Opinion

तैयार हो जाइये, हाथ पर सरकारी स्किन बॉडी सेंसर टैटू गुदवाने के लिये

Girish Malviya

भारत में मोदी सरकार ID2020 का एजेंडा लागू करने जा रही है. दो दिन पहले यह बात बिल्कुल साफ हो गयी है. हमारे स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने ट्वीट कर एक स्किन बॉडी सेंसर टैटू का जिक्र किया है. जो नागरिकों के हाथों की चमड़ी पर उकेरा जा सकता है. यह एक सेंसर नुमा आकृति होती है. जो देखने में सामान्य टैटू जैसी ही आकर्षक लगती है. उसकी सहायता से व्यक्ति के हेल्थ रिकॉर्ड का डेटा आसानी से प्राप्त हो सकता है. यह एक वीयरेबल सेंसर टैटू है.

डॉ हर्षवर्धन के अनुसार, इस टैटू पर बेंगलुरु में सेंटर फॉर नेनोसाइंस एंड इंजीनियरिंग (CeNSE) के डॉ. सौरभ कुमार अभी इसपर काम कर रहे हैं. इस सेंसर से त्वचा के जरिये शरीर से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारी हासिल की जा सकती है. जैसे पल्स रेट, श्वसन दर और सरफेस इलेक्ट्रोमोग्राफी आदि.

आपने बच्चों को ट्रांसफरेबल टैटू अपने शरीर पर लगाते देखा होगा. यह वैसा ही है.

यह टैटू वैसे ही काम करता है. जैसे कोई वियरेबल स्मार्ट वॉच काम करेगी. लेकिन इसके रिजल्ट को देखने के लिए हमें किसी दूसरे डिवाइस के सामने अपना हाथ आगे करना पड़ेगा. यही एक तरह का डिजिटल ID जैसा काम करेगा.

दरअसल भारत के वैज्ञानिक की बात तो ट्वीट में हमें इस भुलावे में रखने के लिए डाली जा रही है कि यह भारत द्वारा डेवलप तकनीक है. सच यह है कि इस तरह के E टैटू की टेक्नोलॉजी गूगल आज से सात साल पहले ही पेटेंट करा चुका है. वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इससे संबंधित खबर प्रकाशित किया है.

अभी सिर्फ इसे हेल्थ मॉनिटरिंग से जोड़ा जा रहा है. लेकिन इसका मकसद दूसरा है, अब भारत के स्वास्थ्य मंत्री इसे ट्वीट कर रहे हैं. इसका मतलब आप समझ लीजिए कि यह न्यू वर्ल्ड ऑर्डर का एजेंडा है और अब कोरोना काल में हेल्थ के नाम पर सरकारें इसे लागू करने जा रही हैं. इस वीयरेबल सेंसर टैटू में RFID सेंसर यूज किया जा सकता है.

आरएफआईडी टैग यानी रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन वो तकनीक है, जो मॉल्स में अक्सर इस्तेमाल की जाती हैं. इसे किसी तरह के पावर या इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती है.

जब लोग बिना बिल दिये गलती से या चोरी कर चीजें उठाकर बाहर निकलने लगते हैं,  तो गेट से बाहर निकलते वक़्त एक सेंसर बजता है. यह इसी आरएफआइडी टैग का ही कमाल है. आजकल टोल नाकों पर फ़ास्ट टैग भी आरएफआइडी टेक्निक ही यूज होती है. आप पैसे भरेंगे तभी आपकी गाड़ी टोल नाके से निकलेगी.

भारतीय रेलवे भी रेलवे के करीब 3,50,000 यात्री कोचों और मालगाड़ी के डिब्बों पर आरएफआइडी टैग लगा रही है. ताकि इनपर निगाह रखी जा सके.

स्वीडन में हजारों लोगों के हाथों में इस तरह के RFID युक्त चावल के दाने से भी छोटे सेंसर इंजेक्ट कर दिये गये हैं. जो एक तरह से उनकी डिजिटल ID का ही काम कर रहे हैं. अब इसे पूरे विश्व में टैटू के फॉर्म में लाया जा रहा है. गूगल ने यह तकनीक विकसित कर ली है.

मैं यह नहीं कह रहा कि यह कल से लागू हो जाएगा. लेकिन यह तकनीक साल दो साल में भारत जरूर आएगी. अंदरूनी स्तर पर तैयारी की जा रही है. संभव है कोरोना काल के बाद 2030 तक देश का हर युवा खुशी-खुशी ऐसे डिजिटल ID नुमा टैटू हाथों में गुदवा कर घूमे. जिसमें उसकी सारी जानकारी मेंशन हो. दरअसल यही भविष्य है.

डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.

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