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JMM का आरोप- रेल सेवाओं को प्राइवेट हाथों में देने की तैयारी में केंद्र सरकार, संघीय ढांचे पर भी कर रही चोट

सुप्रियो भट्टाचार्य ने पूर्व सीएम रघुवर दास को सुनायी खरी खोटी

Ranchi : झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने केंद्र सरकार पर संघीय ढांचे को चोट पहुंचाने का आरोप लगाया है. पार्टी प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने मंगलवार को मीडिया से कहा कि आर्थिक, संवैधानिक हितों के मामले में केंद्र सरकार को राज्यों के साथ सहयोग करना चाहिये. संसद का सम्मान सर्वोपरि है तो राज्य विधानसभाओं की आकांक्षाओं का भी सम्मान जरूरी है.

किया दावा, भारत बंद रहा सफल

सुप्रियो के अनुसार राज्य में किसान हितों के लिये भारत बंद कार्यक्रम सफल रहा. किसान, व्यापारी, बैंकर्स, महिलाओं, युवाओं औऱ दूसरे लोगों ने आगे बढ़कर अपना आक्रोश व्यक्त किया. केंद्र सरकार किसानों की आवाज सुनने की बजाये अडानी औऱ अंबानी को सुन रही. कोरोना काल में जब सारी सेवाओं को खोला जा रहा है तो रेलवे को बंद रखना एक साजिश है. सरकार ने शीतकालीन सत्र बुलाने की बजाये सीधे बजट सत्र बुलाकर रेलवे को प्राइवेट हाथों में देने की तैयारी कर ली है.

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रघुवर हैं रिजेक्ट, झूठ का बाजा रहे हैं बाजा

झामुमो के अनुसार पूर्व सीएम रघुवर दास को जनता ने खारिज कर दिया है, पर कृषि कानून पर वे अधूरी जानकारी लोगों को दे रहे हैं. झूठ का राजा बाजा बजा रहा है. ICAR के अनुसार 12 प्रतिशत तक नमी वाली फसलों की खरीद संभव है. रघुवर सरकार में जमशेदपुर में धान की हजारों बोरियां फेंकी हुई मिली थीं. इसका कारण नमी के कारण धान का सड़ना था. यूपी-पंजाब में झारखंड से एक महीने पहले धान कटाई हुई थी. झारखंड में अब भी धान काटा जा रहा है या खलिहानों तक पहुंचा ही है. राज्य सरकार देश में सबसे उंचे रेट पर 15 फरवरी तक धान खरीदेगी पर यूपी, बिहार अब भी खरीदारी नहीं कर रहे. यूपी में अप्रैल में मक्का हर साल खरीदा जाता है. पर योगी सरकार नहीं खरीद रही. 1854 करोड़ रुपये गन्ना उत्पादकों के 2 साल से बाकी हैं. बिहार में 2005 से मंडियां बंद हैं. किसान 600-700 रुपये में धान बेचने को विवश है. पर भाजपाईयों को लोगों के सामने भ्रम फैलाने से फुर्सत नहीं.

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प्राइवेट हाथों में दिये जा रहे हैं वेयरहाउस

हरियाणा के रोहतक, सोनीपत, यूपी के मेरठ, महाराष्ट्र के कोल्हापुर में बड़े बड़े वेयरहाउस हैं. इन्हें अब पूरी तरह से अडाणी, विल्मर के हाथों दिया जा चुका है. हिमाचल प्रदेश सरकार ने तो अपने वेयरहाउसों को प्राइवेट पार्टियों के हाथों आउटसोर्स कर दिया है.

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