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मिसाल, सदर अस्पताल में डॉक्टरों व नर्सों ने लावारिस वृद्धा को संभाल कर किया स्वस्थ

Ranchi: डॉक्टरों को धरती का भगवान ऐसे ही नहीं कहा जाता. कुछ डॉक्टरों को छोड़ दें तो मरीजों की जान बचाने के अलावा उनकी सेवा भी करते हैं. वहीं नर्स भी मरीज के लिए एक मां से कम नहीं होती. कुछ ऐसा ही नजारा सदर हॉस्पिटल में देखने को मिला जहां डॉक्टर और नर्स ने मिलकर ना केवल एक लावारिस महिला का इलाज किया, बल्कि उनकी देखरेख भी एक बच्चे की तरह की. बुधवार को ठीक होने के बाद उसे वृद्धा आश्रम में शिफ्ट कर दिया गया ताकि जब उनके परिजनों का पता चले तो वह उन्हें घर ले जा सके. साथ ही डॉक्टरों ने बताया कि महिला तेलुगू जानती है और बार-बार स्टेशन के बारे में बताती है.

वृद्धा को 29 अप्रैल को कोई सदर हॉस्पिटल में छोड़ कर चला गया था. डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया और टेस्ट कराया तो 2 मई को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई. इसके बाद डॉक्टर से लेकर नर्स ने उस महिला की पर्सनल केयर की. तीन दिन पहले उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आ गई, लेकिन कोई भी उन्हें हॉस्पिटल में लेने के लिए नहीं आया. इलाज के दौरान सभी ने उनका पूरा ध्यान रखा. डेली रूटीन में नहाने, खाने, बाल बनाने के काम ड्यूटी में तैनात नर्स ने किए. जिनमें सिस्टर नर्स शशि बाड़ा के अलावा डॉ अंशु टोप्पो, डॉ शेरान अली, डॉ ललिता मिंज, डॉ वरुण, सीओ गरिमा सिंह और एसडीओ उत्कर्ष गुप्ता का भी योगदान रहा.

 

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