
Ranchi/Giridih/Hazaribag : कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए लगे लॉकडाउन में राज्य सरकार ने सभी गतिविधियों को बंद किया था. अब अपने नये निर्णय में सरकार ने अधिकांश क्षेत्रों को खोलने का निर्देश दिया है.
इस निर्देश के बाद कई लोगों में खुशी है. तो वही कई लोग हेमंत सरकार से नाराज भी हो चले है. नाराज होने वाले में वस्त्र और जूता-चपल की दुकानों से जुड़े लोग हैं.
नाराजगी इतनी बढ़ी है कि मंगलवार को राज्य के कई इलाकों में इन्होंने विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है. न्यूज विंग ने इस व्यवसाय से जुड़े लोगों से बातचीत कर वास्तविक स्थिति की जानकारी ली.
बातचीत में कमोवेश सभी व्यवसायियों का यही कहना है कि हेमंत सरकार को जल्द ही उनके बारे में सोचना चाहिए. व्यवसायियों का कहना है कि सरकार ने वैसे व्यवसायों को खोलने का निर्देश दिया है, जिसकी जरूरत अभी नहीं के बराबर थी.
सरकार को प्रवासी मजदूरों की चिंता तो है, जो कि अच्छी बात है. लेकिन कपड़ा, जूता-चप्पल दुकानों को नहीं खोलने के निर्देश का असर यह है कि करीब 30 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं.
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चैंबर के साथ बैठक कर वस्त्र विक्रेता संघ ने लगायी गुहार
कपड़ा व्यापार के संचालन की अनुमति नहीं मिलने और व्यवसायियों के समक्ष आ रही कठिनाइयों को देख मंगलवार को एक बैठक हुई.
बैठक झारखंड थोक वस्त्र विक्रेता संघ व रेडिमेड गारमेंट होजियरी संघ के पदाधिकारियों और फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्रीज के पदाधिकारियों के बीच हुई.
बैठक में कपड़ा व्यवसायियों ने अपनी कठिनाइयां साझा करते हुए इस मामले में फेडरेशन से हस्तक्षेप करने की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार को लगता है कि कपडा दुकानों के खुलने से लोगों की भीड अधिक होने लगेगी.
इससे संक्रमण बढने की आशंका है. इसी आशंका को देख सरकार ने कपडा व्यापार को अब तक बंद रखा है. यदि ऐसा है तो कपड़ा व्यापार को ऑड-इवेन अथवा वैकल्पिक दिन खोलने की पहल की जा सकती है.
निर्णय से नाराजगी: गिरीडीह, हजारीबाग में विरोध प्रदर्शन

हेमंत सरकार के फैसले से नाराजगी के कारण कई जिलों में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है. गिरिडीह शहर के कपड़ा कारोबारियों ने मंगलवार को कुछ मिनटों के लिए सड़क पर उतर कर हेंमत सोरेन को घेरा.
शहर के पदम चौक में कई कपड़ा दुकानदारों ने सामाजिक दूरी के नियम के साथ प्रदर्शन किया. कपड़ा कारोबारियों का कहना था कि यह सही है कि राज्य में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे है, लेकिन कपड़ा दुकानों के अलावा दूसरे व्यवसायों को रियायत क्यों दी गयी है.
सिर्फ कपड़ा दुकानों से ही नहीं बल्कि जितने भी दुकानें खुली है, उनसे भी कोरोना फैलने का खौफ बना हुआ है.
सरकार के नये गाइड लाइन के बाद शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में अनावश्यक वस्तूओं में ज्वेलरी, मोबाइल, चश्मा, घड़ी की दुकानें खुली. ऐसा लगा जैसे कि लोगों को कोरोना का कोई खौफ नहीं रह गया है.
मेडिकल से लेकर कई अन्य दुकानों में समाजिक दूरी के नियमों की धज्जियां टूटती ही नजर आयीं. इस दौरान शहर में कई कपड़ा और जूता-चप्पलों की दुकानें भी खुल गयीं.
कुछ दुकानदार चोरी-छिपे दुकान खोलकर दुकानदारी करते नजर आये. वहीं जो कपड़ा दुकानदार चोरी-छिपे दुकानदारी कर रहे थे, वहां ग्राहकों की भीड़ भी दिखी.

हजारीबाग स्थित स्थानीय झंडा चौक में भी कपड़ा, रेडिमेड जूते-चप्पल और मनिहारी दुकानदार से जुड़े लोगों ने सोशल डिस्टेंस बनाते हुए विरोध प्रदर्शन किया.
इन्होंने मांग रखी कि जब सारे व्यवसाय को खोलने की इजाजत सरकार ने दे दी है, तो सिर्फ उनके व्यवसाय के साथ सौतेला व्यवहार क्यों?
