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टंडवा की तरह धनबाद की छह कोलियरियों में भी कोल ट्रांसपोर्टरों से हर माह 8.40 करोड़ की अवैध वसूली !

Tirth Nath Akash
Dhanbad: कोयला कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से सिर्फ टंडवा में ही लेवी की वसूली नहीं की जा रही है. टंडवा की तरह ही धनबाद में भी अवैध वसूली की जा रही है. टंडवा में जो काम टीपीसी के उग्रवादी करते हैं, धनबाद में वही काम दबंग विधायक ढुल्लू महतो और उसके गुर्गे कर रहे हैं. टंडवा में जिस वसूली को लेवी कहा जाता है, धनबाद में वह रंगदारी कही जाती है. टंडवा में भी पुलिस पहले कार्रवाई नहीं करती थी (अब कुछ कार्रवाई हो रही).

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धनबाद में भी पुलिस अवैध वसूली करने वाले विधायक ढुल्लू महतो और उसके गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करती है. धनबाद पुलिस तो प्राथमिकी में विधायक का नाम तक नहीं लिखती. इससे पता चलता है कि या तो धनबाद जिला की पुलिस विधायक व उसके गुर्गों से मिली हुई है या फिर डरी हुई है.

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जानकारी के मुताबिक, धनबाद के छह कोलियरियों कनकनी, आकाशकिनारे, चेतुडीह, शताब्दी, मुराईडीह और मोदीडीह से प्रति माह 1.40 लाख टन से अधिक कोयला का उत्खनन और ट्रांसपोर्टिंग होती है. कोयला की लोडिंग मशीन से होने पर नियमतः 50 रुपया प्रति टन और मजदूर से कराने पर प्रति टन 200 रुपया का खर्च करना होता है. लेकिन कंपनियों को खर्च करना पड़ता है 650 रुपया प्रति टन से 900 रुपया प्रति टन. मतलब प्रति टन 600-700 रुपये की अवैध वसूली की जाती है. कहने को और कागज पर यह काम अलग-अलग कंपनियां करती है. लेकिन एक सच यह भी है कि ढुल्लू महतो की अनुमति के बिना वहां कोई काम नहीं कर सकता.

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ढुल्लू महतो की मर्जी के बिना जो भी काम करेगा, उसका अंजाम ओरिएंटल कंपनी के जैसा ही होता है. जिसका काम तो बंद हो ही जाता है, कंपनी के अफसरों की पिटाई भी होती है. इतना ही नहीं, जब कंपनी को लोग प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए थाना में आवेदन देते हैं, तो पुलिस प्राथमिकी में विधायक का नाम भी दर्ज नहीं करती. जानकारी के मुताबिक, कनकनी कोलियरी से प्रति माह 50,000 टन कोयला की ट्रांसपोर्टिंग होती है. यहां लोडिंग का काम मशीन से होता है. कंपनियों को एक टन कोयला लोड करने में 50 रुपया खर्च आता है. लेकिन देना पड़ता है प्रति टन 650 रुपया. इसी तरह चेतुडीह कोलियरी से प्रति माह 50 हजार टन कोयला की लोडिंग मशीन से होती है. यहां भी 50 रुपये की जगह 650 रुपया देना पड़ता है. मतलब प्रति टन 600 रुपये की अवैध वसूली होती है.

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आकाशकिनारी, शताब्दी, मुराईडीह और मोदीडीह कोलियरी से प्रति माह 10-10 हजार टन कोयला का उत्खनन और ट्रांसपोर्टिंग की जाती है. इन चारों कोलियरियों में लोडिंग का काम मजदूर करते हैं. लोडिंग का दर प्रति टन 200 रुपया है. लेकिन कंपनियों को 900 रुपया प्रति टन देना पड़ता है. इस तरह प्रति टन 700 रुपये की अवैध वसूली की जाती है. इस आंकड़े पर गौर करें तो साफ है कि इन छह कोलियरियों से हर माह 1.40 लाख टन से अधिक कोयले का उत्खनन और ट्रांसपोर्टिंग होती है और कंपनियों को प्रति टन कम से कम 600 रुपया रंगदारी के रुप में देना पड़ता है. इस तरह वहां प्रति माह 8.40 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की जाती है.

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