न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बहुमत वाली सरकार में खेलः बंद हुए 3700 सरकारी स्कूल और शुरू हुआ 2305 प्राईवेट स्कूलों का बिजनेस

सरकार की योजना के तहत दो सालों में 4532 स्कूलों को विलय कराया गया. विलय के बाद करीब 3700 सरकारी स्कूल बंद हो गये.

1,498

Gourav

mi banner add

Ranchi : बहुमत वाली सरकार में शिक्षा के क्षेत्र में गजब का खेल हो गया. जिससे यह पता चलता है कि सरकार की शिक्षा नीति किस ओर जा रही है. शिक्षा नीति आम लोगों व गरीब छात्रों के हक में आगे बढ़ रही है या पुंजिपतियों के लाभ के लिये रास्ता बना रही है. एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. आंकड़े के मुताबिक पिछले दो साल में झारखंड में 3700 सरकारी स्कूल बंद हुए, जबकि इसी दौरान राज्य में 2305 निजी स्कूल खुल गये. इस आंकड़े से समझा जा सकता है झारखंड की शिक्षा नीति किस ओर बढ़ रही है.

दरअसल, पिछले एक-दो सालों में सरकार ने सरकारी स्कूलों में बच्चों की कमी बताते हुए स्कूलों का विलय कराया. सरकार की योजना के तहत दो सालों में 4532 स्कूलों को विलय कराया गया. विलय के बाद करीब 3700 सरकारी स्कूल बंद हो गये. स्कूल बंद होने वाले आंकड़े में 100 से 150 की संख्या और जुड़ सकती है, क्योंकि इन स्कूलों को बंद करने की फाईल पर निर्णय डीसी को लेना है.

स्कूल बंद होने का फायदा सीधे तौर पर निजी स्कूलों का धंधा चलाने वाले लोगों को हुआ. सरकार को जहां छात्र नहीं मिल रहे हैं, वहीं लगातार प्राईवेट स्कूल खुल रहे हैं और उन स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. स्कूलों के विलय के बाद राज्य में नये 2305 प्राईवेट स्कूल खोले जा चुके हैं. स्कूलों के विलय की योजना के तहत राज्य में सबसे ज्यादा जमशेदपुर जिले के 393 स्कूल और कोडरमा के 81 स्कूलों का विलय किया गया.

इसे भी पढ़ें – झारखंड : कई इंजीनियरिंग कॉलेजों को नहीं मिलेगी दो वर्ष की मान्यता, खतरे में सात हजार से ज्यादा छात्रों का भविष्य

राज्य में  7094 Unrecognised प्राईवेट स्कूल

Related Posts

RTI से मांगी झारखंड में बाल-विवाह की जानकारी, BDO ने दूसरे राज्यों की वेबसाइट देखने को कहा

मेहरमा की बीडीओ ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के जनजातीय विभागों के लिंक देकर लिखा, इन्हीं वेबसाइट पर मिलेगी जानकारी

पूरे राज्य में अभी फिलहाल 7094 Unrecognised प्राईवेट स्कूलों का संचालन किया जा रहा है. ये सभी वैसे स्कूल हैं जिन्हें कहीं से भी मान्यता प्राप्त नहीं है. ये वैसे स्कूल हैं, जो सिर्फ डीएसई स्तर से लिखवाकर स्कूलों का संचालन करते हैं. इसके अलावा 1392 रिकग्नाइज्ड प्राईवेट स्कूल हैं.  स्कूलों के विलय के बाद 211 नये प्राईवेट स्कूलों को मान्यता दी गयी. Recognised स्कूलों की संख्या में 2094 की बढ़ोतरी हुई है.

   प्राईवेट स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे हैं

राज्य सरकार की स्कूल विलय योजना से सरकार के हिसाब से लगभग 40 करोड़ रुपये का बचत हुई है. वहीं दूसरी तरफ स्कूल विलय योजना का लाभ प्राईवेट स्कूलों ने जमकर उठाया. प्राईवेट स्कूल जमकर अपनी मर्जी के हिसाब से फीस ले रहे हैं. रिकग्नाइज्ड स्कूलों में तो फीस के मुताबिक शिक्षक और संसाधन मिल  जाते हैं. सबसे अधिक संख्या अनरिकग्नाइज्ड स्कूलों के हैं. जिनकी संख्या पूरे राज्य में 7094 हैं, इन स्कूलों में पैसे तो लिये जा रहे हैं पर संसाधन और शिक्षकों की गुणवत्ता का किसी का ध्यान नहीं है.

इसे भी पढ़ें – झारखंड : इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक संस्थानों के 2500 छात्रों का हुआ कैंपस सेलेक्शन, मगर परीक्षा पर रोक से अंधेरे में भविष्य

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: