Uncategorized

रांची : हर रोज बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम से लोग परेशान, कह रहे अब तो पॉकेट भी दे रही जवाब (देखें वीडियो)

Ranchi : पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लगी हुई है. मोहन लाल सिंह पहले अपनी बाइक में सौ रूपये की पट्रोल भरवाते थे और तीन दिन ऑफिस आते-जाते थे, अब वही 100 रुपये का पेट्रोल दो दिन भी नहीं चल पाता है. पेट्रोल भरवाने का महीने का बजट बढ़ गया है. ट्रांसपोर्ट गुड्स एंड सर्विस के सुनील सिंह का कहना है कि लगातार डीजल के दामों में बेतहाशा वद्धि के कारण हमारा कारोबार चौपट होने की कगार पर है. हर रोज 50 पैसा एक रूपया बढ़ाकर सरकार ने पब्लिक को बेवकूफ बनाया है. हम कहीं कोई कॉन्‍ट्रैक्‍ट लेते हैं तो मौजूदा दर पर लेते हैं और वह कॉट्रैक्‍ट लंबे समय तक चलता है.

Subhash Shekar, Ranchi : पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लगी हुई है. मोहन लाल सिंह पहले अपनी बाइक में सौ रूपये की पट्रोल भरवाते थे और तीन दिन ऑफिस आते-जाते थे, अब वही 100 रुपये का पेट्रोल दो दिन भी नहीं चल पाता है. पेट्रोल भरवाने का महीने का बजट बढ़ गया है. ट्रांसपोर्ट गुड्स एंड सर्विस के सुनील सिंह का कहना है कि लगातार डीजल के दामों में बेतहाशा वद्धि के कारण हमारा कारोबार चौपट होने की कगार पर है. हर रोज 50 पैसा एक रूपया बढ़ाकर सरकार ने पब्लिक को बेवकूफ बनाया है. हम कहीं कोई कॉन्‍ट्रैक्‍ट लेते हैं तो मौजूदा दर पर लेते हैं और वह कॉट्रैक्‍ट लंबे समय तक चलता है. हर दिन डीजल की कीमत बढ़ने से हमें बाद में घाटा उठाना पड़ रहा है. हम अपने क्‍लाइंट से कुछ कह भी नहीं पाते हैं. इसके लिए हम आंदोलन करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं.

इसे भी पढ़ें – मदरसों और संस्कृत पाठशालाओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की जरूरत: योगी

क्या कह रहे हैं लोग 

इसी तरह जय सिंह का कहना है कि पेट्रोल का दाम हर रोज बढ़ रहे हैं, जिससे आये दिन समस्‍यायें बढ़ती जा रही हैं. सवाल यह है कि इंटरनेट पर यह दिखता है कि पेट्रोल की कीमत असल में 37 रुपये पड़ती है और उस पेट्रोल को हम 72 रुपये से अधिक में खरीद रहे हैं. यह दर कम होनी चाहिए. इसके लिए सरकार को कोशिश करनी चाहिए.

चार्टर्ड एकाउंटेंड आरके कौशल का कहना है कि पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ रहे हैं और  हमें ज्‍यादा कीमत चुकानी पड़ती हैं. इससे हमें नुकसान होता है. लेकिन सरकार चाहे किसी की हो कांग्रेस हो या भाजपा इस पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है. यह इंटरनेशनल प्राइस है और यह कंट्रोल होता है ओपेक से. इंटरनेशलन मार्केट में प्राइस लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए यहां पर भी इसका असर पड़ेगा.

वहीं आसिफ अहमद कहते हैं कि जिस तरह सरकार ने सभी वस्‍तुओं पर जीएसटी लगाई है, उसी तरह से पेट्रोल और डीजल पर से सभी तरह के करों को हटाकर एक टैक्‍स जीएसटी लगा दे तो पूरे देश में एक ही कीमत हो जायेगी और रेट भी बहुत कम हो जायेगा. इंडिया भूटान को पेट्रोल बेचता है और वहां इसकी कीमत यहां से सस्‍ती है. पेट्रोल डीजल का जब दाम बढ़ता है तो सभी वस्‍तुओं के दाम बढ़ जाते हैं.

गजेंद्र बताते हैं कि पेट्रोल डीजल के दाम जब-जब बढ़ते हैं तो ट्रांसपोर्टिंग महंगा होने जरूरत की सभी चीजें भी महंगी हो जाती है.

