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‘इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियन सर्विसेस लिमिटेड’ की तेजी से बिगड़ती वित्तीय स्थिति

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Girish Malviya

शेयर बाजार में पिछले 5 दिनों में निवेशकों के 8.47 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए हैं. वैसे इसके कई कारण बताए जा रहे हैं. जैसे कच्चे तेल के दामों में बढोत्तरी, रुपये का गिरना ओर अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की होने वाली मीटिंग, लेकिन लगातार आ रही गिरावट का एक विशिष्ट कारण और भी है.

और वो कारण है देश की अग्रणी आधारभूत संरचना विकास एवं वित्त कंपनी ‘इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियन सर्विसेस लिमिटेड’ (आईएल एंड एफएस) की बेहद तेजी से बिगड़ती वित्तीय स्थिति, मित्र और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ मुकेश असीम इसे भारत का ‘लीमैन ब्रदर्स’ बता रहे हैं.

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नवभारत टाइम्स ने अपने संपादकीय में जो लिखा है, उसे समझना बेहद आवश्यक है ‘अतीत में भारतीय शेयर बाजार कई बार इससे ज्यादा गिर चुके हैं. लेकिन इस बार की गिरावट साफ आसमान से बिजली गिर जाने जैसी है. इससे भी बुरी बात यह कि इसे निकट भविष्य में और भी अप्रत्याशित झटकों के संकेत की तरह देखा जा रहा है’
‘कच्चे तेल के बढ़ते दाम और डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत ने इसके लिए जमीन भी तैयार कर दी है. लेकिन शुक्रवार को बाजार में आए भूचाल का मुख्य कारण बना इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश से जुड़ी बड़ी कंपनी आईएल एंड एफएस का अपने कर्जों की किस्त न चुका पाना.’

आईएल एंड एफएस किस स्तर की कंपनी है ये इस बात से समझा जाइये कि खुद आरबीआई ने कहा है कि वह आगामी 28 सितंबर को कंपनी के शेयरधारकों से मिलेगा. इस कंपनी में एलआईसी की 25.34 फीसदी की हिस्सेदारी है. साथ ही जापान की कंपनी ओरिक्स कॉरपोरेट इस कंपनी में 23.54 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरा बड़ा साझेदार है. हालांकि, तीसरा सरकारी उपक्रम स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की भी इसमें 6.42 फीसदी हिस्सेदारी मौजूद है. HDFC बैंक भी इसमें हिस्सेदार है.

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आईएल एंड एफएस का संकट तब शुरू हुआ जब स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) के कॉरपोरेट डिपॉजिट की 450 करोड़ की राशि लौटाने में विफल रही. सारी समस्या लिक्विडिटी की है, यह देनदारी कंपनी पर सितंबर माह में भी चढ़ी हुई है. पिछले शुक्रवार को आईएल एंड एफएस ने शेयर बाजार को सूचित किया था कि वह आईडीबीआई बैंक के लेटर ऑफ क्रेडिट के मामले के समाधान में विफल है.

मोदी सरकार द्वारा IL & FS को इस संकट से उबारने की सारी जिम्मेदारी LIC ओर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया पर डाली जा रही है. इनसे 3,500 करोड़ रुपये कर्ज दिलवाया जा रहा है. लेकिन अभी तक यह प्रस्ताव उनकी SBI और LIC की निवेश समिति ने मंजूर नहीं की है. यानी एक बार फिर वही कहानी दोहराई जा रही है कि जनता की बचत के पैसों से बड़े पूंजीपतियों की मदद करना.

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IL & FS बहुत बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है देश में इसके सैकड़ों प्रोजेक्ट चल रहे हैं. दरअसल यह कंपनी बड़े ठेके खुद हासिल करती हैं और उस कांट्रेक्ट को बड़े पूंजीपतियों के हवाले कर देती है. देश में यह PPP यानी प्राइवेट पब्लिक पार्टनर का कॉन्सेप्ट लाने वाली पहली कंपनी है. यही कंपनी बनारस के घाटों की सफाई कर रही हैं, यही कंपनी जोजिला दर्रे में सड़क बना रही है. कश्मीर को भारत से जोड़ने वाली सुरंग का निर्माण कर रही है.

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और मोदी जी ने देश में 100 स्मार्ट सिटी के लिए जिस कंपनी को गुजरात डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के साथ देश की पहली स्मार्ट मॉडल सिटी बनाने का ठेका दिया था. यह वही कंपनी है 2007 में बनाई गयी, इस परियोजना के अधिकतर काम अधूरे पड़े हुए हैं. ऐसे ही कामों में लगवा कर देश का धन बर्बाद किया जा रहा है. और इसके नतीजे पूरा देश भुगत रहा है.

(लेखक आर्थिक मामलों के जानकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं)

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