
Gyan Ranjan
Ranchi: झारखंड में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शह मात का खेल जारी है. सियासी शतरंज की बिसात पर लगातार चालें चली जा रही है. खदान आवंटन मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 10 मई तक चुनाव आयोग को जवाब देना है. विपक्ष इस मामले पर मुख्यमंत्री के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है. विपक्ष खासकर भाजपा के प्रमुख नेता बाबूलाल मरांडी, रघुवर दास और दीपक प्रकाश लगातार इस मामले को लेकर हेमंत सोरेन पर वार कर रहे हैं. इस बीच जिस तरह से स्पीकर के न्यायाधिकरण ने बाबूलाल मरांडी के खिलाफ चल रहे दल बदल मामले पर लगातार दो तारीखों का एलान एक ही दिन कर दिया, इसको लेकर सियासी गलियारे में चर्चाएँ गरम है. स्पीकर की अदालत की तरफ से सुनवाई के लिए तारीखों की घोषणा के बाद से ही भाजपा इसको लेकर सशंकित है. खुद बाबूलाल मरांडी ने यह शंका जाहिर कि है कि उन्हें अंदेशा है कि स्पीकर की कोर्ट इस मामले पर उनके खिलाफ निर्णय ले सकती है. उन्होंने यहां तक कहा था कि सरकार के इशारे पर उनकी सदस्यता को समाप्त करने की पूरी तैयारी कर ली गयी है. छह मई को स्पीकर के न्यायाधिकरण में पूर्व विधायक राजकुमार यादव और भूषण तिर्की द्वारा दायर दल बदल मामले पर सुनवाई हुई. अब नौ मई को इस मामले पर विधायक दीपिका पाण्डेय सिंह की याचिका पर सुनवाई होनी है. जानकारी के अनुसार इस मामले को अब ज्यादा दिनों तक नहीं खींचा जाएगा. जल्द ही स्पीकर इसपर अपना फैसला दे सकते हैं. संभावना यह व्यक्त की जा रही है कि बाबूलाल मरांडी मामले पर कल की सुनवाई आखिरी हो सकती है और इसके बाद इस मामले पर न्यायाधिकरण का फैसला आ सकता है.
स्पीकर के निर्णय से पहले बाबूलाल ले सकते हैं बड़ा फैसला !
झारखंड में चल रहे सियासी रस्साकसी के बीच यह जानकारी मिल रही है कि स्पीकर के न्यायाधिकरण के फैसले से पहले बाबूलाल मरांडी बड़ा फैसला ले सकते हैं. राजनीतिक गलियारे में चर्चा यह है कि स्पीकर के हाथों सदस्यता गंवाने से पहले बाबूलाल मरांडी अपनी विधायकी से इस्तीफा दे सकते हैं. कहा यह जा रहा है कि इसी मामले पर विचार-विमर्श के लिए बाबूलाल मरांडी दिल्ली प्रवास पर हैं. दिल्ली में वह पार्टी के बड़े नेताओं के साथ इस विषय पर मंत्रणा कर रहे हैं. मालूम हो कि बाबूलाल मरांडी ने पूर्व में स्पीकर की नियत पर सवाल खड़ा किया था. उन्होंने साफ़ कहा था कि उनके भाजपा में जाने के बाद स्पीकर ने दल बदल मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था लेकिन जब हाई कोर्ट में यह मामला नहीं टिका और स्पीकर के स्वतः संज्ञान को ख़ारिज कर दिया गया तब 10 महीने के बाद स्पीकर ने विधायकों और पूर्व विधायकों से उनके खिलाफ याचिका दायर कराई.
सरकार के दवाब में काम कर रहे हैं स्पीकर : प्रदीप सिन्हा
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने आरोप लगाया कि बाबूलाल मरांडी के मामले में स्पीकर सरकार के दवाब में काम कर रहे हैं. कहा कि जब चुनाव आयोग ने पिछले राज्यसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी को भाजपा का विधायक बताते हुए वोटिंग का अधिकार दिया था तो मामला उसी समय ख़त्म हो जाता है लेकिन राज्यसभा चुनाव के बाद स्पीकर ने विधायकों और पूर्व विधायकों से बाबूलाल मरांडी के खिलाफ दल बदल का मामला दायर कराया. भाजपा के विधायक लगातार बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा देने की मांग करते रहे लेकिन बाबूलाल मरांडी के नाम से डरी राज्य की हेमंत सरकार ने इसको भी स्पीकर को नहीं करने दिया. कहा कि जनता सब देख रही है.




