
New Delhi: बेरोजगारी कम करने के मोर्चे पर मोदी सरकार विफल नजर आती है. एक ताजा रिपोर्ट से ये बात सामने आयी है कि आनेवाले चार सालों में देश में नौकरियों का संकट गहरा सकता है. और इसमें 37 फीसदी तक गिरावट आ सकती है.
नौकरियों में 37 फीसदी तक कमी संभव
रिपोर्ट के अनुसार, देश में नई नौकरियों कम पैदा होंगी और इसकी वजह ऑटोमेशन यानी मशीनीकरण बताया जा रहा है. इकॉनोमिक टाइम्स ने TeamLease Service के हवाले से एक खबर प्रकाशित की है.
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जिसमें दावा किया गया है कि ई-कॉमर्स, बैंकिंग, फाइनेशियल सर्विस, इंश्योरेंस और बीपीओ-आईटी सेक्टर की नौकरियों में आनेवाले चार सालों में भारी कमी आ सकती है.
साल 2019-23 के बीच इन सेक्टर्स में 37% की गिरावट आ सकती है. यह गिरावट 2018-22 की अनुमानित आंकड़ों से भी नीचे है.
ऑटोमेशन को ध्यान में रख पॉलिसी बनाने की जरुरत
इनके अलावा मार्केटिंग, एडवरटाइजिंग, कृषि, एग्रोकेमिकल, टेलीकम्यूनिकेशंस, बीपीओ, आईटी, मीडिया, एंटरटेनमेंट, हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल जैसे अहम क्षेत्रों में भी रोजगार की दर में गिरावट आ सकती है.
टीम लीज सिर्विस की वीपी ऋतुपर्णा चक्रवर्ती का कहना है कि ‘अगले चार सालों में अधिकतर सेक्टर्स में लंबे समय में देखें तो नौकरियों का संकट गहरा सकता है. और ये स्थिति तब तक रहेगी, जब तक हमारे नीति ऑटोमेशन को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी नहीं बनती हैं.’
हालांकि, शॉर्ट टर्म के लिए देखें तो अप्रैल-सितंबर के बीच जॉब रेट में इजाफा हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में जो कर्मचारी आधुनिक तकनीक और नई स्किल से लैस होंगे उन्हें कम स्किलफुल कर्मचारियों की तुलना में ज्यादा फायदा होगा.
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कृषि क्षेत्र होगा ज्यादा प्रभावित
रोजगार के इस संकट का सबसे ज्यादा असर एग्रीकल्चर और एग्रोकेमिकल सेक्टर पर पड़ सकता है. रिपोर्ट की मानें तो इस क्षेत्र में आने वाले सालों में 70% तक नौकरियों में गिरावट आ सकती है.
जबकि कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर में 44% नौकरियों की वृद्धि हो सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमोबाइल और अलाइड इंडस्ट्रीज में सबसे ज्यादा नौकरियों के मौके मिल सकते हैं.
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