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एस्सेल इंफ्रा के टर्मिनेट होते ही एक्टिव मोड में नगर आयुक्त, फील्ड विजिट कर सफाई कार्यों की ले रहे जानकारी

स्वच्छता सर्वेक्षण सहित निगम के सफाई कार्य में योग्यता साबित करना बड़ी चुनौती

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Ranchi : राजधानी में सफाई का काम करने वाली कंपनी एस्सेल इंफ्रा के जाते ही नगर आयुक्त मनोज कुमार एक्टिव मोड में आ गये है. रोज ही वे फील्ड विजिट कर निगम की रियल स्टोरी जानने की कोशिश कर रहे हैं. कभी एक तो कभी दो-दो वार्डों का दौरा एक ही दिन में कर रहे हैं. नालियों और स्वच्छता जैसे कामों पर उनकी पैनी नजर है. एस्सेल इंफ्रा के टर्मिनेट होने के साथ ही राजधानी की सफाई व्यवस्था चरमराने की स्थिति में पहुंच गयी थी. वहीं दूसरी तरफ स्वच्छता सर्वेक्षण में राजधानी को एक बेहतर रैंक दिलाना भी निगम के लिए चुनौती से कम नहीं है.

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  निगम के सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द की गयीं

मालूम हो कि कुछ दिन पहले ही कंपनी एस्सेल इंफ्रा को टर्मिनेट कर दिया गया था. कंपनी के जाते ही शहर का सफाई कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए निगम के सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गयीं. स्वयं नगर आयुक्त अपने सहायक अपर नगर आयुक्त गिरिजा शंकर, स्वास्थ्य पदाधिकारी किरण कुमारी, निगम के अभियंताओं सहित संबंधित वार्ड पार्षदों के साथ इलाकों का मुआयना कर रहे हैं. इस दौरान वे नालियों में जल-जमाव, सामुदायिक शौचालयों की स्थिति, कचरे का उठाव सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी ले रहे है.

बेहतर रैंक लाने का है दबाव

नगर आयुक्त द्वारा रोज ही फील्ड विजिट कर रियल स्टोरी जानने के पीछे का सच दरअसल मोदी सरकार का महत्वाकांक्षी स्वच्छता सर्वेक्षण भी है. केंद्र की इस योजना के तहत स्वच्छता के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करनेवाले शहरों को सम्मानित किया जाता है. अगर राजधानी रांची की स्थिति को देखें,तो 2018 के स्वच्छता सर्वेक्षण में जहां देश भर के राज्यों की राजधानी की स्वच्छता रैंकिंग में सिटीजन फीडबैक के मामले में रांची शहर अव्वल रहा था. वही स्वच्छती सर्वेक्षण-2019 में एक लाख से ज्यादा आबादी वाले टॉप 100 शहरों की सूची में रांची को 46 वां रैंक मिला था. इसके अलावा एस्सेल इंफ्रा के हटने के बाद निगम पर यह आरोप न लगे कि राजधानी में सफाई का काम करने में वह  सक्षम नहीं है, इसे भी साबित करना नगर आयुक्त के लिए जरूरी है.

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