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2 सालों तक कोरोना की आड़ में दामन बचाती रही निकम्मी सरकार, हो रही केवल तुष्टिकरण की राजनीतिः सीपी सिंह

Ranchi : प्रदेश भाजपा ने हेमंत सरकार की दो सालों को विफलताओं का साल बताया है. पूर्व मंत्री और रांची विधायक सीपी सिंह ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नगर विकास और परिवहन विभाग की जवाबदेही उन्होंने खुद भी पिछली सरकार में संभाली थी. 2014-2015 की अवधि में इस विभाग का बजट महज 900 करोड़ था. इसे बढ़ाकर तीन गुना तक किया गया. 2700 करोड़ तक हुए बजट के जरिये शहरी क्षेत्रों में पानी, शौचालय, आवास, साफ सफाई, नाली समेत दूसरे कई कामों के लिए पहल शुरू हुई. 2019 में हेमंत सरकार आयी. खाली खजाना का बहाना करती रही. कोरोना के बहाना का भी हवाला दिया.

सच यह है कि यह सरकार काम करने में पूरी तरह फेल साबित हुई है. पूर्ववर्ती सरकार की ही योजनाओं पर काम आगे बढ़ाती रही और क्रेडिट लेने में लगी है. दो साल में यूपी में हजारों करोड़ की लागत से एक्सप्रेस वे बन गया जिसकी सौगात पीएम मोदी के हाथों देश को मिली.

2019 में कानपुर में मेट्रो ट्रेन के लिए काम शुरू हुआ और अब यह सेवा देने को तैयार है. इसके विपरीत हेमंत सरकार कोरोना की आड़ में दामन बचाती आयी है.

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वेजिटेबल मार्केट से लेकर एयरपोर्ट तक सब भाजपा सरकार की देन

सीपी सिंह ने कहा कि रांची में वेजिटेबल मार्केट हो या हरमू में पटेल पार्क, सब रघुवर सरकार में ही काम आरंभ हुए. तालाबों, पार्कों के सुंदरीकरण का काम भी उसी समय की देन है.

देवघर में एयरपोर्ट निर्माण के काम भी उसी दौरान शुरू हुआ. पर हालत यह है कि हेमंत सरकार इसके लिए अपनी ही पीठ थपथपाने में लगी है. सरकार को अब जनता के सहयोग से काम करने के लिए बाध्य किया जायेगा.

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तुष्टिकरण की राजनीति से फुर्सत नहीं

राज्य में सरकार विधानसभा से लेकर नियोजन नीति तक में बस तुष्टिकरण की राजनीति करने में लगी है. क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में मैथिली, हिन्दी को शामिल नहीं किया गया. मगही, भोजपुरी के साथ भी भेदभाव दिखा चुकी है.

झारखंड में रहने वाला हर नागरिक झारखंडी है. इसके गठन में सभी भाषा-भाषियों का योगदान है. ऐसे में किसी भाषा विशेष के साथ पक्षपात स्वीकार्य नहीं. मॉब लिंचिंग का वास्तविक लक्ष्य भी वर्ग विशेष का तुष्टिकरण ही है. यह कांग्रेसी, वाम दलों द्वारा लाया गया शब्द है.

भारतीय कानून में पूर्व से ऐसे अपराध के लिए सजा की व्यवस्था है जिसमें दो या दो से अधिक लोगों, समूहों द्वारा सुनियोजित तरीके से किसी की जान ले ली जाये. मॉब लिंचिंग जैसे शब्द का इजाद ही तुष्टिकरण को दर्शाता है.

पेट्रोल में 25 रुपये की बीपीएल को छूट का मसला व्यावहारिक नहीं. इसके जरिए सरकार लोगों को छलने में ही लगी है. बीपीएल के घर में मोटरसाइकिल होना भी कम दिलचस्प नहीं. इसकी बजाये या तो सरकार सबों को इसका लाभ देती या फिर ग्रीन कार्ड होल्डर को भी लाभ देती तो कुछ ढंग की बात होती.

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