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एक ही बार में काट दिया गैर मजरूआ भूमि के 72 वर्ष का लगान

नामकुम अंचल के CO, CI और हल्का कर्मचारी की रही महत्वपूर्ण भूमिका, हाल ही में इलिका इस्टेट्स ने खरीदी है इंडिकोन वेस्टफालिया कंपनी

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Ranchi: राजधानी रांची के इंडिकोन वेस्टफालिया कंपनी की 29.20 एकड़ भूमि का लगान रसीद 72 वर्ष बाद एक ही झटके में काट दिया गया है. इसमें नामकुम अंचल के अंचल अधिकारी मनोज कुमार, तत्कालीन हल्का कर्मचारी विमल कुमार और अंचल निरीक्षक श्री यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही. इन तीनों की टीम ने काफी साफगोई से गैर मजरूआ जमीन की रसीद काट दी.

एक साथ कटी जीएम लैंड के 72 सालों की लगान रसीद

अब यह जमीन इलिका इस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से हस्तांतरित कर दी गयी है. गैर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी इलिका इस्टेट्स ने इंडिकोन वेस्टफालिया कंपनी खरीद ली है. न्यूजविंग संवाददाता ने लगान रसीद काटे जाने के मामले में अंचल अधिकारी मनोज कुमार के मोबाइल फोन पर कई बार संपर्क भी किया, लेकिन फोन का कोई उत्तर नहीं दिया गया. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एक साथ लंबे अरसे तक लंबित रहनेवाले लगान रसीद को नियमत: नहीं काटा जा सकता है. इसके लिए मुख्यालय अथवा समाहरणालय स्तर पर अनुमति लेनी जरूरी है.

1946 में बंदोबस्ती के तहत जमीन का वर्गीकरण उद्योगों के लिए किया गया था. टाटीसिलवे में औद्योगिक क्षेत्र के लिए यह जमीन वर्ष 1946 में बंदोबस्ती के तहत उद्योगों के लिए वर्गीकृत की गयी थी. रांची क्षेत्रीय औद्योगिक विकास प्राधिकार (रियाडा) की तरफ से 1992 में थापर समूह को औद्योगिक गतिविधियां संचालित करने के लिए जमीन आवंटित की गयी थी. थापर समूह की तरफ से जमीन के लिए सरकारी खजाने में 3.50 करोड़ रुपये जमा किये गये थे.

जमीन पर थापर समूह ने माइनिंग और कंटेनर डिविजन स्थापित किया था. माइनिंग डिविजन में कोयला उद्योगों से जुड़े भारी उपकरण का निर्माण किया जाता था. सूत्रों का कहना है कि थापर समूह ने इंडिकोन वेस्टफालिया के नाम से सिर्फ आठ एकड़ जमीन ही कागजों में दर्शायी थी. शेष 21.20 एकड़ जमीन कैंपस के लिए रखी गयी थी. इसमें से 20 एकड़ जमीन पर सघन पौधारोपण भी किया गया था. इसमें सागवान, साल, गम्हार, एकासिया, शीसम और अन्य फलदार वृक्ष लगाये गये थे.

बगैर अनुमति के ही काट दिये गये दो हजार से अधिक पेड़

इलिका इस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से इंडिकोन वेस्टफालिया के खरीदे जाने के बाद कैंपस में लगे सारे पेड़ काट दिये गये. सूत्रों का कहना है कि कैंपस में दो हजार से अधिक पेड़ थे. इसे काटने के लिए वन और पर्यावरण विभाग से किसी तरह की अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया गया. इतना ही नहीं इंडिकोन वेस्टफालिया के कंटेनर और माइनिंग डिविजन के कार्यालयों को भी ध्वस्त कर दिया गया. सारे कबाड़ भी बेच दिये गये हैं.

इंडिकोन वेस्टफालिया ने हटाया अपना कार्यालय

कंपनी बेचे जाने के बाद इंडिकोन वेस्टफालिया ने टाटीसिलवे से अपना दफ्तर हटा दिया. फिलहाल कंपनी का अस्थायी कार्यालय रांची के अशोक नगर स्थित रोड नंबर-1 में चल रहा है. यहां पर अधिकारी स्तर के कुछ कर्मी हैं. जल्द ही यह कार्यालय भी बंद कर दिया जायेगा. कंपनी की तरफ से अब तक सिर्फ श्रमिक वर्ग के कर्मियों का ही सेटेलमेंट किया गया है. अन्य का बकाया भुगतान और सेटेलमेंट अब तक लंबित है.

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