निर्णय पर विचार करें सरकार, नहीं तो मृतप्राय हो जाएगा कपड़ा व्यवसाय : दीपक मारू
पूर्व चेम्बर अध्यक्ष दीपक मारू का कहना है कि कोरोना महामारी की शुरूआत से सारे व्यापारी सरकार को जैसा सहयोग करते रहे है, वैसा सहयोग वे आगे भी करते रहेंगे.
हालांकि लॉकडाउन के दौरान कपड़ा व्यवसाय को सबसे अधिक क्षति पहुंची है. सरकार अपने निर्णय पर यदि पुनर्विचार नहीं करती है, तो तय है कि यह व्यवसाय पूरी तरह से मृतप्राय हो जायेगा.
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30 लाख लोग जुड़े है क्षेत्र से, आखिर उनकी चिंता सरकार को क्यों नहीं: सुरेश मल्होत्रा
राजधानी स्थित कश्मीर वस्त्रालय के संचालन कर रहे सुरेश मल्होत्रा का कहना है कि कोरोना महामारी को रोकने लिए सरकार ने लॉकडाउन का सहारा लिया था.
इस दौरान प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए सरकार ने हरसंभव कोशिश की. इस कोशिश का असर है कि अबतक ज्यादा से ज्यादा करीब 5 लाख मजदूर ही घर लौटे है.
दूसरी ओर कपड़ा, रेडिमेट, जूता-चप्पल से जुड़े व्यवसाय को देखे, तो पूरे राज्य में कम से कम करीब 30 लाख कामगार जुड़े है.
सरकार को जिन प्रवासी मजदूरों की चिंता है, वे तो कोरोना प्रकोप खत्म होने पर वे वापस राज्य से बाहर जायेंगे. लेकिन राज्य में जो 30 लाख लोग प्रभावित हो रहे है, उसकी चिंता आखिर सरकार को क्यों नहीं है.
कपड़ा दुकान बंद कर सब्जी तो नहीं बेचेंगे व्यवसायी : विनोद मोदी
वीणा वस्त्रालय के विनोद मोदी का कहना है कि लॉकडाउन लगने के बाद कपड़ा दुकानों को तो बंद किया गया, लेकिन परेशानी काफी बढ़ गयी है. इस व्यवसाय से जुड़े कर्मियों को वेतन तो देना ही पड़ेगा.
लेकिन दो माह से दुकानों के बंद होने के कारण आमदनी पूरी तरह से खत्म हो गयी है. ऐसे में सभी को भूखे मरने की नौबत आ गयी है. अगर सरकार उनकी ओर ध्यान नहीं देती है, तो वे क्या करेंगे. ऐसा तो नहीं कर सकते है कि कपड़ा दुकान बंद कर वे सब्जी बेचें.
ओड-इवेन तरीका और समय की पाबंदी लगाकर ही सरकार दे निर्देश : सुनील कुमार सरावगी
श्री सुंदर वस्त्रालय के सुनील कुमार सरावगी का कहना है कि राज्य सरकार से उनकी मांग है कि वे तत्काल उन्हें राहत प्रदान करें. चाहे तो सरकार ऑड-इवेन तरीका और समय की पाबंदी लगाकर ही यह निर्देश दे.
लॉकडाउन के पहले ही कपड़ा व्यवसायी काफी स्टॉक लेकर फंसे हुए हैं. इन दो माह में तो स्थिति काफी खराब हुई है. कपड़े व्यवसाय से जुड़े लोग काफी आर्थिक परेशानी को झेले हैं.
सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित महाराष्ट्र में भी दुकान खोलने की मिली है अनुमति : विक्रम खेरावत
झारखंड थोक वस्त्र विक्रेता संघ के सचिव विक्रम खेरावत का कहना है कि सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमित महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में कपड़ा दुकानों को खोलने का निर्देश मिला है.
ऐसा है तो झारखंड में दुकान खोलने की अनुमति क्यों नहीं है. कोरोना को लेकर जो निर्देश झारखंड सरकार ने दिया है, उसका निर्देश मानते हुए वे चाहते हैं कि उन्हें भी दुकानों को खोलने की अनुमति दी जाये.
जब सभी को दुकान खोलने की अनुमति मिली है, तो हमें क्यों नहीं : परमानंद कुजारा
वुल हाउस संचालक के संचालक परमानंद कुजारा का कहना है कि जब ज्वेलरी, फ्रिज, साइकिल दुकानों को खोलने का निर्देश मिला है, तो हम कपडा व्यवसायियों को क्यों नहीं.
कपड़े व्यवसायियों को भी दुकानें खोलने की अनुमति राज्य सरकार को देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पिछले दो माह से दुकान नहीं खुलने के कारण इनकम एक भी नहीं हुआ है. जबकि कपड़ा दुकान में काम करने वाले कामगारों को वेतन देना ही होगा.
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