
झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को सीएम का सलाहकार बनाए जाने के सरकार के प्रस्ताव पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि आरोपी मैडम को सलाहकार ही क्यों, राज्य का 12वां मंत्री ही बना देना चाहिए. वैसे भी 12वें मंत्री का पद किसी सुयोग्य उम्मीदवार के इंतजार में तीन वर्षों से खाली पड़ा है. यहां उल्लेखनीय है कि राजबाला वर्मा को लेकर पिछले एक साल से सरकार और मुख्यमंत्री रघुवर दास की फजीहत हो रही है. चारा घोटााला के एक मामले में उन्होंने 14 साल तक स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया. मंत्री सरयू राय और विपक्ष के भारी दवाब में रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले उन्होंने स्पष्टीकरण दिया, जिसके बाद मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए उन्हें क्लीन चिट दे दी है.
RANCHI : झारखंड विकास मोर्चा के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा को सीएम का सलाहकार बनाए जाने के सरकार के प्रस्ताव पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि आरोपी मैडम को सलाहकार ही क्यों, राज्य का 12वां मंत्री ही बना देना चाहिए. वैसे भी 12वें मंत्री का पद किसी सुयोग्य उम्मीदवार के इंतजार में तीन वर्षों से खाली पड़ा है. यहां उल्लेखनीय है कि राजबाला वर्मा को लेकर पिछले एक साल से सरकार और मुख्यमंत्री रघुवर दास की फजीहत हो रही है. चारा घोटााला के एक मामले में उन्होंने 14 साल तक स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिया. मंत्री सरयू राय और विपक्ष के भारी दवाब में रिटायरमेंट से कुछ दिन पहले उन्होंने स्पष्टीकरण दिया, जिसके बाद मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए उन्हें क्लीन चिट दे दी है. इस बीच एक नया मामला सामने आ गया है. चाईबासा के सारंडा में रामकृपाल सिंह कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा सड़क निर्माण और पेड़ों की कटाई को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राजबाला वर्मा की ईमानदारी पर उंगली उठायी है.
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सीएम की नजर में राजबाला ही योग्य उम्मीदवार !

जेवीएम ने तंज कसते हुए कहा है कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए यही लग रहा है कि मुख्यमंत्री जी की नजर में राजबाला वर्मा से बेहतर कोई योग्य उम्मीदवार हो ही नहीं सकता. योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि ये बात समझ से परे है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि राजबाला वर्मा पर तमाम आरोपों और उनके खिलाफ उठे विरोध के बावजूद सरकार उन्हें उपकृत करना चाहती है. यहां उल्लेखनीय है कि विपक्ष राजबाला वर्मा और मुख्यमंत्री को लेकर व्यवसायिक रिश्ते तक काआरोप लगा चुका है. मत्री सरयू राय ने भी राजबाला वर्मा पर एक स्वयं सेवी संंस्था को गलत तरीके से एक रुपये में जमीन देने का आरोप लगाया था. वहीं, सीएम से भी कई दफा राजबाला पर आरोपों के आधार पर कार्रवाई करने की मांग कर चुके थे, इस मुद्दे पर सरयू के सुर में पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी सुर मिलाया था।
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जनमुद्दों से ज्यादा राजबाला पर गंभीर सरकार
राजबाला वर्मा पर सीएम की असीम कृपा आखिर किस बात पर है, ये सूबे की सियासी गलियों में कौतूहल का विषय है. वहीं, इस बीच योगेंद्र प्रताप सिंह ने सीएम पर जुबानी हमला बोलते हुए कहा कि घुवर सरकार राजबाला को लेकर जितनी गंभीर है उससे आधी गंभीरता भी यदि जनमुद्दों को लेकर दिखलाई होती तो उससे राज्य का भला हो जाता. सरकार का जो रवैया है, उससे स्पष्ट है कि राजबाला वर्मा प्रकरण ही सरकार के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम करेगी.
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