
Siliguri. सिलीगुड़ी में अवैध तरीके से सेल्फ ड्राइविंग बाइक और कार भाड़े पर देने वालों का एक पूरा गिरोह सक्रिय है. सड़क पर गाड़ी खड़ी कर प्रति महीने औसतन 10 लाख रुपये का कारोबार इस गिरोह के लोग कर रहे हैं. अवैध तरीके से बाइक और कार किराए पर देने वाले इस गिरोह ने गाड़ी भाड़े पर देने वाली कई ऑनलाइन कंपनियों के व्यापार को गहरा आघात पहुंचाया है.
वहीं, दूसरी ओर इस गिरोह के तार वाहन तस्कर गिरोह के साथ भी जुड़े होने की संभावना जताई जा रही है. प्रशासन की आंख मे धूल झोंककर चोरी व बिना कागजात के वाहनों को भी सड़क पर दौड़ा कर जेब भरा जा रहा है. कर्सियांग की पहाड़ियों मे कार समेत गिरने से सिलीगुड़ी के पांच नवयुवकों की मौत के बाद अवैध रूप से बाइक और कार किराए पर देने वाले गिरोह की पोल खुल रही है.
शहर में कहां से संचालन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अवैध रुप से बाइक और कार भाड़ा पर देने का अवैध धंधा बड़े पैमाने पर सिलीगुड़ी के एसएफ रोड और हाकिमपाड़ा इलाके मे किया जाता है. इसके आलवे शहर और आस-पास स्थित मोटर गैराज से भी इस धंधे का संचालन किया जाता है. एसएफ रोड या हाकिमपाड़ा में अवैध रुप से गाड़ी किराए पर देने वाले इस गिरोह का कोई कार्यालय नहीं है. बल्कि गड़ियां सड़क किनारे पार्किंग में खड़ी रहती है. गिरोह के सदस्य उसके आस-पास ही होते हैं.
बस रुपया दो और गाड़ी आपकी
गिरोह का जाल पूरे शहर और आस-पास के इलाके में फैला हुआ है, जो बिना कागजात के गाड़ी किराए पर लेने वाले ग्राहकों की तलाश मे होते हैं. फोन नंबर और पता देकर ग्राहक को गाड़ियां भेज दी जाती है. रुपया देने पर गाड़ी हवाले कर दिया जाता है.
चोरी की गाड़ियां आ रही हैं सिलीगुड़ी
सूत्रों की माने तो इस गिरोह के तार वाहन तस्कर गिरोह के साथ जुड़ा हुआ है. बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और मुंबई से चोरी की हुई और मियाद समाप्त हुई गाड़ियों को सिलीगुड़ी लाया जाता है. यहां चेचिस नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट के साथ बड़ी ही चालाकी से उलट-फेर किया जाता है. फिर प्रशासन की आंखों मे धूल झोंककर गाड़ियों को सड़कों पर दौड़ाया जाता है.
नियमों की पूरी तरह से अनदेखी
नियमानुसार वाहन किराए पर देने के पहले ग्राहक का आवासीय प्रमाण पत्र और ड्राइविंग लाइसेंस की एक-एक प्रति जमा रखना नितात आवश्यक है. लेकिन इस गिरोह को नियम-कानून की कोई परवाह नहीं है. सिर्फ रुपया मिलने से मतलब है. बाइक और कार के मॉडल के अनुसार किराए की रकम तय होती है. बाइक के लिए कम से कम पांच सौ और कार के लिए कम से कम दो हजार रुपये प्रति दिन के हिसाब से किराया लिया जाता है. इस गिरोह का संचालन सिलीगुड़ी के कुछ राजनीतिक आकाओं के सानिध्य मे शहर के कुछ युवक कर रहे हैं. इस गिरोह से जुड़े दिल्ली और हरियाणा के सदस्य भी सिलीगुड़ी मे डेरा जमाये हुए हैं. लेकिन इसकी भनक तक प्रशासन और सिलीगुड़ी नगर निगम को नहीं है.
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एआरटीओ नवीन अधिकारी का कहना है कि सेल्फ ड्राइविंग के लिए अवैध रुप से गाड़ी भाड़े पर देने कि जानकारी उन्हें नहीं है. लिखित शिकायत मिलने पर जाच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कि जाएगी.




