
Mumbai: महाराष्ट्र में सरकार बनाने की रेस में बीजेपी और शिवसेना दोनों निर्दलीय विधायकों को साधने की जुगत में लगे हैं. दरअसल मुख्यमंत्री पद को लेकर बीजेपी और शिवसेना के बीच खींचतान के साथ दबाव की राजनीति जारी है.
चुनावी नतीजों के बाद शिवसेना ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर सरकार बनाने की बात पर अड़ी है. जबकि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के कारण इस शर्त पर राजी नहीं है. इस खींचतान के बीच दोनों की नजर निर्दलीय विधायकों पर है.
इस प्रेशर पॉलिटिक्स के बीच महाराष्ट्र भाजपा ने सोमवार को कहा कि उसके पास 15 निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है और वह शिवसेना के साथ मिलकर अगली सरकार ‘आराम’ से बना लेगी.
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बीजेपी के पास 122 का आंकड़ा !
भाजपा का यह बयान शिवसेना द्वारा सरकार में बराबर साझेदारी और मुख्यमंत्री पद पूरे कार्यकाल के आधे-आधे समय में बाटंने की मांग के बीच आया है. पार्टी प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने कहा कि 105 अपने विधायकों के अलावा भाजपा के पास 15 निर्दलीय विधायकों का साथ है.
उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआइ से कहा, ‘ भाजपा के टिकट की इच्छा रखने वाले कुछ लोग ऐसे हैं जो निर्दलीय के रूप में चुनाव जीत चुके हैं. उन्होंने भाजपा को अपना समर्थन दिया है.’ शालिनी ने कहा कि मेरा मानना है कि शिवसेना को साथ लेकर भाजपा आराम से सरकार बना लेगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस नई सरकार में शीर्ष पद पर बने रहेंगे.
गौरतलब है कि मीरा भायंदर सीट से भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय लड़कर जीतीं गीता जैन, बरसी सीट से राजेंद्र राउत, अमरावती जिले की बडनेरा सीट से जीतने वाले रवि राणा ने बीजेपी को समर्थन देने की घोषणा कर दी है. पार्टी का कहना है कि इन तीनों की तरह अन्य निर्दल विधायकों ने खुद भाजपा से संपर्क कर समर्थन देने की बात कही है, क्योंकि उनका नाता पार्टी से ही रहा है. याद दिला दें कि 24 अक्टूबर को जिस दिन चुनाव के परिणाम सामने आये थे, उस दिन भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 15 निर्दलीयों के संपर्क में होने की बात कही थी.
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सीएम पद को लेकर खींचतान
बीजेपी-शिवसेना में मुख्यमंत्री पद को लेकर पेंच फंस रहा है. रिजल्ट के बाद ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले (यानी ढाई साल बीजेपी का सीएम, ढाई साल शिवसेना का) पर सरकार बनाने की बात कर रही है. वहीं चुनाव से पहले भी शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपे उद्धव ठाकरे ने अपने इंटरव्यू में भी कहा था कि वह शिवसैनिक को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं.
जिसके बाद से महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना में सरकार बनाने को लेकर नतीजे आने के पांचवें दिन भी पेंच फंसा हुआ है. इधर सोमवार को दोनों दलों के नेताओं ने राज्यपाल से अलग-अलग मुलाकात भी की थी. जिसे लेकर माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री और सरकार में पदों को लेकर बातचीत सुलझ नहीं सकी है.
दबाव की राजनीति के बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के 30 अक्टूबर को मुंबई पहुंचने की खबर है. माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार के गठन के फॉर्मूले को अमलीजामा पहना सकते हैं.
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में भाजपा को 105 और शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं. शरद पवार नीत राकांपा ने 54 सीट जीतीं, जबकि कांग्रेस के हिस्से 44 सीट आई हैं.
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