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बकोरिया कांड की जांच करेगी सीबीआइ, सीआइडी की जांच सही दिशा में नहीं : हाइकोर्ट

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Ranchi: पलामू जिले के सतबरवा के बकोरिया गांव में वर्ष 2015 में नक्सली मुठभेड़ में 12 लोगों के मारे जाने को लेकर हाइकोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुना दिया. इससे पहले हाइकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिय था. हाइकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने कहा कि मामले को लेकर सीआइडी की जांच सही दिशा में नहीं जा रही है. इससे लोगों का जांच एजेंसियों से भरोसा उठ रहा है. इसलिए बकोरिया फर्जी एनकाउंटर मामले की जांच अब सीबीआइ करेगी.

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क्या है पूरा मामला

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पुलिस के अनुसार आठ जून 2015 की रात पुलिस सतबरवा प्रखंड के बकोरिया गांव के पास सर्च अभियान चला रही थी. इस अभियान के दौरान नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग करनी शुरू कर दी थी. नक्सलियों की फायरिंग पर पुलिस की जवाबी फायरिंग में 12 नक्सली मारे गये थे. मुठभेड़ करीब तीन घंटे तक चली थी. पुलिस ने घटनास्थल से एक वाहन, 8 रायफल, 250 कारतूस सहित कई सामान जब्त किये थे.

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मानवाधिकार आयोग में हुई थी शिकायत

इससे पहले पीड़ित पक्ष ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में मामले की शिकायत की थी. आयोग की एक टीम ने झारखंड आकर मामले की जांच की थी. तभी यह बात चर्चा में थी कि एक एसपी रैंक के अफसर का रिश्तेदार भी जांच टीम में हैं. जांच टीम के साथ उस अफसर को भी लगाया गया था. बाद में उस अफसर को जिला में एसपी के पद पर पोस्टिंग दे दी गयी. आयोग ने अधिवक्ता अशोक कुमार को जो पत्र लिखा है, उससे यह पता चलता है कि अधिवक्ता अशोक कुमार ने जो तथ्य आयोग को भेजे हैं, वह आयोग को पहले कभी मिला ही नहीं. जबकि अधिवक्ता ने घटनास्थल से जुड़ी वही तस्वीरें व तथ्य आयोग को भेजे हैं, जो आयोग की टीम के रांची दौरे के वक्त उपलब्ध कराये गये थे. लेकिन अब आयोग यह पूछ रहा है कि उसके सामने इससे पहले तथ्यों की जानकारी क्यों नहीं दी गई.

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एमवी राव का हो गया था तबादला

एमवी राव की पोस्टिंग एडीजी सीआईडी के पद पर 13 नवंबर को किया गया था. हाईकोर्ट के निर्देश पर उन्होंने उस कथित पुलिस मुठभेड़ (बकोरिया कांड) की घटना की जांच तेज कर दी थी, जिसमें पुलिस विभाग के कनीय से लेकर कई वरीय अधिकारी संदेह के घेरे में थे. जांच में तेजी आने के कारण पुलिस विभाग के सीनियर अफसरों में हड़कंप मचा हुआ था. वैसी ताकतें एमवी राव का तबादला कराने के लिए हर स्तर पर कोशिश कर रही थी.

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घटना के तुरंत बाद भी बदल दिए गए थे एडीजी रेजी डुंगडुंग व डीआइजी हेमंत टोप्पो

इससे पहले भी आठ जून 2015 की रात पलामू के सतबरवा में हुए कथित मुठभेड़ के बाद कई अफसरों के तबादले कर दिए गए थे. सबको पता था कि मुठभेड़ के मामलों की जांच सीआईडी करती है. तब एडीजी रेजी डुंगडुंग सीआईडी के एडीजी थे. सरकार ने उनका तबादला कर दिया था.ताकि मामले की जांच गंभीरता से ना हो. उनके बाद सीआईडी एडीजी के पद पर पदस्थापित होने वाले दो अधिकारियों अजय भटनागर और अजय कुमार सिंह के कार्यकाल में मामले की जांच सुस्त तरीके से हुई. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इसपर टिप्पणी की थी. रांची जोन के आइजी सुमन गुप्ता का भी तबादला कर दिया था. क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर तब के पलामू सदर थाना के प्रभारी हरीश पाठक से मोबाइल पर बात की थी. हरीश पाठक को बाद में एक पुराने मामले में निलंबित कर दिया गया था. वह इस मामले में महत्वपूर्ण गवाह हैं. इसी तरह पलामू के तत्कालीन डीआइजी हेमंट टोप्पो का भी तबादला तुरंत कर दिया गया था.

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