
Ranchi : राज्य में कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते फिर से स्कूल खोले जा सकते हैं. 22 महीनों से स्कूलों में लगे ताले के कारण ना सिर्फ स्कूलों के सामने चैलेंज खड़ा हो रहा है बल्कि स्टूडेंट्स को भी कई परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है. झारखंड प्रदेश पासवा के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूलों को खोले जाने के मसले पर आज प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे के नेतृत्व में शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो और वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव से आग्रह किया. उनसे राज्य में नर्सरी से बारहवीं कक्षा तक स्कूल खोलने की मांग की. साथ ही पूर्व सीएम रघुवर दास द्वारा 2019 में आरटीआई कानून में किये गये संशोधन को भी निरस्त करने की मांग की.
इसे भी पढ़ें : दो साल बाद पुलिस के हत्थे चढ़ा डॉन चाचा, भेजा गया जेल
आलोक दूबे ने कहा कि स्कूलों में लॉकडाउन के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से प्रभावित हो रही. 47 हजार से अधिक निजी विद्यालयों में काम करने वाले शिक्षकों, कर्मचारियों की स्थिति भी अत्यंत दयनीय हो गयी है. कई स्कूल तो बंद ही हो चुके हैं. ऐसे में बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अब स्कूल को खोला जाना चाहिये. भले ही उसका मैकेनिज्म कुछ भी हो. जगरनाथ महतो ने इशारा दिया कि अगले माह से स्कूल खोले जा सकते हैं.
जल्द लेंगे फैसला : मंत्री
जगरनाथ महतो ने कहा कि झारखंड के लाखों बच्चे हमारे हैं. अब कोई किन्तु, परन्तु और तकनीकी कारणों की कोई जरुरत नहीं है. आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य विभाग एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ जल्द ही स्कूलों को खोले जाने के संबंध में फैसला लिया जायेगा. आरटीई कानून संशोधन को निरस्त करने के मसले पर सभी सगठनों को बुलाकर और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठकर निर्णय लिया जायेगा.
बगैर वैक्सीनेशन के स्कूल खोलना लाभकारी नहीं : एसोसिएशन
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने स्कूल खोले जाने के मसले पर कहा है कि बच्चों का वैक्सीनेशन होने के उपरांत ही स्कूल खुले. यह ज्यादा बेहतर होगा. बावजूद इसके अगर कोविड-19 गाइडलाइन का पालन करते हुए स्कूल खोला भी जाता है, तो अभिभावक बच्चों को भेजने के बारे में सोचेंगे. शिक्षा मंत्री वैसे दलाल लोगों को बैठाकर सुझाव लेते हैं जिन्हें बच्चों के भविष्य से कहीं लेना देना नहीं. उन्हें सर्फ दलाली करनी है. मंत्री को वैसे दलालों से बचना चाहिये. पिछले लगभग 2 साल से कोविड-19 के कारण जब रोज दर्जनों लोग मर रहे थे, उस समय भी ये दलाल लोग स्कूल खुलवाने पर आमादा थे. आखिर वे दलाल क्यों परेशान हैं. हर अभिभावक को इसके बारे में सोचने की जरूरत है.
इसे भी पढ़ें : नालंदा में पत्रकार को मुखबिरी करने के शक में अपराधी ने मारी थी गोली, गिरफ्तार




