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ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना का बढ़ा खतरा, आंगनबाड़ी सेंटरों में अब तक मेडिकल किट नहीं पहुंचने से बढ़ी चिंता

 

 

Ranchi : राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा है. लोग जागरुकता के अभाव में इसे मौसमी बीमारी या सामान्य समस्या ही समझ रहे. पर इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ रहा है. कोडरमा, रामगढ़, पलामू, चतरा जैसे जिलों में 150 से अधिक मजदूरों के जान गंवाने की खबर भी सामने आ चुकी है. इसे लेकर सरकार ने चिंता जतायी है. आंगनबाड़ी सेंटरों और कस्बाई स्वास्थ्य केंद्रों का रोल बढ़ाने की मुहिम शुरू की है. सीएम हेमंत सोरेन के साथ सोमवार को ऑनलाईन कॉन्फ्रेंसिंग में कैबिनेट मंत्रियों ने चिंता जताते हुए कहा कि सरकारी प्रावधानों के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों में मेडिकल किट अब तक नहीं पहुंचायी जा सकी है. इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों में मैनपावर की भी समस्या आड़े आ रही है. सीएम ने इस पर समुचिक कदम उठाने की बात कही है.

एक सप्ताह तक बढ़े लॉकडाउन

ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम ने सीएम से कहा कि दूसरी लहर से निपटने में कड़ाई से लागू किया गया स्वास्थ्य सुरक्षा सप्ताह ने अहम रोल निभाया है. पर अभी के खतरे को देखते हुए फिलहाल एक और सप्ताह के लिये लॉकडाउन बढाना उपयोगी होगा. एक पंचायत में 8-10 आंगनबाड़ी सेंटर होते हैं. पर अधिकांश में अब तक मेडिकल किट, ऑक्सीमीटर नहीं पहुंच सका है. इस ओऱ ध्यान देना होगा. ई पास को इंटर स्टेट भर कर दिया जाये. इसमें अभी कई स्तर पर गड़बड़ी है. पोर्टल में कोई भी ऐसे ही पास बना ले रहा. एक घर में चार चार पास हैं. ग्रामीण क्षेत्र में पास बनाना व्यावहारिकता नहीं है.

मंत्री रामेश्वर उरांनव ने कहा कि पूर्व की सरकार में शहरों को देखा गया. गांवों की उपेक्षा होती रही. पर वर्तमान सरकार ने गांवों में सुविधाएं बढ़ाने की पहल की है. लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा जैसे जिलों में इसे देखा जा सकता है. पहले इन जिलों के ग्रामीणों को रांची के अस्पतालों में आकर लाइन लगाना पड़ता था. अब इसे दूर किया जा रहा. शहर और गांवों में कपड़े, चप्पल की दुकानें बंद रहने से दिक्कत हो रही. सरकार चाहे तो कुछ दुकानों या जगह को नोटिफाइ कर दे कि यहां से ऐसे सामान मिल सकेंगे. गांवों में शादी में 200-300 लोग दिखते हैं. सरकारी नियमों (11 लोग) का पालन नहीं हो रहा. इसे रोकना होगा. ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का मौका कम हो गया है. बाहर से आने वाले लेबर बीमारी फैला रहे हैं. रुरल इलाके के अस्पतालों को बेहतर करने की जरूरत है. वैक्सीनेशन पर भ्रम फैलने के कारण जागरूकता की कमी है. पीडीएस डीलर, टीचर के जरिये लोगों को मोटिवेट करना होगा. टारगेट ग्रुप बनाना होगा. पोस्ट कोविड के बाद थकान, कमजोरी की समस्या आती है. इसके लिये फिजियोथेरेपी की सेवा देनी होगी.

ऑक्सीजन प्लांट नहीं हुआ चालू

मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने कहा कि गांवों में सर्दी खांसी की समस्या दिखी है पर संक्रमितों की संख्या अब घटने लगी है. अफरातफरी कम हुआ है. लॉकडाउन को बढ़ाया जाना चाहिये. चतरा में महिला चिकित्सक, डॉक्टरों की कमी है. ऑक्सीजन प्लांट लगने में विलंब हो रहा है. अंबुलेंस की संख्या बढ़ायी जाये. टीका लेने के बाद कुछ लोगों के मरने के कारण लोगों में भय है. पर लोगों को जागरुक किया जा रहा है.
मंत्री चंपई सोरेन के मुताबिक आदित्यपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र में भी अभी कोरोना कम है. ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना को लेकर जागरुकता की कमी है. इसके लिये दवाओं, मास्क, वैक्सीनेशन के लिये जागरुकता बढ़ाने की जरूरत है. ग्रामीण क्षेत्र में अंधविश्वास है. ग्राम प्रधान, जनप्रतिनिधि के माध्यम से लोगों को समझाना होगा. लॉकडाउन उपयोगी साबित हुआ है. एक सप्ताह के लिये इसे बढ़ाया जा सकता है.

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन समस्या

मंत्री जोबा मांझी ने कहा कि गांवों में जागरूकता पर काम किया जा रहा. सेविका इतनी ट्रेंड नहीं कि वह जांच और वैक्सीनेशन भी कर सके. उन्हें केवल सर्वे और अन्य कामों तक ही सीमित करना होगा. जिला स्तर के पदाधिकारियों की संख्या कम है. एडीसी, डीआरडीए डायरेक्टर पोस्ट खाली हैं. जिले में 16 सीओ के विरूद्ध 13 खाली हैं. बीडीओ के भी पद खाली हैं. इससे दिक्कत आ रही. वैक्सीन के लिये ग्रामीण ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन नहीं कर पा रहे. ऑफलाइन व्यवस्था करनी होगी. इंटरनेट की सुविधा गांवों में नहीं है.