इसे भी पढ़ें – पब्लिक प्लेस में शराब पीना पड़ेगा महंगा, सख्त नियमावली को सीएम की मिली मंजूरी, जानें क्या होंगे नये नियम

पेट्रोल की तुलना में डीजल तेजी से हो रही है महंगी

वैसे तो हर दिन पेट्रोल डीजल के दाम घटते और बढ़ते हैं. इस उतार-चढ़ाव में पिछले एक साल का आंकड़ा देखें तो जनवरी 2017 के शुरूआत में पेट्रोल की कीमत 68.56 रूपये थी. जो एक साल बाद जनवरी 2018 के शुरूआत में 71.33 रुपये हो गई. पेट्रोल एक साल में करीब तीन रूपये मंहगी हो गई. उसी तरह डीजल की कीमत जनवरी 2017 में 59.05 रूपये थी. जो जनवरी 2018 में 63.13 रूपये हो गई. साल भर में डीजल 4 रूपये महंगी हो गई.

इसे भी पढ़ें – जहां बकरियों के भाव बिकते हैं बच्चे-बच्चियां

LAST PRICE CHANGED

PETROL PRICE – RS. PER LITRE

DIESEL PRICE – RS. PER LITRE

01-Jan-18

₹ 71.33

₹ 63.13

01-Dec-17

₹ 70.74

₹ 61.77

01-Nov-17

₹ 70.68

₹ 61.07

01-Oct-17

₹ 71.95

₹ 62.31

01-Sep-17

₹ 70.77

₹ 60.44

01-Aug-17

₹ 67.74

₹ 58.82

01-Jul-17

₹ 65.92

₹ 56.58

01-Jun-17

₹ 69.17

₹ 59.52

01-May-17

₹ 69.97

₹ 60.87

01-Apr-17

₹ 68.56

₹ 59.05

02-Jan-17

₹ 68.56

₹ 59.05

 

झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रेसीडेंट रंजीत गड़ोदिया का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत तो कम होना चाहिये. हमें ये समझना चाहिए कि सरकार को यहां से मोटा रेवेन्‍यू मिलता है और इसका इस्‍तेमाल डेवलपमेंट वर्क में होता है. अगर पेट्रोल डीजल में जीएसटी लगा देगी तो उससे जो राजस्‍व का नुकसान होगा, उसकी भरपाई कैसे होगा. इसका सीधा असर इंडस्‍ट्री पर भी पड़ेगा.

पेट्रोल डीजल पर जीएसटी से सरकार को कितना नुकसान

पेट्रोलियम उत्पादों से सरकार को वित्तीय वर्ष 2016-17 में 2.67 लाख करोड़ रुपये की आय हुई है, जबकि वर्ष 2012-13 में राजस्व की प्राप्ति 98,602 करोड़ रुपये ही थी. एक लीटर पेट्रोल तैयार होता है केवल 26.65 रुपये में,  लेकिन तेल कंपनियों का मुनाफा,  एक्साइज ड्यूटी,  वैट,  डीलर्स कमीशन लगभग 41 रुपये जोड़कर 68.38 रुपये में और एक लीटर डीजल करीब 29 रुपये तैयार होता हैं. इसमें तेल कंपनियों का मुनाफा,  एक्साइज ड्यूटी,  वैट,  डीलर्स कमीशन लगभग 27 रुपये जुड़ने के बाद प्रति लीटर 56.90 रुपये में उपभोक्ताओं को डीजल मिलता है. यानी प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल की कीमत पर केंद्र  और राज्य सरकार 120 फीसदी टैक्स वसूलती है.

इसे भी पढ़ें – गिरिडीह : क्या सरकार की खराब व्यवस्था ने ले ली बुधनी की जान, विपक्षी नेताओं ने साधा निशाना

अब ऐसे में केंद्र और राज्यों के बीच पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने पर बात बन गई और पेट्रोल पर 28 फीसदी जीएसटी लगाया गया, तो पेट्रोल आपको केवल 44-45 रुपये प्रति लीटर और डीजल केवल 42 से 43 रुपये प्रति लीटर में मिलेगा. यानी पेट्रोल की कीमत में करीब 26 रुपये और डीजल की कीमत में लगभग 14 रुपये की कमी आएगी.पर बड़ा सवाल जीएसटी के दायरे में लाने के बाद सरकार को राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई कैसे होगी. पिछले दिनों केंद्र सरकार ने पेट्रोल की कीमत में लगभग 2 रुपये 50 पैसे और डीजल की कीमत में 2 रुपये 25 पैसे की इक्साइज ड्यूटी कम की थी, जिसके बाद सरकार केंद्र सरकार को 26 हजार करोड़ रुपये का सालाना रेवेन्यू का नुकसान होने का अनुमान है.

इसी तरह अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा तो केवल केंद्र सरकार 2 लाख करोड़ का नुकसान होगा. राज्य सरकारों को जो नुकसान होगा वह अलग है. जब देश की अर्थव्यवस्था हर रोज हिचकोले खा रही हो तो ऐसे में केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इतना बड़ा रेवेन्यू का नुकसान कैसे उठा पाएंगी.

 

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button