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बोकारो में करीब 10 करोड़ के तेल का खेल, जांच रिपोर्ट दबा दी गयी, मंत्री ने रिकॉर्ड मंगाकर शुरू की जांच

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बोकारो के जिला खाद्य आपूर्ति विभाग की मिलीभगत से सारे खेल को अंजाम दिया गया.

Akshay Kumar Jha

Ranchi: बोकारो में करीब 10 करोड़ रुपए का तेल का खेल हुआ है. यह काम बोकारो के खाद्य आपूर्ति विभाग में हुआ है. मामले की बकायदा जांच हुई. जांच में बात सही पायी गयी. लेकिन जांच रिपोर्ट को दबा दिया गया. बात 2008-09 की है. बोकारो के जिला खाद्य आपूर्ति विभाग की मिलीभगत से सारे खेल को अंजाम दिया गया. उस वक्त बोकारो के डीसी प्रवीण टोप्पो थे और डीएसओ दिनेश चंद्र मिश्रा, जो रांची प्रमंडल के आयुक्त पद से रिटायर हुए.प्रवीण टोप्पो के बाद बोकारो के डीसी सत्येंद्र सिंह बने. पूरे मामले की जांच भी हुई. जांच में सारे आरोप सही पाये गए. लेकिन प्रशासन का वही ढ़ाक के तीन पात वालारवैया. फाइल दब गयी. विभाग और कुछ बाहर के लोगों ने फिर से एक बार पब्लिक के पैसेका बंदरबांट किया. करीब नौ साल के बाद जब इस बात की जानकारी न्यूज विंग को लगी तोपड़ताल शुरू हुई है. कहावत है कि अधिकारी तो बदल जाते हैं, लेकिन कागज और सबूत वही के वही रहते हैं. इस पूरे मामले में कहावत सही होनेवाली है.

कैसा हुआ करीब 10 करोड़ रुपए का बंदरबांट

सारा खेल खाद्य आपूर्ति विभाग में किरोसिन तेल बांटने में हुआ. बोकारो में राशन कार्ड के आधार पर किरोसिन तेल बांटने के लिए विभाग धनबाद से हर प्रखंड में तेल मंगाता है. उस वक्त भी यही व्यवस्था थी. दूरी के हिसाब से विभाग ट्रांस्पोटरों का बिल बनाती है और उसी हिसाब से तेल का रेट भी फिक्स किया जाता है. धनबाद से बोकारो जिला के चंदन कियारी प्रखंड की दूरी 25 किमी है और गोमिया प्रखंड की 100 किमी. विभाग ने दूरी के हिसाब से ट्रांस्पोर्टिंग रेट ना फिक्स करते हुए सबसे लंबी दूरी यानि गोमिया के रेट के हिसाब से ट्रांस्पोर्टिंग बिल का रसीद ट्रांसेपोर्टरों को देने लगा, दूसरी तरफ ट्रांस्पोर्टरों की मिलीभगत से विभाग के अधिकारी और कर्मी अपनी जेब गर्म करने लगे. ऐसा काफी दिनों तक चलता रहा. करीब दस करोड़ का बंदरबांट ट्रांस्पोर्टरों ने और विभाग के लोगों ने मिल कर की.

जांच में सारी बात सच पायी गयी, लेकिन डीएसओ ने नहीं किया साइन

आरोप लगने के बाद तत्कालीन उपायुक्त प्रवीण टोप्पो ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनायी. कमेटी में तत्कालीन चास के एसडीएम कृपानंद झा, तत्कालीन डीएसओ दिनेशचंद्र मिश्रा और कार्यपालक दंडाधिकारी अखिलेश सिन्हा शामिल थे. तीनों ने मिलकर पूरे मामले की जांच की. जांच रिपोर्ट तैयार हो गयी. जांच के बाद यह साबित हो गया कि विभाग पर लग रहे आरोप सही हैं. जांच रिपोर्ट पर एसडीएम कृपानंद झा और कार्यपालक दंडाधिकारी अखिलेश सिन्हा ने अपना हस्ताक्षर कर दिया. लेकिन डीएसओ दिनेश चंद्र मिश्र ने साइन नहीं किया. काफी दिनों तक उनके साइन का इंतजार होता रहा. इसी बीच उपायुक्त प्रवीण टोप्पो का तबादला हो गया. इस बार बोकारो डीसी बनकर सत्येंद्र सिंह आए. जब बात उनके सामने आयी तो उन्होंने जांच रिपोर्ट आपूर्ति विभाग में भेजने का निर्देश दिया. बिना डीएसओ दिनेश चंद्र मिश्रा के साइन के ही रिपोर्ट आपूर्ति विभाग को भेज दी गयी.


खेल खाद्य आपूर्ति  मंत्री सरयू राय

मंत्री ने विभाग को रिकॉर्ड खंगालने का निर्देश दिया

मामले की जानकारी लेकर न्यूज विंग विभाग के वर्तमान मंत्री सरयू राय के पास पहुंचा. पूरी जानकारी मंत्री जी को दी गयी. जानकारी लेने और मामले को समझने के बाद उन्होंने बिना देर किए हुए अपने आप्त सचिव को किरोसिन तेल देखने वाले विभाग के लोगों को बुलाने को कहा. विभाग के लोग पांच मिनट में पहुंच गए. मंत्री जी ने सारी बात विभाग के कर्मी को समझायी और कहा कि जितनी जल्दी हो सके, पुराने रिकॉर्ड निकाले और मामले में कितना सच है, समयवार रिपोर्ट बनाकर दें.

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