
Ranchi: झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों में काम कर चुके वैसे अनुबंधकर्मी जिन्होंने 18 जून 2019 तक 10 साल की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें स्थायी करने की तैयारी अंतिम रूप ले रही है.
नयी सरकार के गठन के तीन महीने के अंदर ही इसे पूरा कर लेने की तैयारी हो रही है.
कोर्ट के आदेश के हिसाब से आदेश जारी होने के चार महीने के अंदर ही संबंधित अनुबंधकर्मियों को स्थायी कर दिया जाना था. पर रघुवर दास की सरकार में यह नहीं हुआ. हालांकि इसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिये गये थे.
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कागजात की जांच के बाद अंतिम मुहर
अब नयी सरकार के गठन के बाद इस प्रक्रिया को तीन महीने के अंदर ही पूरा कर लेने की पूरी तैयारी हो चुकी है. सभी विभागों से दस साल पूरा कर चुके अनुबंधकर्मियों की लिस्ट मांगी जा चुकी है जिसपर कागजात की जांच के बाद अंतिम मुहर लगायी जायेगी.
इसे पूरा हो जाने के बाद अनुबंध में काम कर रहे लगभग 10 हजार अनुबंधकर्मियों को लाभ होगा. सभी विभागों ने अपने कर्मियों की सूची तैयार कर ली है.
झारखंड सरकार ने 13 फरवरी 2015 को सेवा नियमितीकरण नियमावली 2015 बनायी थी. इसमें व्यवस्था थी कि 10 अप्रैल 2006 तक जिन अस्थायी कर्मियों का सेवाकाल दस साल पूरा होगा, उन्हें ही स्थायी किया जायेगा.
इसका विरोध शुरू हो गया था. कहा गया कि जब झारखंड राज्य वर्ष 2000 में बना तो 1996 या उससे पूर्व रखे गये अस्थायी कर्मियों को स्थायी करने का उद्देश्य बिहार के लोगों को फायदा पहुंचाना है.
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हाइकोर्ट में दायर हुई थी याचिका
इसके बाद नरेंद्र कुमार तिवारी समेत अन्य ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की. हाइकोर्ट ने यह कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि सरकार ने सेवा नियमितीकरण की जो व्यवस्था बनायी है, वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये निर्णय के आलोक में सही है.
इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट चले गये. इसके बाद परिवहन विभाग के अस्थायी कर्मचारी नरेंद्र कुमार तिवारी समेत नौ अन्य कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी और पंचायती राज के दो अस्थायी कर्मचारियों की सिविल अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा कि झारखंड के बने दस साल नहीं हुए थे तो वो फैसला कैसे लागू होगा.
इसके बाद झारखंड सरकार द्वारा 13 फरवरी 2015 में लागू की गयी सेवा नियमितीकरण नियमावली 2015 को भी निरस्त कर दिया और जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की डबल बेंच ने फैसला देते हुए कहा था कि सभी को चार माह में स्थायी करें.
कोर्ट के आदेश आने के बाद कैबिनेट की भी स्वीकृति दी गयी थी.
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