
Ranchi: राज्य के 6 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की सुविधा दिलाए जाने को नीर निर्मल प्रोजेक्ट 2014-15 से शुरू हुआ था. वर्ल्ड बैंक, केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से इसे किया जाना तय हुआ. गढ़वा, सरायकेला खरसावां, पलामू, खूंटी, दुमका और जमशेदपुर में इसका लाभ ग्रामीणों को देना है. वर्ष 2020 तक इस योजना को पूरा किये जाने का टारगेट थे. 6 सालों में योजना 45 फीसदी भी पूरी नहीं हो सकी. वर्ल्ड बैंक ने प्रोजेक्ट को बेहद ख़राब परियोजना के तौर पर मार्क किया है. प्रोजेक्ट की राशि भी कम कर दी गयी है.
जल शक्ति मंत्रालय ने जताई है चिंता
कुछ दिनों पहले केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने राज्य सरकार के साथ नीर निर्मल प्रोजेक्ट पर चर्चा की थी. जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस योजना के निर्धारित समय में ( 2014-20 ) पूरा नहीं हो पाने पर चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि इस योजना में विश्व बैंक की बड़ी भूमिका है. उसकी मदद से झारखण्ड के अलावा दुसरे कुछ राज्यों में भी ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति सेवाओं पर काम हो रहा है. राज्य में नीर निर्मल प्रोजेक्ट पर गंभीरता से पहल किये जाने की जरुरत है. ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी पानी एक बड़ी समस्या है.
अब तक मिल चुके हैं 317 करोड़
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, झारखण्ड में आरडब्ल्यूएसएसपी-एलआईएस परियोजना के लिए तीन सौ करोड़ से भी अधिक राशि दी जा चुकी है. 2014-2020 के दौरान राज्य को 317.09 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए थे. इनमें से अब भी 67.36 करोड़ रुपए का उपयोग किया जाना बाकी है.
अब 400 मिलियन डॉलर का हुआ प्रोजेक्ट
योजना के कार्यान्वयन के 6 साल हो गए हैं. इतने समय में लक्ष्य की तुलना में वास्तविक प्रगति केवल 44.75% है. ऐसे कमजोर कार्यान्वयन के कारण विश्व बैंक ने इस परियोजना को बहुत खराब परियोजना के रूप में मूल्यांकित किया है. पहले इस प्रोजेक्ट के लिए 1 बिलियन अमरीकी डॉलर की राशि तय थी. धीमी प्रगति के कारण मूल परियोजना लागत में कटौती करके उसे 400 मिलियन अमरीकी डॉलर का कर दिया गया है.
क्या है नीर निर्मल परियोजना
यह योजना राज्य के 6 जिलों में चल रही है. पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, दुमका, पलामू व गढ़वा. ये ऐसे जिले माने गये हैं जहां रूरल इलाकों में पानी की गंभीर समस्या है. इस योजना में भारत सरकार और विश्व बैंक सहयोग कर रहा है. योजना को तीन चरणों में पूरा किया जाना था. योजना को दो पैटर्न में करना था. पहला एकल और दूसरा मल्टीपल. एकल का मतलब एक जलमीनार से ग्रामीणों को पानी कनेक्शन देना है. मल्टीपल के जरिये दो से तीन गांवों को पेयजल सुविधा देनी है. पहले चरण में 199 एकल तथा दो बहुउद्देश्यीय ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना का निर्माण किया जाना था. जानकारी के अनुसार इसमें से 128 से भी अधिक एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं पूरी हो चुकी थीं. शेष योजनाओं का काम प्रगति पर है.




