
- 2020 तक 2018 की फंडिंग का मात्र 42.63 प्रतिशत खर्च किया गया
- ग्रामीण स्तर तक चलाये जाने थे कार्यक्रम
Ranchi: ग्रामीण महिलाओं और बच्चों को ध्यान में रखते हुए पोषण अभियान 2018 में शुरू किया गया जो केंद्र सरकार की योजना है. साल 2018 में केंद्र सरकार ने 75 करोड़ 40 लाख राज्य सरकार को दिया. इसमें मात्र 20 करोड़ 65 लाख रुपये ही राज्य सरकार ने खर्च किये जो फंड का 27.39 प्रतिशत है.
साल 2019-20 के लिए केंद्र सरकार ने फंड जारी नहीं किया. साल 2018-19 के फंड से ही इस योजना को चलाया गया. तब भी राज्य सरकार ने मार्च 2020 तक मात्र 32 करोड़ 14 लाख ही खर्च किये. जो मात्र 42.63 प्रतिशत है. ऐसे में 57 प्रतिशत राशि फंड में पड़ा है. कोरोना लॉकडाउन के बाद से इस अभियान में काम नहीं किया गया.
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2.41 प्रतिशत आंगनबाड़ी बहनों ने ली ट्रेनिंग
नीति आयोग की जारी हालिया रिपोर्ट में इन बातों का जिक्र है. पोषण अभियान के तहत आंगनबाड़ी बहनों, सहियाओं के साथ अलग-अलग कार्यक्रम चलाये जाने थे. इन कार्यक्रम में लोगों को विशेषकर महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता समेत अन्य जानकारी और जागरूक किया जाता. जिला स्वास्थ्य कर्मियों और पदाधिकारियों की ओर से आंगनबाड़ी बहनों और सहियाओं को भी जागरूक ट्रेनिंग दी जाती.
रिपोर्ट की मानें तो मात्र 2.41 प्रतिशत आंगनबाड़ी बहनों को अभियान के तहत ट्रेनिंग दी गयी. जबकि राज्य में लगभग 38 हजार आंगनबाड़ी बहनें हैं. ऐसे में लगभग 800 आंगनबाड़ी बहनों ने ट्रेनिंग ली.
रिपोर्ट के मुताबिक 44 प्रतिशत आंगनबाड़ी बहनें ग्रामीण परिवारों से घर में नहीं मिलती. जबकि आंगनबाड़ी बहनों को परिवारों को जागरूक करना, गर्भवती महिलाओं को जानकारी के साथ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती है. मात्र 55.39 प्रतिशत बहनें ही घर-घर जाकर लोगों से मिलती है.
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गर्भवती महिलाओं को नहीं मिलता लाभ
केंद्र सरकार की ओर से गर्भवती महिलाओं के लिए जननी सुरक्षा योजना और मातृत्व बंदना योजना चलायी जा रही है. जिसके तहत अलग-अलग समय में महिलाओं को राशि दी जाती है. नीति आयोग की रिपोर्ट की मानें तो 71 प्रतिशत महिलाओं को जननी सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है.
मात्र 29 प्रतिशत महिलाओं को ही इस योजना का लाभ मिला है. यह योजना गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं के लिए है. जिन्हें एक हजार रूपये दिया जाता है. वहीं मातृत्व योजना के तहत महिलाओं को तीन किस्त में पैसे दिये जाते हैं जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को तीन किस्त में छह हजार और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को पांच हजार दिया जाता है.
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