
Apoorva Bhardwaj
आप सबने फ्रेंच हैकर के द्वारा आरोग्य सेतु को हैक करने की खबर तो सुन ही ली होगी कि कैसे उसने प्रधानमंत्री ऑफिस से लेकर रक्षा मंत्रालय तक के लोकेशन के डाटा को हैक करने का दावा किया है.
सरकार ने उसके सारे दावों को झुठलाते हुए स्टेटमेंट दिया है कि सबका निजी डाटा सुरक्षित है और कोई भी सेंसिटिव डाटा लीक नहीं हुआ है और जिस डाटा को हैकर लीक करने का दावा कर रहा है, वो ऑलरेडी पब्लिक डोमेन में हैं, अतः हैकर के दावे में कोई दम नहीं है.
जब से इस हैकर ने यह खुलासा किया है तब से मैं भी इस ऐप के तकनीकी पोस्टमार्टम में लगा हुआ था, जहां से हैकर ने कहानी खत्म की थी मैं वहीं से शुरू करता हूं, आरोग्य सेतु एक क्लाइंट-सर्वर ऐप है. इसलिए सरकार का यह दावा गलत है कि सारा डाटा आपके मोबाइल डिवाइस में ही सेव होता है, यह डाटा सर्वर पर भी सेव होता है, तभी आपको नोटिफिकेशन आता है कि आप सेफ है कि नहीं, जब भी किसी सॉफ्टवेयर की प्रोग्रामिंग की जाती है, तो एक API बनायी जाती है, जिसको कॉल करके वो साफ्टवेयर कोई रिक्वेस्ट जनरेट कर सकता है.
तो क्या आरोग्य ऐप की API में आपकी लोकेशन के अलावा आपका मोबाइल नंबर भी डाला गया है क्योंकि कोई भी हैकर उसको स्क्रिप्ट लगा कर उस API को पढ़ सकता है.
यह ऐप आपके दिये हुए सेल्फ असेसमेंट टेस्ट के आधार पर ही काम करती है, अर्थात आप जो जानकारी टेस्ट में दे रहे हैं वो ही ऐप सही मानती है, अगर आप ऐप को गलत जानकारी दे रहे हैं तो ऐप आपसे क्रॉस वेरिफाई नहीं करती है तो जब आप इसे लेकर अपने ऑफिस जायेंगे तो क्या गैरांटी है कि यह एप आपको सही नोटिफिकेशन भेजेगी और संक्रमण एरिया या व्यक्ति से बचाएगी.
क्या सरकार ने इस ऐप के डाटाबेस में रियल पॉजिटिव केसेस का डाटा फीड किया है, अगर ऐसा नहीं है तो इस एप की प्रमाणिकता कैसे सिद्द होगी?
फ्रेंच हैकर का दावा है कि वो पता कर सकता है कि कौन व्यक्ति किस लोकेशन पर संक्रमित है, वो ऐप के होम स्क्रीन पर longitude बदल कर यह सब आसानी कर सकता है. मतलब आपका पड़ोसी पॉजिटिव है कि नहीं है, वो आप हैकर से पता कर सकते हैं.
लेकिन मेरा सवाल इसके बाद शुरू होता है, क्या वो आपकी मेडिकल हिस्ट्री भी जान सकता है तो क्या यह डाटा भी आपने API पर डिफाल्ट कर रखा है? इसकी फायरवॉल पर बल्क कॉल कैसे हो रहे हैं?
आरोग्य सेतु एक बहुत साधारण ऐप है. लेकिन जब यह करोड़ो में डाउनलोड हो जाती है यह असाधारण हो जाती है, क्योंकि इसका डाटा तब बिग डाटा बन जाता है और डाटा विश्लेषण में काम आता है.
लेकिन जब सरकार इसे अनिवार्य कर चुकी है और ऐसा न करने पर दंड और जेल का प्रावधान भी कर चुकी है तो सरकार से पूछिए की अभी तक के डाटा विश्लेषण के आंकड़े कहां हैं.
सरकार इसे पब्लिकली क्यों नहीं कर रही है, सरकार ने इसके डेवलपमेंट के दौरान साइबर सुरक्षा पैरामीटर्स में इतनी गंभीर लापरवाही क्यों बरती है, क्या सरकार इस देश के 90 करोड़ मोबाइल यूजर की गोपनीयता का दावा कर सकती है, सरकार को जवाब तो देना होगा.
डिस्क्लेमर : ये लेखक के निजी विचार हैं.




