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गिरिडीह :  सोशल डिस्टेंसिंग के पालन में कोताही, सिर्फ शहर में ही लोग रख रहे हैं नियम का ध्यान  

Giridh :  कोरोना का पहला पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद लोगों में काफी हद तक भय का माहौल दिख रहा है. मरीज मिलने के बाद से ही लोगों में इसकी चर्चा भी तेज हो गई है. बावजूद शहर में शनिवार को कुछ भीड़ नजर आई. इधर पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद गिरिडीह प्रशासन लॉकडाउन को लेकर कहीं सुस्त है तो कहीं गंभीर. शनिवार के सुबह की दोनों तस्वीरें इसे साबित करने के लिए काफी है.

ऐसे में यह कहना ही उचित होगा कि लॉकडाउन और समाजिक दूरी के नियमों का पालन कराने को लेकर एक आंख में सूरमा तो दूसरे में काजल लगाने वाली भूमिका है. शनिवार की सुबह जब सदर एसडीएम राजेश प्रजापति के नेत्तृव में सदर प्रखंड के बीडीओ गौतम भगत, अचंलाधिकारी रवीन्द्र सिन्हा, डीएसपी विनोद रवानी और नगर थाना प्रभारी आदिकांत महतो के साथ थाना के एसआई प्रदीप कुमार व राजीव सिंह नित्यदिन की तरह बाजार से भीड़ हटाने के लिए निकले, तो शहर के कई बाजारों में समाजिक दूरी के नियमों का उल्लंघन हो रहा था.

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पुलिस ने की कार्रवाई 

अधिकारियों के साथ चल रहे महिला व पुलिस जवानों ने दुकानों से खरीदारों को हटाना शुरु कर दिया. इस दौरान काली बाड़ी चौक से एक दूध विक्रेता को कुछ पल के लिए पुलिस ने हिरासत में भी लिया. वहीं नगर थाना से महज दो सौ मीटर की दूरी पर शहर के व्हीट्टी बाजार स्थित हटिया का नजारा बेहद चौकाने वाला था. हटिया में सब्जी और फल के थोक कारोबारियों की दुकानों में रिटेलर दुकानदारों की भीड़ जमा थी. भीड़ की यह तस्वीर अहले सुबह करीब छह बजे थी. लेकिन न्यूजविंग के जागरुक पाठक ने गिरिडीह के संवाददाता को हटिया के इस भीड़ की तस्वीर भेजी.

वैसे तो व्हीट्टी बाजार के इस हटिया में शहर का साप्तहिक हाट लगता है. जहां हर रविवार को शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के खरीदार जुटते हैं. लेकिन लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ना तो साप्तहिक हाट ही लग रहा है और ना ही खरीदार.

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कुछ नेता दे रहे हैं लोगों को ढील 

लॉकडाउन के दौरान नगर थाना से महज दो सौ मीटर की दूरी पर समाजिक दूरी के उल्लंघन का यह खौफनाक दृश्य करीब सप्ताह दिनों से जारी है. बावजूद स्थानीय प्रशासन शहर के हटिया में सजने वाले इन दुकानदारों और भीड़ को लेकर क्यों नहीं कार्रवाई कर रही है यह खुद में सवाल है?

वैसे हटिया में लगने वाले हर रोज की भीड़ को लेकर यह भी तथ्य सामने आया कि इन दुकानदारों व खरीदारों की भीड़ जुटाने का सारा श्रेय कुछ नेताओं को जाता है. जो सत्तारुढ़ दल के समर्थकों की सूची में शामिल हैं. अब ऐसे में समझा जा सकता है कि कोरोना को हराने वाली ऐसी तस्वीर अगर शहर के बीचोंबीच ही नजर आएगी, तो इसके संक्रमण को रोक पाना कितना संभव होगा?

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