
Kolkata: कोविड-19 महामारी ने पश्चिम बंगाल में भी तेजी से पांव पसारना शुरू किया है. कुल मिलाकर यहां 80 से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं. सरकार ने आधिकारिक तौर पर तीन लोगों की मौत की पुष्टि की है.
हालांकि अनाधिकारिक तौर पर 12 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.आंकड़ों के अनुसार करीब 10 करोड़ की आबादी वाले पश्चिम बंगाल में 76 हजार लोगों में से केवल एक व्यक्ति का सैंपल टेस्ट किया गया है जो काफी कम है.
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सलाह दी है कि अगर कोरोना का संक्रमण पूरी तरह से रोकना है तो लॉकडाउन के साथ-साथ स्वास्थ्य जांच अभियान की शुरुआत भी करनी चाहिए. घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य को जांचने की सलाह भी विशेषज्ञों ने दी है.
अब तक 1301 सैंपल की जांच
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक अभी तक केवल 1301 लोगों के सैंपल जांचे गये हैं. यानी कुल आबादी से अनुपात निकाला जाये तो 76864 लोगों में से केवल एक व्यक्ति की जांच हो रही है जो संक्रमण का फैलाव रोकने के लिए संतोषजनक आंकड़ा नहीं है.
एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य सचिवालय में मीडिया से वार्ता में दावा किया था कि राज्य में 61 लोग कोरोना पॉजिटिव पाये गये हैं और तीन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 13 लोग स्वस्थ होकर घर लौटे हैं.
कम से कम लोगों के सैंपल जांचे जाने के संबंध में सफाई देते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया था कि राज्य सरकार के पास केवल 40 टेस्ट किट थे इसीलिए कम लोगों के सैंपल जांचे जा सके.
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किट की कमी से हो रही दिक्कत
उन्होंने बताया कि आइसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखने के बाद ही सैंपल टेस्ट करने के लिए कहा गया है. इस बीच टेस्ट किट की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोगों के सैंपल नहीं जांच सके हैं.
हालांकि कुछ दिनों पहले ही राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने बताया था कि केंद्र सरकार ने ममता बनर्जी की सरकार को 10000 टेस्ट किट दिया है. केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो ने भी यही दावा किया था.
इसके बावजूद 10 करोड़ की आबादी वाले बंगाल में केवल 1301 लोगों के सैंपल जांचे जाने के कारण सवाल खड़े हो रहे हैं. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया था कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में 50,000 से अधिक लोग क्वॉरेंटाइन में रखे गये हैं.
यानी इनके भी सैंपल नहीं जांचे गये हैं. यहां तक कि 1394 लोग अस्पतालों के आइसोलेशन में हैं.
सरकार नहीं जा रही कर रही आंकड़े
उल्लेखनीय है कि एक अप्रैल को बंगाल में कोरोना से मरने वालों की संख्या सात पर पहुंच गयी थी जबकि पीड़ितों की संख्या केवल 37 थी. उसके बाद कई जगह खबरें चली थीं कि पश्चिम बंगाल में प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति की मौत हो रही है.
यानी बंगाल में मौत का औसत पूरे देश से कई गुना ज्यादा था. इसके बाद मुख्यमंत्री काफी नाराज हुई और कहा था कि राज्य में जब तक स्वास्थ्य विभाग कोरोना से मौत की पुष्टि न करें तब तक कोई भी पत्रकार मौत की वजह कोरोना नहीं लिख सकता.
उसके बाद विभाग ने कोरोना से मरने वालों के आंकड़े जारी करने ही बंद कर दिये. एक अप्रैल के बाद जितने भी हेल्थ बुलेटिन जारी किये गये हैं उसमें किसी में भी मरने वालों की संख्या का जिक्र नहीं किया गया है.
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