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बर्खास्त मनरेगा कर्मियों के पक्ष में फैसला दे रहे प्रमंडलीय आयुक्त, इनके निर्णयों के खिलाफ अपील दायर किए जाने की आवश्यकता, डीसी ने लिखा पत्र

Nikhil Kumar

Ranchi/Chatra: चतरा  डीसी  अंजली यादव  ने प्रमंडलीय आयुक्त के द्वारा चयनमुक्त (बर्खास्त) मनरेगा कर्मियों के पक्ष में निर्णय दिए जाने पर सरकार को पत्र लिखकर उनके आदेश के खिलाफ अपील दायर किए जाने के लिए मार्गदर्शन मांगा है. इस संबंध में उन्होंने मनरेगा आयुक्त झारखंड राजेश्वरी बी को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने स्पष्ट कहा है कि प्राय: यह देखा जाता है कि गंभीर आरोप लगे चयनमुक्त मनरेगा कर्मी जिसमें प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी,तकनीकी सहायक (कनीय अभियंता),तकनीकी सहायक (सहायक अभियंता),लेखा सहायक,ग्राम रोजगार सेवक के पक्ष में प्रमंडलीय स्तर से आदेश निर्गत किया जाता है. ऐसे में उक्त आदेश के विरूद्ध उच्चतर स्तर पर अपील दायर किया जाना आवश्यक प्रतीत होता है. चतरा उपयुक्त ने मनरेगा आयुक्त से अनुरोध करते हुए कहा कि प्रमंडलीय स्तर से निर्गत आदेश के विरूद्ध उच्चस्तर स्तर पर अपील के लिए सक्षम प्राधिकार के संबंध में मार्गदर्शन देने को कहा है,ताकि अपील से संबंधित कार्रवाई की जा सके.

 

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में आता है चतरा जिला

बता दे की चतरा जिला उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल में आता है. उपायुक्त ने जब यह पत्र सरकार को लिखा था तब वहां प्रमंडलीय आयुक्त कमल जॉन लकड़ा थे. चतरा उपायुक्त की कार्रवाई पर इन्हीं के कार्यालय में अपील अभ्यावेदन मनरेगा कर्मी करते हैं.

 

जून 2020 में आदेश निकाल कर प्रमंडलीय आयुक्त को बनाया गया था अपलीय प्राधिकार

बता दें कि, ग्रामीण विकास विभाग ने 2020 के जून माह में ही एक आदेश जारी किया था जिसमें गंभीर आरोपों के कारण कोई मनरेगा कर्मी चयनमुक्त,बर्खास्त होता है तो वे उपायुक्त के आदेश के खिलाफ उच्चस्तर प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष अपील कर सकेंगे.

 

क्या है मामला

दरअसल, मनरेगा में चतरा जिला सहित कई जिलों में बड़ी गड़बिड़यां पकड़ मे आने के बाद जिला स्तर पर गंभीर आरोपों के आधार पर मनरेगा कर्मियों पर कार्रवाई की गयी थी. चतरा में एक दर्जन से अधिक मनरेगा कर्मियों को बर्खास्त किया गया था. जिसके बाद मनरेगा कर्मियों ने राज्य सरकार के समक्ष गुहार लगायी थी और कहा था कि उनका पक्ष सही से नहीं सुना गया. इसके बाद ग्रामीण विकास विभाग ने एक आदेश जारी कर अपलीय प्राधिकार के रूप में प्रमंडलीय आयुक्तों को नामित किया. अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद कई वैसे मनरेगा कर्मी सेवा बहाल हो गयी जिनके उपर गंभीर आरोप थे. अब चतरा डीसी ने प्रमंडलीय आयुक्तों के फैसलों के खिलाफ अपील किए जाने के लिए मार्गदर्शन मांगा है, जिसके बाद सरकार के स्तर पर इस पर विमर्श हो रहा है.

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