
Ranchi: “सर! भूखों मरने वाली स्थिति हो गई है,अब तो मानदेय दे दीजिए,डेढ़ साल हो गये….” यह मांग है झारखंड कला मंदिर में बच्चों को संगीत का प्रशिक्षण देने वाले शिक्षकों का. बकाया मानदेय को लेकर प्रशिक्षकों ने कई बार विभाग को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा बताई पर कुछ नहीं हुआ. मानदेय नहीं मिलने से प्रशिक्षकों की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हो गयी है. लॉकडाउन की वजह से कलाकारों को काम नहीं मिल रहा है, जिस वजह से आमदनी का जरिया रुक गया है. ऐसे में झारखंड कला मंदिर ही एकमात्र सहारा था. लेकिन, यहां भी अब तक मानदेय का भुगतान नहीं हो पाया है.
कला मंदिर में संगीत से जुड़े हर विधा का दिया जाता है प्रशिक्षण
झारखंड कला मंदिर में संगीत से जुड़े हर विधाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है. झारखंड की संगीत व कलाओं से बच्चों को रू-ब-रू कराने के साथ ही वाद्ययंत्र बजाने का प्रशिक्षण दिया जाता है. झारखंड कला मंदिर में बच्चों को मांदर, तबला व ढोलक से लेकर सितार, बांसुरी के अलावा ओड़िसी नृत्य, भारतनाट्यम,लोकनृत्य आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है. कला मंदिर में सारी विधाओं को मिलाकर 19 प्रशिक्षक हैं. इन सभी की पीड़ा एक जैसी ही है.




