
NewDelhi : 1980 के दशक में पुलिस प्रमुख के रूप में पंजाब में उग्रवाद से सख्ती से निपटने के लिए जाने जाने वाले जूलियो रिबेरो ने जम्मू-कश्मीर के संबंध में केंद्र सरकार के हालिया फैसले को एक पुलिसकर्मी के नजरिए से तो पूरे अंक दिये, लेकिन नैतिकता के दृष्टिकोण से इस पर सवाल उठाये. कहा कि ऐसे मामलों में लोगों की इच्छा ही सबसे महत्वपूर्ण होती है.
पद्म भूषण से सम्मानित पूर्व पुलिस अधिकारी जूलियो रिबेरो ने भाषा से कहा कि नैतिकता के दृष्टिकोण से वह ऐसा फैसला कभी नहीं लेते जैसा केंद्र सरकार ने लिया है. एक पुलिसकर्मी के तौर पर यदि आपको यह सुनिश्चित करना है कि कोई दिक्कत पैदा न हो, तो यह बहुत चतुराई से किया गया. पुलिस के नजरिए से मैं इसे पूरे नंबर दूंगा, लेकिन नैतिकता के आधार से मैं ऐसा नहीं करूंगा. कहा कि लोगों को शामिल किया जाना चाहिए.
इसे भी पढ़ें- विपक्षी दलों ने श्रीनगर DM पर गलत तरीके से रोकने का आरोप लगाया
वाजपेयी ने जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनने का अनुरोध किया था
केंद्र ने पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को निरस्त कर उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था. जूलियो रिबेरो ने कहा, लोगों को अपने विश्वास में लेना सबसे महत्वपूर्ण बात है और सरकार को ऐसा करना ही होगा, अन्यथा आपको समस्या होगी.
लोगों को अपने पक्ष में करना ही मामले का मूल आधार है. रिबेरो ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनने का अनुरोध किया था और जब उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया तो उन्होंने फारूक अब्दुल्ला को उन्हें राजी करने की जिम्मेदारी सौंपी.
वाजपेयी को यह पता चला था कि वह लोगों को विश्वास में लेकर किस प्रकार पंजाब में उग्रवाद से निपटे और वह कश्मीर में भी ऐसा ही करना चाहते थे. रिबेरो ने कहा, ‘मैंने कहा कि राज्यपाल के तौर पर मैं ऐसा नहीं कर सकता. मैं पुलिस महानिदेशक या राज्यपाल के सलाहकार के तौर पर ऐसा कर सकता हूं, लेकिन राज्यपाल के तौर पर मैं ऐसा नहीं कर सकता. उल्लेखनीय है कि कुछ मीडिया संस्थानों खासकर विदेशी स्वामित्व वाले संस्थानों ने कश्मीर घाटी में हिंसा में कुछ लोगों के घायल होने की खबर दी है.
इसे भी पढ़ें- टॉप सात कंपनियों को बाजार पूंजीकरण में 86,880 करोड़ का नुकसान




