व की ओर से दिए गए आश्वासनों से यह प्रतीत होता है कि आदेश के बावजूद उन्होंने जानबूझ कर एरिक्सन को राशि का भुगतान नहीं किया. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि रिलायंस की बिना शर्त माफी को खारिज किए जाने की जरूरत है क्योंकि उन्होंने आश्वासन और आदेश का उल्लंघन किया है.

एक महीने में चुकायें 453 करोड़

रिलायंस कम्युनिकेशन के अध्यक्ष और दो डायरेक्टर को अवमानना से बचने के लिए एरिक्सन को चार सप्ताह में 453 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर रिलायंस समूह चार सप्ताह में भुगतान नहीं करता है तो उन्हें तीन महीने जेल की सजा भुगतनी पड़ेगी. इसके साथ ही कोर्ट ने रिलायंस टेलीकॉम और रिलायंस इंफ्राटेल दोनों को चार सप्ताह में सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री में एक-एक करोड़ रुपये जमा करने को कहा. उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया कि रिलायंस ग्रुप की ओर से न्यायालय की रजिस्ट्री में पहले से जमा कराए गये 118 करोड़ रुपये एरिक्सन को दिए जाएं. गौरतलब है कि रिलायंस ग्रुप के अध्यक्ष अनिल अंबानी और अन्य के खिलाफ बकाया भुगतान नहीं करने पर टेलिकॉम उपकरण निर्माता एरिक्सन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

इधर अनिल अंबानी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा, ‘हम उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं. मुझे भरोसा है कि आरकॉम आदेशों का आदर करेगा.’

एरिक्सन का क्या था आरोप

सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए एरिक्सन इंडिया ने आरोप लगाया था कि रिलायंस ग्रुप के पास राफेल विमान डील में निवेश के लिए रकम है. लेकिन वे उसके 550 करोड़ के बकाये का भुगतान करने में असमर्थ है. हालांकि अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी ने इस आरोप से इनकार किया था. इस पूरे मामले को लेकर कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन और विनीत सरन की पीठ कर रही है. ज्ञात हो कि यह अवमानना याचिका अनिल अंबानी के अलावा रिलायंस टेलीकॉम के अध्यक्ष सतीश सेठ, रिलायंस इंफ्राटेल की अध्यक्ष छाया विरानी और एसबीआई अध्यक्ष के खिलाफ दायर की गई थी.

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