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पाकुड़: तीन साल से भटक रहे को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहक, मैच्योरिटी के बाद भी नहीं मिल रहा पैसा

  • अलग-अलग पत्रों में बताया गया जिला सहकारिता पदाधिकारी की ओर से बैंक में पैसे जमा ही नहीं किये गये
  • मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक को लिखा गया पत्र
  • एक हजार लोगों के करीब एक करोड़ रूपये की है कुल मैच्योरिटी

Ranchi : पाकुड़ के लैंप्स को-ऑपरेटिव बैंक में पैसे जमा करने वाले लोगों की समस्या बढ़ती जा रही है. पिछले तीन साल से जिला के को-ऑपरेटिव बैंक खाता धारकों को उनके मैच्योरिटी की राशि नहीं दी जा रही है. जिला में दो शाखा होने के बाद भी लोग अपने ही पैसों से वंचित हैं.

इस बारे में खाता धारकों ने बताया कि, जिला में लगभग एक हजार खाता धारक हैं, जो अपने पैसों कि लिए परेशान हैं. इस संबध में खाता धारकों की ओर से जिला सहकारिता पदाधिकारी, डीसी, राज्य सहकारिता सचिव से लेकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक को पत्र लिखा गया.

पाकुड़: तीन साल से भटक रहे को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहक, मैच्योरिटी के बाद भी नहीं मिल रहा पैसा
सचिव को लिखा गया पत्र

जिसमें कहा गया कि डीसी और जिला सहकारिता पदाधिकारी की मिली भगत से ही ऐसा किया जा रहा है. इसके पूर्व सहकारिता सचिव को 2019 में पत्र लिखा गया. जिसमें बताया गया था कि जिला सहकारिता पदाधिकारी कुमार गौतम की ओर से लोगों के पैसों को बैंक में जमा ही नहीं किया गया.

पाकुड़: तीन साल से भटक रहे को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहक, मैच्योरिटी के बाद भी नहीं मिल रहा पैसा
खाता धारकों द्वारा सहायक निबंधक को लिखा गया पत्र

गौरतलब है कि कुमार गौतम प्रभारी जिला सहकारिता पदाधिकारी है. आरोप है कि पदाधिकारी ने अपने खाते में ही पैसे जमा कर लिये. साल 2018 से लोग पत्र और जिला सहकारिता पदाधिकारी से वार्ता कर रहे हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है.

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एक करोड़ तक हो गयी है मैच्योरिटी राशि

पिछले दिनों सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल की ओर से मुख्यमंत्री को इस संबध में पत्र भी लिखा गया. जिसमें बताया गया कि पिछले तीन सालों से लोग अपने पैसे के लिए परेशान हैं. साल 2019 के मध्य में मैच्योरिटी राशि लगभग पचास लाख थी. ऐसे में एक हजार लोगों के वर्तमान इंटरेस्ट राशि को देखा जाये तो वे राशि अब एक करोड़ के आसपास पैसे हो गये होंगे.

पाकुड़: तीन साल से भटक रहे को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहक, मैच्योरिटी के बाद भी नहीं मिल रहा पैसा
मैच्योरिटी के पैसों के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखा गया पत्र

न्यूजविंग से बात करते हुए सुरेश ने बताया कि साल 2019 में लोगों के मैच्योरिटी राशि के बारे में आरटीआई भी किया गया. जिसमें पूछा गया कि साल 2015 से जनवरी 2019 तक खाता धारकों की संख्या और इस समय में कितने लोगों की मैच्योरिटी पूरी हुई, के अलावा इसमें कितनी राशि है. इन सबकी जानकारी मांगी गयी.

जिला जनसूचना पदाधिकारी की ओर से पांच कंडिकाओं में से किसी पर भी जानकारी नहीं होने की बात की गयी. दूसरे अपील में भी इसकी जानकारी नहीं दी गयी. गौरतलब है कि जिला को-ऑपरेटिव बैंक लैंप्स के अंतर्गत संचालित है.

पाकुड़: तीन साल से भटक रहे को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहक, मैच्योरिटी के बाद भी नहीं मिल रहा पैसा
दूसरी बार की गयी अपील से संबंधित पेपर, जिसके बाद भी जानकारी नहीं दी गयी

इसमें लोग न्यूनतम से लेकर कितनी भी राशि प्रतिदिन या महीने में जमा कर सकते हैं. जिला सहाकारिता पदाधिकारी इसके लिए जवाबदेह होते हैं.

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कई पदों पर बने रहे कुमार गौतम, कार्मिक के कार्रवाई के बाद पदभार छोड़ा

साल 2018 में वर्तमान प्रभारी जिला सहकारिता पदाधिकारी कई पदों पर प्रभार में थे. जिसमें जिला आपूर्ति पदाधिकारी, विधि शाखा, जिला गोपनीय पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी, जनसंपर्क पदाधिकारी और आर्म्स पदाधिकारी नहीं होने के बाद भी कार्यपालक दण्डाधिकारी थे.

इस वक्त पाकुड़ डीसी दिलीप झा थे. दिसंबर 2018 में सुरेश अग्रवाल की ओर से इस संबंध में कार्मिक विभाग में शिकायत की गयी. जिसके बाद अप्रैल 2019 में कार्मिक विभाग की ओर से डीसी पाकुड़ पर कार्रवाई की गयी.

पाकुड़: तीन साल से भटक रहे को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहक, मैच्योरिटी के बाद भी नहीं मिल रहा पैसा
सरकार के अवर सचिव अनिल कुमार सिंह द्वारा पाकुड़ डीसी को लिखा गया पत्र

कार्मिक विभाग की ओर से एक व्यक्ति का इतने पदों पर प्रभारी होना नियम विरूद्ध भी बताया गया. जिसके बाद वर्तमान में कुमार गौतम गोपनीय शाखा ओएसडी और जिला सहकारिता के प्रभार में है.

जिला सहकारिता पदाधिकारी कुमार गौतम ने इस मामले में कहा कि लगभग 70 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है. 2014 के पहले से ये मामला चल रहा था. ऐसे में 2015 में इस पर जांच कमेटी गठित की गयी. जिसके बाद पूर्व में कार्यरत लगभग 70 लोगों पर अब प्राथमिकी हुई है. यह पैसा गबन का मामला है.

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