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सेंट्रल विस्टा, बुलेट ट्रेन परियोजना रोकने की बजाये सैनिकों, कर्मचारियों के DA में कटौती अमानवीय- राहुल गांधी

New Delhi: कोरोना वायरस के कारण देश की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है. आर्थिक मोर्चे पर सरकार को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और उनकी पार्टी लगातार घेर रही है. एकबार फिर राहुल गांधी ने इस लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा.

शुक्रवार को राहुल गांधी ने केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी पर लगी रोक का मसला उठाया और केंद्र सरकार के इस फैसले को अमानवीय और असंवेदनशील बताया.

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केंद्रीय कर्मचारियों का डीए काटना अमानवीय-राहुल

आजतक की खबर का ट्वीट करते हुए, राहुल गांधी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “लाखों करोड़ की बुलेट ट्रेन परियोजना और केंद्रीय विस्टा सौंदर्यीकरण परियोजना को निलंबित करने की बजाय कोरोना से जूझ कर जनता की सेवा कर रहे केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशन भोगियों और देश के जवानों का महंगाई भत्ता(DA)काटना सरकार का असंवेदनशील तथा अमानवीय निर्णय है”

केंद्र का फैसला, जले पर नमक छिड़कने जैसा- कांग्रेस

कांग्रेस ने केंद्रीय कर्मचारियों एवं पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में वृद्धि नहीं करने के सरकार फैसले की आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार को सैनिकों और कर्मचारियों के भत्ते काटने के बजाय ‘सेंट्रल विस्टा’, बुलेट ट्रेन परियोजनाओं और फिजूल खर्च पर रोक लगानी चाहिए.

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के सुझाव को मानते हुए केंद्र सरकार अपने फिजूल खर्चे पर रोक लगाकर ढाई लाख करोड़ रुपये बचा सकती है जिसका इस्तेमाल संकट के इस समय में लोगों की मदद के लिए हो सकता है.

उन्होंने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ‘‘कोरोना वायरस महामारी के संकट से पैदा हुई आर्थिक मंदी और आय की तंगी पर मरहम लगाने के बजाय मोदी सरकार जले पर नमक छिड़कने में लगी है.’’

सुरजेवाला ने सवाल किया, ‘‘ उसने हाल ही में 30,42,000 करोड़ रुपये का बजट पारित किया. बजट में आय व खर्चे का लेखा-जोखा स्पष्ट तौर से दिया जाता है. फिर बजट पेश करने के 30 दिन के अंदर ही मोदी सरकार सेना के जवानों, सरकारी कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते पर कैंची चलाकर क्या साबित कर रही है?’’

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उन्होंने दावा किया कि महंगाई भत्ते में ‘अन्यायपूर्ण कटौती’ से लगभग 1.13 लाख सैनिकों, कर्मचारियों और पेंशनरों की तनख्वाह से सालाना 37,530 करोड़ रुपये की कटौती होगी.

सुरजेवाला ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि मोदी सरकार द्वारा महंगाई भत्ते की कटौती कर जख्म देने की इस कवायद ने देश की रक्षा करने वाले तीनों सेनाओं के हमारे सैनिकों तक को नहीं बख्शा. इस कटौती के जरिये सेनाओं के 15 लाख सैनिकों और लगभग 26 लाख सैन्य पेंशनभोगियों के 11,000 करोड़ रुपये काट लिये जाएंगे.

बुलेट ट्रेन परियोजनाओं और फिजूल खर्च पर लगे रोक

सुरजेवाला ने कहा, ‘ कोरोना वायरस महामारी के बावजूद सरकार ने आज तक 20,000 करोड़ रुपये की लागत वाली सेंट्रल विस्टा परियोजना खारिज नहीं की. न ही उसने 1,10,000 करोड़ रुपये की लागत वाली बुलेट ट्रेन परियोजना बंद की. उसने फिजूल के सरकारी खर्चों में कटौती की घोषणा भी नहीं की, जिससे 2,50,000 करोड़ रुपये सालाना बच सकते हैं.’’

सुरजेवाला ने सरकार से आग्रह किया कि वह इन परियोजनाओं पर रोक लगाए और ‘फिजूल खर्चे’ बंद करे. बता दें कि सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत संसद और मध्य दिल्ली की कई सरकारी परिसंपत्तियों के पुन:निर्माण का प्रस्ताव है.

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