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न्यूटन ट्यूटोरियल का खेल ! फॉरेस्ट्री से ग्रेजुएट टीचर पढ़ा रहे केमेस्ट्री

संचालक पंकज सिंह फॉरेस्ट्री से हैं ग्रेजुएट, बच्चों को पढ़ा रहे केमेस्ट्री 

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Ranchi: रांची में कोचिंग संस्थानों की भरमार है. शहर के इन कोचिंग सेंटरों में धड़ल्ले से धोखाधड़ी का खेल भी जारी है. अपने को बेहतर साबित करने के लिए ये कोचिंग सेंटर दावे तो बड़े-बड़े करते हैं, लेकिन हकीकत में जानकारी छिपाकर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया जाता है. कुछ ऐसा ही मामला देखने को मिला है न्यूटन ट्यूटोरियल में. जहां संचालक ने खुद फॉरेस्ट्री की पढ़ाई की है, लेकिन छात्रों को केमेस्ट्री का पाठ पढ़ा रहे हैं.

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न्यूटन ट्यूटोरियल का खेल !

रांची शहर में न्यूटन ट्यूटोरियल ने तो शिक्षा जगत की सारी बाधांए ही तोड़ दी है. हरिओम टावर स्थित न्यूटन ट्यूटोरियल के संचालक पंकज सिंह फॉरेस्ट्री से स्नातक हैं और बच्चों को केमेस्ट्री पढ़ा रहे हैं.  बड़ा सवाल ये है कि ऐसे में शिक्षक बच्चों को किस स्तर का ज्ञान देते होगें. आमतौर पर छात्र जब स्कूलों में 12वीं की पढ़ाई करते हैं तो उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षक पीजी स्तर के होते हैं तथा जेटेट एवं सीटेट जैसी परीक्षा पास होते हैं. न्यूटन के पंकज सिंह की बात करें तो उनके शैक्षिणक स्तर को देखने से लगता है कि बच्चों को क्या ज्ञान दे रहें होगें. न्यूज विंग ने न्यूटन ट्यूटोरियल के पंकज सिंह से इस विषय पर बात कि तो उन्होंने कहा कि वे अभी रांची शहर में नहीं आने के बाद इस विषय पर बात करेंगे.

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क्या कहते हैं शिक्षाविद्

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श्यामा प्रसाद विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ अशोक नाग का कहना है कि शिक्षा का बाजारीकरण इतनी तेजी से किया जा रहा है कि इसको धंधा बनाने वाले लोग बिना मापदंड के अपने अनुरूप इसमें बदलाव कर रहे हैं, जो बच्चों के लिए घातक है. फॉरेस्ट्री से स्नातक किये शिक्षक छात्र को कैसे केमेस्ट्री पढ़ा सकते हैं ये गलत है.

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वही बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व डीन फॉरिस्ट्री विभाग डॉ प्रशांत का कहना है कि हमारे विभाग से पीजी किया हुआ छात्र केमेस्ट्री नहीं पढ़ा सकता है जानकारी उसको हो सकती है, लेकिन उस विषय का वह शिक्षक नहीं बन सकता है.  न्यूटन के शिक्षक किस रूप में स्नातक पास कर बच्चों केमेस्ट्री पढ़ा रहे हैं यह एक चिंतनीय विषय है.

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