ब्लैक फंगस अब महामारी

मंत्री बन्ना गुप्ता के अनुसार ई-पास में जटिलता है. प्रेस, विभिन्न कंपनियों, सरकारी नुमाइंदों को उनके आई कार्ड के आधार पर ई-पास की मान्यता मिले. राज्य में अब ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करनी होगी. बिहार अन्य राज्यों ने ऐसा किया है. वैक्सीनेशन का लाभ शहरी क्षेत्र में ज्यादा है. गांवों में अब भी दिक्कत है. बन्ना ने केंद्र सरकार को घेरते कहा कि जब राज्य सरकार ने अपना पैसा लगाकर वैक्सीन खरीदा है तो इस पर सीएम की फोटो क्यों नहीं होनी चाहिये. यह चुनी हुई सरकार पर कुठाराघात है. खर्चा हमारा, नाम उनका क्यों हो. गांव में 76 फीसदी आबादी है रहती है. वैक्सीन के लिये ओटीपी जेनरेट करना और दूसरी समस्याएं सामने आती हैं. लोगों को विकल्प देना होगा. सेंटर बढ़ाना होगा. सरल, सर्वसामान्य व्यवस्था लोगों के लिये बनानी होगी. केंद्र से बात हो. लॉकडाउन को और कुछ दिन चलाया जायेगा. पीएचसी सीएचसी को अपग्रेड करने के अलावा मैनपावर की कमी को दूर करने (एएनएम, पारा मेडिकल अन्य) पर जोर देना होगा.

कृषि मंत्री बादल ने कहा कि कोविड को देखते विभाग ने अपने स्तर से तैयारी शुरू कर दी है. अभी 4288 क्विंटल धान के बीज की व्यवस्था हुई है. 12 मई से बांटना शुरू कर दिया गया है. तरबूज, टमाटर के किसानों के हित में व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा. अभी इसे लेने वाला कोई नहीं. समुचित इंफ्रास्ट्रक्चर रहने पर जूस, टोमैटो कैचअप जैसी सुविधा किसानों को मिल सकेगी. 9 लाख 60 हजार किसानों को लोन माफ कर देने में विभाग लगा है. अभी लॉकडाउन के कारण बाधा भी आयी है. बैंक किसानों को लोन दे तो खेती में मदद होगी. एफसीआई में 3 जिले से धान की खरीद टारगेट से 31 प्रतिशत कम खरीद हुई है. राज्य सरकार ने केंद्र को लेटर लिखा है कि डेट बढ़ाये. 3 जिलों में अब भी धान रखा है. आगामी दिनों में मूसलाधार बारिश होने पर दिक्कत होगी. खाद बीज के काम में लगे लोगों को कृषि के कामों में लगाया जाये, कोविड ड्यूटी से हटायें.

 

सदर अस्पतालों में बच्चों के लिये विशेष बेड

मिथिलेश कुमार ठाकुर ने कहा कि दूसरी लहर में अब राहत है. रेलवे स्टेशनों पर कड़ाई से जांच हो. जांच के बाद ही लोग निकलें. गांवों में जागरूकता अभियान चलाया जाये. 25 मई से शुरू हो रहे टेस्टिंग और ट्रीटमेंट अभियान से लाभ मिलेगा. एक सप्ताह के लिये लॉकडाउन बढ़ायें. निर्माण से संबंधित (पथ, भवन निर्माण) कार्यालयों को एक निश्चित अवधि के लिये खोलें. सभी अस्पतालों में चाइल्ड वार्ड बने. सीएचसी वगैरह में 4-5 बेड रखा जाये. बच्चों के अनुरूप वार्ड बने. दीवारों पर रंगीन और सुंदर पेंटिंग भी हो. सभी सदर अस्पतालों में 50 बेड की व्यवस्था बच्चों के हिसाब से बने. एफसीआई ने तानाशाही रवैया अपनाया है. धान क्रय केंद्रों पर पड़ा है. सरकार की छवि धूमिल हो रही. किसान का धान उठाया जाये. जो एसओआर प्रकाशित हुए हैं, उससे संवेदक काम करने को सामने नहीं आयेंगे. 2018 से भी कम रेट है. 40 प्रतिशत तक रेट कम हो गया है. विशेषज्ञों से नये तरीके पर बात कर फिर से एसओआर प्रकाशित हो.

हफीजुल हसन के मुताबिक 16 मार्च को आचार संहिता लगा. इससे विकास कार्य रुक गया है. कुआं खुदाई का पेमेंट मजदूरों को नहीं मिल रहा. मधुपुर गरीब क्षेत्र है, बड़ी संख्या में लोग बाहर जाकर काम करते हैं. पर अभी घरों में आकर बैठे हुए हैं. उनके लिये रोजगार कार्यक्रम चलाया जाये. मुस्लिम बहुल क्षेत्र में प्रचार, जागरुकता की कमी है. ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना से डर नहीं है. कोरोना पॉजिटिव होने पर और अस्पताल का चक्कर लगने पर 2-3 लाख से अधिक खर्च होने पर आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है. ऐसे में लोगों की मदद को विधायक फंड के प्रयोग की अनुमति मिले. हजारीबाग में ऑक्सीजन सिलेंडर चोरी हुआ. एक विशेष समुदाय को टारगेट किया जा रहा है. सरकार इस पर ध्यान दें. डेढ़ साल से गांवों में रोड पुलिया का काम फंसा है. कोरोना प्रोटोकॉल से काम चालू किया जाये. टेंडर जारी हो.

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