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विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने फिर की भोजपुरी, अंगिका, मैथिली को JSSC की परीक्षाओं में मान्यता देने की मांग

Ranchi : महागामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने एक बार फिर सरकार से कहा है कि वह झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में भोजपुरी, मैथिली, अंगिका समेत अन्य भाषाओं को स्थान दे. विधानसभा सत्र के आखिरी दिन बुधवार को उन्होंने प्रश्न काल के दौरान सदन में स्पीकर औऱ सरकार से इस विषय पर पहल किये जाने की अपील की. कहा कि आयोग में भाषाई उपेक्षा के कारण राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है. जेएसएससी में भोजपुरी, हिन्दी, अंगिका और अन्य भाषाओं को दरकिनार कर दिया गया है.

इसे बाहरी भाषा मानी जा रही. इस राज्य का गठन सबों के सहयोग से हुआ था. भाषाई आधार पर जेएसएससी द्वारा विभेद किये जाने से भाई से भाई की लड़ाई की स्थिति उत्पन्न हो रही है. इस तरह की स्थिति से बचा जाए.

इस हठ को छोड़कर और बड़ा मन दिखाते हुए राज्य के व्यापक हित में फैसला लिया जाना चाहिये. राज्य में इन भाषाओं को द्वितीय राजभाषा का दर्जा है. ऐसे में इस तरह के फैसले को वापस लिया जाय.

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पूर्व में ला चुकी हैं ध्यानाकर्षण

गौरतलब है कि विधानसभा के चालू सत्र में 21 दिसंबर को उन्होंने इस विषय पर ध्यानाकर्षण भी लाया था. कहा था कि 5 अगस्त, 2021 को झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक हुई. इसमें झारखंड कर्मचारी आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में कुल 12 क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को चिन्हित कर स्वीकृति दी गई.

गोड्डा सहित राज्य के अधिकांश हिस्से में हिन्दी, अंगिका, मैथिली, मगही, भोजपुरी जैसी भाषाएं बोली जाती हैं. इन भाषाओं को शामिल नहीं किए जाने से राज्य के अधिकांश युवाओं को समान अवसर नहीं मिल पाएगा.

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जानकारी है कि लगभग 20 विभागों ने नए सिरे से नियुक्ति नियमावलियां तैयार कर ली हैं. जल्दी ही विभिन्न नौकरियों के लिए वेकेंसी जारी होने वाली हैं. ऐसे में जरूरी है कि राज्य के अधिकांश हिस्सों में बोले जाने वाली भाषाओं और उसके जानकार युवाओं को समान अवसर दिया जाए.

हिन्दी, भोजपुरी सहित अन्य भाषाओं को भी क्षेत्रीय भाषा के तौर पर शामिल किया जाय. विधासनसभा सत्र से पहले भी दीपिका ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर मामले में ध्यान आकृष्ट कराया था.

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