
Dhanbad: नारायण सिंह राणा एक ऐसा नाम है जिनके इर्द-गिर्द शूटिंग के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धियां घूम रही हैं. उत्तराखंड सरकार में खेल मंत्री रहे राणा खुद एक उम्दा शूटर रहे. वह भारत के नामचीन राइफल शूटर यशपाल सिंह राणा के पिता हैं. वह यशपाल के कोच भी रहे. नारायण सिंह राणा को उत्तराखंड सरकार ने द्रोणाचार्य पुरस्कार से नवाजा. यशपाल ने 1994 के विश्व निशानेबाजी चैम्पियनशिप में गोल्ड मैडल जीता. 1995 के कामनवेल्थ गेम्स में 5 स्वर्ण पदक जीत कर रिकार्ड बनाया. इसके अलावा एशियाई खेल और प्रतियोगिताओं में भी भारत के लिए कयी पदक प्राप्त किये. यशपाल को अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री से नवाजा गया. इनकी शादी रीना राणा से हुई. वह भी राष्ट्रीय स्तर की शूटर रही हैं. इसके साथ फैशन डिजायनर भी हैं. यशपाल राणा की बहन सुषमा राणा ने 2006 के मेलबार्न कामनवेल्थ गेम्स में भारत को गोल्ड मैडल दिलाया. सुषमा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की पुत्रवधू हैं.
क्रीड़ा भारती गांवों के खिलाड़ियों को तराश रहा है
धनबाद में चल रहे क्रीड़ा भारती के सम्मेलन में भाग लेने आये नारायण सिंह राणा ने न्यूज विंग से बातचीत की. बताया कि वह क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. नेशनल राइफल शूटिंग एसोसिएशन के लाइफ टाइम मेंबर हैं. पूरा परिवार खेल के प्रति समर्पित है. मेरी पोती यशपाल की बेटी देवांशी ने वल्डकप शूटिंग में दो गोल्ड मैडल लाया है. क्रीड़ा भारती गांवों से खिलाड़ियों को लाकर तराश रहा है. इसका बेहतर नतीजा आनेवाले कुछ साल में मिलेगा.
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