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रिम्‍स में लावारिस मरीजों की पीड़ा समझने वाला कोई नहीं

374 करोड़ के बजट वाले रिम्स में नहीं है कोई व्यवस्था, हर मौसम में फर्श पर ही पड़े रहते है लावारिस मरीज

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Ranchi : रिम्स का सालाना बजट 374 करोड़, लेकिन रिम्स में लावारिस मरीजों के लिए कोई ठौर-ठिकाना नहीं. लावारिस मरीज हॉस्पिटल में ही इधर-उधर भटकते रहते हैं. कभी उन्हें हॉस्पिटल से बाहर निकाल दिया जाता है, तो कभी रिनपास भेज दिया जाता है. लेकिन फिर भी रिम्स में लावारिस मरीजों की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है, रिम्स के फर्श पर ही पडे़ रहते हैं. सर्दी, गर्मी  और बरसात हर मौसम ऐसे ही गुजर जाते हैं, लेकिन इनकी पीड़ा समझने वाला कोई नहीं. वर्तमान में भी दर्जनों लावारिस मरीज रिम्स में इधर-उधर भटक रहे हैं.

ठीक होने के बाद फिर सड़क पर आ जाते हैं

रिम्स के आर्थों वार्ड में ऐसे मरीज ज्यादा मिल जायेंगे. इसके अलावा मेडिसीन विभाग और अन्य वार्ड में भी लेटे और बैठ देखें जा सकते है. लेकिन न तो रिम्स प्रबंधन सजग है, न ही स्वास्थ्य विभाग ने ही कोई कोई ठोस पहल कर रहा है. सामाजिक संगठन लावारिस मरीजों को सड़क से उठा कर इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती करा देते हैं, लेकिन फिर उनके आसियाने की कोई व्यवस्था नहीं की जाती. कुछ तो ठीक होने के बाद फिर सड़क पर आ जाते हैं, कुछ कहीं और चले जाते है. वहीं कुछ हॉस्पिटल को ही अपना रैन बसेरा बना लेते हैं.

पविवार वाले भी छोड़कर चले जाते हैं,  इंतजार में रहते हैं  

मरीज

रिम्स में कई लावारिस मरीज ऐसे भी हैं, जिन्हें उनके परिवार वालों ने अपने साथ ले जाना मुनासिफ नहीं समझा. अपने परिवार के आने की आस में मरीज हॉस्पिटल में ही पड़े रहते हैं. रिम्स प्रबंधन द्वारा कभी-कभी इन लावारिसों को घर भेजने के लिए प्रयास किया जाता है, लेकिन पता गलत मिलने के कारण नहीं भेज पाते. लावारिस मरीजों में कुछ ऐसे भी हैं, जो इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, लेकिन वे अपने घर जाने में असमर्थ हैं.

मरीजों को खाने-रहने की मिल जाती है सुविधा

रिम्स के लावारिस मरीज इसलिए भी जाना नहीं चाहते, क्योंकि उन्हें यहां रहना-खाना सब मुफ्त में मिल जाता है. रिम्स में किचन संभालने वाली कंपनी प्राइम सर्विस के द्वारा लावारिस मरीजों को खाना उपलब्ध करा दिया जाता है. जबकि भर्ती मरीजों को ही रिम्स किचन खाना उपलब्ध कराना है. लेकिन वह लोग उन सारे लवारिसों को खाना उपलब्ध कराते हैं.

डालसा के पास भी नहीं है कोई व्‍यवस्था

सामाजिक संस्था डालसा की पैनल एडवोकेट अनिता कुमारी ने बताया कि लावारिसों के इलाज के बाद परेशानी खड़ी हो जाता है. इन लोगों के पास अपना घर नहीं होता है. परिवार के सदस्य इन्हें लेने नहीं आते और ये लोग भी अपने घर वापस जाना नहीं चाहते. अनिता ने बताया कि लावारिस मरीजों के लिए प्रबंधन के पास कोई व्यवस्था नहीं है और न ही डालसा ही इसमें कोई मदद कर सकता है.

कल्याण विभाग को आगे आना चाहिए : सुपरीटेंडेंट

रिम्स सुपरीटेंडेंट डॉ विवेक कश्यप ने बताया कि लावारिस मरीजों का इलाज रिम्स में किया जाता है. लेकिन उन्हें यहां रखने का कोई प्रावधान नहीं है. रिम्स में ऐसे कई लावारिस मरीज हैं, जो पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं. फिर भी वे रिम्स से बाहर नहीं जाना चाहते. इंसानियत के नाते हम उन्हें रिम्स से बाहर भी नहीं निकाल सकते. इन लोगों के लिए कल्याण विभाग और अन्य सामाजिक संगठनों को आगे आकर इनकी मदद करनी चाहिए. ऐसे लोगों के लिए आश्रयगृह का निर्माण करा देना चाहिए.

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