
- वृद्धा पेंशन, छात्रवृत्ति, मनरेगा मजदूरी सहित अन्य बीमा योजनाओं का लाभ लेना हुआ आसान
- घर-घर बैंकिंग सेवाएं पहुँचाती बैंकिंग कोरेस्पोंडेंट सखी
Ranchi : दिव्यांग प्रफुलित कंडुलना आकांक्षी जिला खूंटी के रानियां प्रखंड के जयपुर गांव में रहती हैं. कभी सरकारी पेंशन का लाभ लेने के लिए इन्हें कई तरह की परेशानियां उठानी पड़ती थी. पर अब इन्हें सरकारी पेंशन घर पहुंचा कर दिया जा रहा है. ऐसा संभव हो पाया राज्य सरकार द्वारा नियुक्त बैंकिंग सखी कोरोस्पोंडेंट या बीसी सखी की वजह से. 33 सौ सखी मंडल की बहनें आज अपने गांव-पंचायत में बैंकिंग सखी कॉरेस्पॉन्डेंट के रुप में डोरस्टेप बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही है.
सरकार की मुहिम ला रही रंग
राज्य के ग्रामीण इलाकों में बैकिंग सुविधाओं को हर घर तक पहुंचाने की मुहिम रंग ला रही है. बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी(बीसी सखी) अपने गांव- पंचायत में बैंकिंग सुविधाओं को सुलभ बनाने की जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है. ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के द्वारा विभिन्न बैंकों के साथ साझेदारी में बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी को राज्य के ग्रामीण इलाकों में पदस्थापित किया गया है.राज्य सरकार द्वारा सखी मंडल की बहनों को चयनित एवं प्रशिक्षित किया जा रहा है. इस पहल से एक ओर सुदूर ग्रामीण इलाकों में जहां बैंक की पहुंच नहीं हैं,वहां के लोगों को अब बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी के माध्यम से बैंकिग सुविधाएं मिलने लगी है. वहीं, सखी मंडल की बहनों को भी बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट सखी के रुप में एक नया रोजगार मिला है. इससे उनकी छह से 12 हजार रुपये तक की मासिक आमदनी हो रही है.
बीसी सखी के जरिए घर-घर पहुंचती बैंकिंग सेवाएं
रांची के ओरमांझी प्रखंड की सोनी देवी सखी मंडल की एक सक्रिय सदस्य है और वो करीब दो साल से बीसी सखी के रुप में गांवों को बैंकिग सेवाएं दे रही है. ग्राहकों के बढ़ते तादाद को देखते हुए हाल ही में सोनी देवी ने अपना बैंकिंग सेवा केंद्र भी खोला है. सोनी देवी अब रोजाना 40-50 लोगों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ती है. सकारात्मक ऊर्जा से लबरेज सोनी देवी कहती हैं कि वे बीसी सखी के रुप में, हर महीने करीब 25 लाख रुपये का लेन-देन करती हैं. इससे, एक ओर उन्हें करीब आठ हजार की आमदनी हो जाती है. वहीं उन्हें इस बात की खुशी है कि बुजर्गों को वे उनके घर जाकर पेंशन उपलब्ध करा रही हैं.
ओरमांझी स्थित गगारी गांव की 80 वर्षीय बिपति देवी कहती हैं “मैं अब चलने-फिरने में सक्षम नहीं हूं. लेकिन घर बैठे ही बीसी सखी के माध्यम से बैंकिंग सेवायें आसानी से प्राप्त हो जाती है. वृद्धा पेंशन समय-समय पर बीसी सखी आकर उपलब्ध करा देती है. वहीं इससे पहले निकासी के लिए बैंक जाना पड़ता था तो काफी परेशानी होती थी.”
लगभग एक अरब का लेनदेन हो रहा सुनिश्चित
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सखी मंडल की दीदियों को प्रशिक्षित कर बीसी सखी के रुप में स्वरोजगार व रोजगार से जोड़ा जा रहा है. सखी मंडल की बहनें अपने गांव-पंचायत में बैंकिंग सखी कॉरेस्पॉन्डेंट के रुप में डोरस्टेप बैंकिंग सुविधाएं पहुंचा रही है. इनके द्वारा मनरेगा मजदूर, पेंशन, बैंक खाता, छात्रवृति, सरकारी योजनाओं की राशि का भुगतान एवं समूहों के लेन-देन के कार्य किया जा रहा है. बैंक वाली दीदी अब हर महीने राज्य के गांव-पंचायत में रहने वाले करीब 2.5 लाख लोगों तक बैंकिग सुविधाएं पहुंचा रही है. इससे तकरीबन 90 से 100 करोड़ रुपये का लेन-देन सुनिश्चित हो रहा है. बीसी सखी अपने लैपटॉप एवं पीओएस मशीन के जरिए गांव तक बैंक में मिलने वाली हर सुविधा से लोगों को आच्छादित कर रहीं हैं.




