
रामगढ़ : अंतरराष्ट्रीय उर्दू दिवस और यौमे-इक़बाल के अवसर पर अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिंद) रामगढ़ इकाई के तत्वावधान में जश्न-ए-उर्दू का भव्य आयोजन पैराडाइज पब्लिक स्कूल, हेहल, अमवा टांड़ में किया गया. इस अवसर पर भाषा, साहित्य, संस्कृति और कला की खूबसूरत झलक ने पूरे माहौल को उर्दू की खुशबू से महका दिया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. अशरफ़ अली और डॉ. नूर आलम आज़मी ने किया.
अध्यक्ष मंडल में डॉ. गजाधर महतो प्रभाकर, एम. ज़ेड. ख़ान, श्री सरोज झा झारखंडी, श्रीमती विना कुमारी, डॉ. फैज़ अहमद फैज़, श्री स़ौलत फ़हद, श्री ज़ाकिर हुसैन (पूर्व मुखिया), और हाफ़िज़ मोहम्मद मज़हर शामिल थे. कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. मोहम्मद कलामुद्दीन की हम्द से हुई, जिसके बाद स्वागत गीत और उद्घाटन संबोधन प्रस्तुत किए गए. पहले सत्र में विभिन्न कवियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने ग़ज़ल, नज़्म, भाषण और उर्दू तराने के माध्यम से उर्दू भाषा के प्रचार-प्रसार का संदेश दिया. दूसरे सत्र में मुशायरा आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय और राज्य स्तरीय कवियों ने अपनी रचनाएँ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी.
कार्यक्रम की संयोजक एवं झारखंड राज्य प्रकाशन सचिव डॉ. अशरफ़ अली ने अपने संबोधन में कहा, “उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। इसमें दिल और दुनिया दोनों की झलक दिखाई देती है. उर्दू के शब्द न केवल दिमाग़ और दिल को महका देते हैं बल्कि यह हमारी संस्कृति के रंग-बिरंगे ख़ज़ाने को भी निखारते हैं.
उर्दू गैलरी और उसका सेल्फ़ी पॉइंट इस उत्सव का मुख्य आकर्षण रहा. महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुज़ुर्गों ने बड़े उत्साह से वहाँ तस्वीरें और वीडियो बनाकर उर्दू के प्रति अपनी मोहब्बत का इज़हार किया. कई प्रतिभागियों ने उन पलों को सोशल मीडिया पर रील और स्टेटस के रूप में साझा किया, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा. कार्यक्रम में किताबी कोना, ख़ताती प्रदर्शनी, सांस्कृतिक पोस्टर और भाषायी चार्ट्स ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा.




